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सदगुरु के सानिध्य में रहकर मनुष्य जीवन में सुख शांति प्राप्त कर सकता है
Updated Sat, 20 Jan 2018 12:29 AM IST
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यजुर्वेद पारायण यज्ञ में वेद मंत्रों का उच्चारण
बिनौली। सिद्ध गुरुपीठ नीलकंठ आश्रम जिवाना गुलियान में चल रहे पांच दिवसीय यजुर्वेद पारायण महायज्ञ के दूसरे दिन शुक्रवार को श्रद्धालुओं को उपदेश देते हुए सिद्ध गुरु महाराज ने कहा कि सद्गुरु के सानिध्य में रहकर मनुष्य जीवन में सुख शांति प्राप्त कर सकता है। यज्ञ के दौरान वेद मंत्रों का उच्चारण किया गया।
महा गुरुदेव अवतरण दिवस के रजत जयंती वर्ष के उपलक्ष्य में आयोजित महायज्ञ में नीलकंठ आश्रम के पीठाधीश सिद्धगुरु महाराज ने कहा कि गुरु का मनुष्य के जीवन में बड़ा महत्व है। सद्गुरु ही जीव को मुक्ति का रास्ता दिखाता है तथा परमात्मा से मिलन कराता है। उन्होंने कहा सत्य मार्ग से ही मानव सुख शांति का जीवन व्यतीत कर सकता है। मानव में सत्य को धारण करने की शक्ति बनी रहे, इसके लिए गुरु का साथ जरूरी है। इस अवसर पर आचार्य अमित शास्त्री ने कहा कि जीवन में श्रेष्ठ कर्म करने वाला मनुष्य ही महान बनता है। यज्ञ संसार का सर्वश्रेष्ठ कर्म है। इसलिए हम सबको यज्ञ कर्म को जीवन में आत्मसात करना चाहिए। आचार्य अंकुर भारद्वाज ने ईश भक्ति से ओतप्रोत भजन प्रस्तुत किए। तथा सस्वर वेद मंत्रों का उच्चारण किया। इस अवसर पर दूर दराज से आये सैकड़ों श्रद्धालुओं ने महायज्ञ में आहुति देकर धर्मलाभ उठाया।
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बिनौली। सिद्ध गुरुपीठ नीलकंठ आश्रम जिवाना गुलियान में चल रहे पांच दिवसीय यजुर्वेद पारायण महायज्ञ के दूसरे दिन शुक्रवार को श्रद्धालुओं को उपदेश देते हुए सिद्ध गुरु महाराज ने कहा कि सद्गुरु के सानिध्य में रहकर मनुष्य जीवन में सुख शांति प्राप्त कर सकता है। यज्ञ के दौरान वेद मंत्रों का उच्चारण किया गया।
महा गुरुदेव अवतरण दिवस के रजत जयंती वर्ष के उपलक्ष्य में आयोजित महायज्ञ में नीलकंठ आश्रम के पीठाधीश सिद्धगुरु महाराज ने कहा कि गुरु का मनुष्य के जीवन में बड़ा महत्व है। सद्गुरु ही जीव को मुक्ति का रास्ता दिखाता है तथा परमात्मा से मिलन कराता है। उन्होंने कहा सत्य मार्ग से ही मानव सुख शांति का जीवन व्यतीत कर सकता है। मानव में सत्य को धारण करने की शक्ति बनी रहे, इसके लिए गुरु का साथ जरूरी है। इस अवसर पर आचार्य अमित शास्त्री ने कहा कि जीवन में श्रेष्ठ कर्म करने वाला मनुष्य ही महान बनता है। यज्ञ संसार का सर्वश्रेष्ठ कर्म है। इसलिए हम सबको यज्ञ कर्म को जीवन में आत्मसात करना चाहिए। आचार्य अंकुर भारद्वाज ने ईश भक्ति से ओतप्रोत भजन प्रस्तुत किए। तथा सस्वर वेद मंत्रों का उच्चारण किया। इस अवसर पर दूर दराज से आये सैकड़ों श्रद्धालुओं ने महायज्ञ में आहुति देकर धर्मलाभ उठाया।
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