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पांचवे दिन उतम सत्य धर्म को अंगीकार किया
Updated Wed, 19 Sep 2018 01:28 AM IST
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बड़ौत (बागपत)।
जैन अनुयायियों के चल रहे दसलक्षण पर्व के पांचवें दिन उत्तम सत्य धर्म को जैन अनुयायियों ने अंगीकार कर विशेष पूजा अर्चना की और मंदिरों में विधान और भजन संध्या के कार्यक्रम आयोजित किए गए।
दिगंबर जैन बड़ा मंदिर में तेरहदीप महामंडल विधान में जैन श्रद्धालुओं ने भगवान चंद्र प्रभु का अभिषेक विधि रूप से किया। इसके बाद दसलक्षण पर्व की पूजा की गई। पंडित आशीष जैन के निर्देशन में विधान में पश्चिम विधेय संबंधी षोडश रूपांचल, दक्षिण दिशा, भरत क्षेत्र संबंधी जिन मंदिर, विजय मेरू के उत्तर दिशा संबंधी अहरावत क्षेत्र, विजय मेरू के उत्तर दक्षिण षटकुलाचल की धातु की दीप मध्यम पश्चिम दिशा, अचल मेरू आदि छह प्रकार की पूजा की। बीच-बीच में इंद्र व इंद्राणी ने भक्ति भाव पूर्वक नृत्य कर भावना व्यक्त की । इसके अलावा जैन छोटा मंदिर, दिगंबर जैन अतिथि भवन में श्रद्धालुओं द्वारा विशेष पूजा-अर्चना भक्ति भाव से की गई। सायंकाल बड़ा जैन मंदिर में बाल सदन के बच्चों ने कार्यक्रम प्रस्तुत किया। छोटा जैन मंदिर व अतिथि भवन में भगवान की आरती उतारी। इसके बाद दिगंबर जैन बड़ा मंदिर में धार्मिक प्रतियोगिता कराई और दिगंबर जैन अतिथि भवन में धार्मिक प्रस्तुति की। इसमें प्रवीण जैन, अतुल जैन, शील चंद, सतीश जैन, सुरेंद्र, प्रदीप, दिनेश जैन, विपुल जैन, श्रवण जैन, सुख माल जैन, संदीप जैन आदि रहे।
सत्य परेशान तो हो सकता है लेकिन पराजित नहीं - सूरतन सागर
बड़ौत। दसलक्षण पर्व के पांचवें दिन श्री 1008 अजितनाथ दिगंबर जैन प्राचीन मंदिर मंडी में मुनि श्री 108 सुरतन सागर महाराज के पावन सानिध्य में श्री दसलक्षण महामंडल विधान के अंतर्गत उत्तम सत्य धर्म की पूजा की गई। सौधर्म इंद्र विनोद जैन के नेतृत्व में देवाधिदेव अजितनाथ भगवान की प्रतिमा का जैन श्रद्धालुओं ने गर्म प्रसुक़ जल से अभिषेक किया और शांति धारा की।
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तत्पश्चात नित्य नियम पूजन में श्री चंद्रप्रभु पूजन, समुच्चय पूजन, नवकार पूजन ,सोलह कारण पूजन तथा पंचमेरू पूजन की। श्री दसलक्षण विधान की पूजन में ब्रह्मचारिणी मधु दीदी व सीमा दीदी के निर्देशन में उत्तम सत्य धर्म की पूजा की। इस मौके पर जैन श्रद्धालुओं ने भाव विभोर होकर भक्ति नृत्य किया। संगीतकार विकास म्यूजिकल ग्रुप के भक्ति संगीत को विशेष रुप से सराहा । विधान के मध्य मंगल प्रवचन देते मुनि श्री सुरतन सागर महाराज ने कहा कि आज उत्तम सत्य धर्म का दिन है। सत्य धर्म हमें सिखाता है झूठ ना बोलना अर्थात व्यक्ति के मन में जो बात है, वही बात कहनी । ऐसा नहीं कि मन में तो भाव कुछ और हैं और सामने वालों को कुछ और दर्शाई जा रहे हैं। सत्यवादी हरिश्चंद्र का तो उदाहरण हम सब सो नहीं चुके हैं। सत्य परेशान तो हो सकता है, लेकिन पराजित नहीं। अंत में जीत सत्य की ही होती है । व्यक्ति एक झूठ छुपाने के चक्कर में सौ झूठ बोलता है। यदि वह एक बार ही सच बोल दे तो उसे झूठ बोलने की नौबत ही ना आए। अत: व्यक्ति को सदैव सत्य वचन बोलना चाहिए और सत्य का ही अनुसरण करना चाहिए। सभा में सुभाष जैन, मुकेश जैन ,अशोक जैन, वरदान जैन ,सचिन जैन ,प्रदीप जैन ,मदन लाल जैन, महेंद्र जैन, अरुण जैन आदि रहे। शाम को मंदिर जी में गुरु भक्ति ,आरती तथा फैंसी ड्रेस प्रतियोगिता का आयोजन किया । इसमें 50 से अधिक बच्चों ने भाग लिया। बच्चे धार्मिक और देशभक्ति से ओतप्रोत किरदारों में सजे। पुरस्कार वितरण प्रेम चंद पवन कुमार जैन एवं संजीव जैन किरठल वालों ने किया।
पूजा अर्चना की
बड़ौत। शांति नाथ दिगंबर जैन मंदिर मेें कमेटी के अध्यक्ष रमेश कुमार जग्गरी डेयरी वालों द्वारा महावीर विधान का आयोजन किया। इसमेें जैन समाज के लोगों ने धर्म प्रभावना की पूजा की तथा उत्तम सत्य धर्म को अंगीकार किया।
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जैन अनुयायियों के चल रहे दसलक्षण पर्व के पांचवें दिन उत्तम सत्य धर्म को जैन अनुयायियों ने अंगीकार कर विशेष पूजा अर्चना की और मंदिरों में विधान और भजन संध्या के कार्यक्रम आयोजित किए गए।
दिगंबर जैन बड़ा मंदिर में तेरहदीप महामंडल विधान में जैन श्रद्धालुओं ने भगवान चंद्र प्रभु का अभिषेक विधि रूप से किया। इसके बाद दसलक्षण पर्व की पूजा की गई। पंडित आशीष जैन के निर्देशन में विधान में पश्चिम विधेय संबंधी षोडश रूपांचल, दक्षिण दिशा, भरत क्षेत्र संबंधी जिन मंदिर, विजय मेरू के उत्तर दिशा संबंधी अहरावत क्षेत्र, विजय मेरू के उत्तर दक्षिण षटकुलाचल की धातु की दीप मध्यम पश्चिम दिशा, अचल मेरू आदि छह प्रकार की पूजा की। बीच-बीच में इंद्र व इंद्राणी ने भक्ति भाव पूर्वक नृत्य कर भावना व्यक्त की । इसके अलावा जैन छोटा मंदिर, दिगंबर जैन अतिथि भवन में श्रद्धालुओं द्वारा विशेष पूजा-अर्चना भक्ति भाव से की गई। सायंकाल बड़ा जैन मंदिर में बाल सदन के बच्चों ने कार्यक्रम प्रस्तुत किया। छोटा जैन मंदिर व अतिथि भवन में भगवान की आरती उतारी। इसके बाद दिगंबर जैन बड़ा मंदिर में धार्मिक प्रतियोगिता कराई और दिगंबर जैन अतिथि भवन में धार्मिक प्रस्तुति की। इसमें प्रवीण जैन, अतुल जैन, शील चंद, सतीश जैन, सुरेंद्र, प्रदीप, दिनेश जैन, विपुल जैन, श्रवण जैन, सुख माल जैन, संदीप जैन आदि रहे।
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सत्य परेशान तो हो सकता है लेकिन पराजित नहीं - सूरतन सागर
बड़ौत। दसलक्षण पर्व के पांचवें दिन श्री 1008 अजितनाथ दिगंबर जैन प्राचीन मंदिर मंडी में मुनि श्री 108 सुरतन सागर महाराज के पावन सानिध्य में श्री दसलक्षण महामंडल विधान के अंतर्गत उत्तम सत्य धर्म की पूजा की गई। सौधर्म इंद्र विनोद जैन के नेतृत्व में देवाधिदेव अजितनाथ भगवान की प्रतिमा का जैन श्रद्धालुओं ने गर्म प्रसुक़ जल से अभिषेक किया और शांति धारा की।
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तत्पश्चात नित्य नियम पूजन में श्री चंद्रप्रभु पूजन, समुच्चय पूजन, नवकार पूजन ,सोलह कारण पूजन तथा पंचमेरू पूजन की। श्री दसलक्षण विधान की पूजन में ब्रह्मचारिणी मधु दीदी व सीमा दीदी के निर्देशन में उत्तम सत्य धर्म की पूजा की। इस मौके पर जैन श्रद्धालुओं ने भाव विभोर होकर भक्ति नृत्य किया। संगीतकार विकास म्यूजिकल ग्रुप के भक्ति संगीत को विशेष रुप से सराहा । विधान के मध्य मंगल प्रवचन देते मुनि श्री सुरतन सागर महाराज ने कहा कि आज उत्तम सत्य धर्म का दिन है। सत्य धर्म हमें सिखाता है झूठ ना बोलना अर्थात व्यक्ति के मन में जो बात है, वही बात कहनी । ऐसा नहीं कि मन में तो भाव कुछ और हैं और सामने वालों को कुछ और दर्शाई जा रहे हैं। सत्यवादी हरिश्चंद्र का तो उदाहरण हम सब सो नहीं चुके हैं। सत्य परेशान तो हो सकता है, लेकिन पराजित नहीं। अंत में जीत सत्य की ही होती है । व्यक्ति एक झूठ छुपाने के चक्कर में सौ झूठ बोलता है। यदि वह एक बार ही सच बोल दे तो उसे झूठ बोलने की नौबत ही ना आए। अत: व्यक्ति को सदैव सत्य वचन बोलना चाहिए और सत्य का ही अनुसरण करना चाहिए। सभा में सुभाष जैन, मुकेश जैन ,अशोक जैन, वरदान जैन ,सचिन जैन ,प्रदीप जैन ,मदन लाल जैन, महेंद्र जैन, अरुण जैन आदि रहे। शाम को मंदिर जी में गुरु भक्ति ,आरती तथा फैंसी ड्रेस प्रतियोगिता का आयोजन किया । इसमें 50 से अधिक बच्चों ने भाग लिया। बच्चे धार्मिक और देशभक्ति से ओतप्रोत किरदारों में सजे। पुरस्कार वितरण प्रेम चंद पवन कुमार जैन एवं संजीव जैन किरठल वालों ने किया।
पूजा अर्चना की
बड़ौत। शांति नाथ दिगंबर जैन मंदिर मेें कमेटी के अध्यक्ष रमेश कुमार जग्गरी डेयरी वालों द्वारा महावीर विधान का आयोजन किया। इसमेें जैन समाज के लोगों ने धर्म प्रभावना की पूजा की तथा उत्तम सत्य धर्म को अंगीकार किया।