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Baghpat News: खाते में पड़े रह गए 14 करोड़ रुपये, नालों में बह गया वर्षा का जल
Fri, 30 May 2025 12:31 AM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बागपत
संवाद न्यूज एजेंसी, बागपत
Updated Fri, 30 May 2025 12:31 AM IST
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बागपत। यहां भूजल स्तर लगातार गिरता जा रहा है और वर्षा जल संचय के लिए मिले बजट में 14 करोड़ रुपये चार साल में अधिकारी खर्च तक नहीं कर सके। प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के तहत वाटरशेड विकास प्रबंधन के कार्य नहीं कराए गए। जबकि बारिश का पानी संरक्षण की जगह नालों में बह रहा है। अब 14 करोड़ रुपये खर्च नहीं होने पर शासन ने नाराजगी जताई।
बागपत में गिरते भूजल स्तर को रोकने के लिए प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के तहत वाटरशेड विकास प्रबंधन के कार्य कराने के लिए वर्ष 2020-21 में 22 करोड़ रुपये की कार्ययोजना मंजूर हुई थी। इसमें 10 हजार हेक्टेयर जमीन पर वर्षा जल संचय किया जाना था। योजना का उद्देश्य जलग्रहण क्षेत्र में प्राकृतिक संसाधनों का दोहन, संरक्षण तथा विकास कराकर पारिस्थितिकी संतुलन बहाल करना है।
वहीं लोगों की आजीविका की राह आसान करना है। लेकिन चार साल गुजरने के बाद भी भूमि संरक्षण विभाग जल, जंगल और जमीन बचाने के लिए महज आठ करोड़ रुपये खर्च कर सका जो 35.39 प्रतिशत है। अब मात्र दस माह बचे हैं, जिनमें 14 करोड़ रुपये खर्च करने की चुनौती है।
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वहीं प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई के वाटरशेड विकास प्रबंधन के सीईओ जीएएस नवीन कुमार ने डीएम तथा सीडीओ को पत्र भेजकर बजट कम खर्च होने पर असंतोष जताया। इसके साथ ही चालू वित्त वर्ष की कार्ययोजना तैयार कराकर जल संचय के लिए बजट खर्च कराकर प्रगति बढ़ाने के लिए कहा है।
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ये होने हैं काम
वाटरशेड विकास प्रबंधन का उद्देश्य प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण, पुनर्जनन कराना है। यह योजना वर्षा जल संचय, भूजल स्तर में सुधार व फसल उत्पादन में वृद्धि कराकर किसानों की आय बढ़ाने के लिए है। जंगल में टीला क्षेत्र ठीक करना, मिट्टी सुधार व नमी संरक्षण, नर्सरी की स्थापना, चारागाह विकास, लोगों की आजीविका की राह आसान करना तथा भूजल दोहन में कमी लाने को गांव का पानी गांव में तथा खेत का पानी खेत की थीम पर कार्य कराए जाते हैं। वहीं जल संरक्षण के लिए लोगों को जागरूक किया जाता है।
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यह है भूजल दोहन की स्थिति
भूगर्भ जल विभाग की रिपोर्ट के अनुसार जिले की जमीन में सालाना 49628 हेक्टेयर मीटर पानी उपलब्ध होता है। जिसमें से वर्ष में 48748 हेक्टेयर मीटर पानी की निकासी की जाती है। भविष्य के लिए केवल 326 हेक्टेयर मीटर पानी बचा रहे हैं। राहत की बात यह है कि भूजल विकास दर 98 प्रतिशत से ज्यादा है।
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जिले के ब्लॉकों की स्थिति
ब्लाॅक श्रेणी
बिनौली अतिदोहित
खेकड़ा अतिदोहित
पिलाना अतिदोहित
बागपत सेमी क्रिटिकल
बड़ौत सेमी क्रिटिकल
छपरौली सेमी क्रिटिकल
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पीएम कृषि सिंचाई योजना के वाटरशेड विकास प्रबंधन की कार्ययोजना बागपत में दो साल विलंब से शुरू हुई। इसलिए बजट कम खर्च हुआ। अब कार्य कराए जा रहे हैं तथा समय रहते बजट खर्च हो जाएगा। - धीरज कुमार सिंह, भूमि संरक्षण अधिकारी
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बागपत में गिरते भूजल स्तर को रोकने के लिए प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के तहत वाटरशेड विकास प्रबंधन के कार्य कराने के लिए वर्ष 2020-21 में 22 करोड़ रुपये की कार्ययोजना मंजूर हुई थी। इसमें 10 हजार हेक्टेयर जमीन पर वर्षा जल संचय किया जाना था। योजना का उद्देश्य जलग्रहण क्षेत्र में प्राकृतिक संसाधनों का दोहन, संरक्षण तथा विकास कराकर पारिस्थितिकी संतुलन बहाल करना है।
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वहीं लोगों की आजीविका की राह आसान करना है। लेकिन चार साल गुजरने के बाद भी भूमि संरक्षण विभाग जल, जंगल और जमीन बचाने के लिए महज आठ करोड़ रुपये खर्च कर सका जो 35.39 प्रतिशत है। अब मात्र दस माह बचे हैं, जिनमें 14 करोड़ रुपये खर्च करने की चुनौती है।
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वहीं प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई के वाटरशेड विकास प्रबंधन के सीईओ जीएएस नवीन कुमार ने डीएम तथा सीडीओ को पत्र भेजकर बजट कम खर्च होने पर असंतोष जताया। इसके साथ ही चालू वित्त वर्ष की कार्ययोजना तैयार कराकर जल संचय के लिए बजट खर्च कराकर प्रगति बढ़ाने के लिए कहा है।
ये होने हैं काम
वाटरशेड विकास प्रबंधन का उद्देश्य प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण, पुनर्जनन कराना है। यह योजना वर्षा जल संचय, भूजल स्तर में सुधार व फसल उत्पादन में वृद्धि कराकर किसानों की आय बढ़ाने के लिए है। जंगल में टीला क्षेत्र ठीक करना, मिट्टी सुधार व नमी संरक्षण, नर्सरी की स्थापना, चारागाह विकास, लोगों की आजीविका की राह आसान करना तथा भूजल दोहन में कमी लाने को गांव का पानी गांव में तथा खेत का पानी खेत की थीम पर कार्य कराए जाते हैं। वहीं जल संरक्षण के लिए लोगों को जागरूक किया जाता है।
यह है भूजल दोहन की स्थिति
भूगर्भ जल विभाग की रिपोर्ट के अनुसार जिले की जमीन में सालाना 49628 हेक्टेयर मीटर पानी उपलब्ध होता है। जिसमें से वर्ष में 48748 हेक्टेयर मीटर पानी की निकासी की जाती है। भविष्य के लिए केवल 326 हेक्टेयर मीटर पानी बचा रहे हैं। राहत की बात यह है कि भूजल विकास दर 98 प्रतिशत से ज्यादा है।
जिले के ब्लॉकों की स्थिति
ब्लाॅक श्रेणी
बिनौली अतिदोहित
खेकड़ा अतिदोहित
पिलाना अतिदोहित
बागपत सेमी क्रिटिकल
बड़ौत सेमी क्रिटिकल
छपरौली सेमी क्रिटिकल
पीएम कृषि सिंचाई योजना के वाटरशेड विकास प्रबंधन की कार्ययोजना बागपत में दो साल विलंब से शुरू हुई। इसलिए बजट कम खर्च हुआ। अब कार्य कराए जा रहे हैं तथा समय रहते बजट खर्च हो जाएगा। - धीरज कुमार सिंह, भूमि संरक्षण अधिकारी