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पर्यूषण पर्व के दूसरे दिन उतम मार्दव धर्म हुई पूजा
Updated Sun, 16 Sep 2018 01:24 AM IST
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बागपत। पर्यूषण पर्व के दूसरे दिन जैन मंदिर में श्रद्धालुओं ने उत्तम मार्दव धर्म की पूजा की। भगवान श्री 1008 अजितनाथ, नेमिनाथ, शांतिनाथ और भगवान पाश्र्वनाथ शुद्ध जल से अभिषेक किया। इसके बाद शांति धारा कराई।
शहर के श्री दिगंबर जैन बड़ा मंदिर में दशलक्षण पर्व का धूमधाम से मनाया जा रहा है। दूसरे दिन जैन श्रद्धालुओं ने उत्तम मार्दव धर्म की पूजा की। उज्जैन से पधारे पंडित अशोक जैन और मयंक जैन के निर्देशन में भगवान श्री 1008 अजितनाथ, नेमिनाथ, शांतिनाथ, पार्श्वनाथ का मंत्रोचारण से अभिषेक किया। शांतिधारा कराई। इसकी बोली अतुल जैन, आनंद जैन को प्राप्त हुई। नित्य नियम पूजन, दशलक्षण धर्म पूजन में उत्तम मार्दव धर्म की पूजा हुई। कल्पदु्रम विधान प्रारंभ हुआ। इसमें दो पूजन के समय 96 अर्घ्य समोशरण निर्मित मंडलों पर अर्पित किया। पंडित अशोक जैन ने कहा कि आज उत्तम मार्दव धर्म है और मान के अभाव का नाम मार्दव धर्म है। इस पर्व में सभी आम साधना एवं संयम के साथ अपना जीवन व्यतीत करते हैं। प्राणी मात्र पर क्रोध नहीं करना और उनकी दया पालना चाहिए। सामूहिक आरती के उपरांत सांस्कृतिक कार्यक्रम की श्रृंखला में सुकुमाल बने मुनी सुकुमाल की सुंदर नाटिका का मंचन किया। जैन समाज के बच्चों ने सांस्कृतिक नाटकों का मंचन किया। इसमें पीयूष जैन, बिजेंद्र जैन, अतुल जैन, मयंक जैन, विकास जैन, मोहित जैन, पुनीत जैन, नमन जैन, नीलम जैन, प्रिया, कामिनी मौजूद रहे।
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शहर के श्री दिगंबर जैन बड़ा मंदिर में दशलक्षण पर्व का धूमधाम से मनाया जा रहा है। दूसरे दिन जैन श्रद्धालुओं ने उत्तम मार्दव धर्म की पूजा की। उज्जैन से पधारे पंडित अशोक जैन और मयंक जैन के निर्देशन में भगवान श्री 1008 अजितनाथ, नेमिनाथ, शांतिनाथ, पार्श्वनाथ का मंत्रोचारण से अभिषेक किया। शांतिधारा कराई। इसकी बोली अतुल जैन, आनंद जैन को प्राप्त हुई। नित्य नियम पूजन, दशलक्षण धर्म पूजन में उत्तम मार्दव धर्म की पूजा हुई। कल्पदु्रम विधान प्रारंभ हुआ। इसमें दो पूजन के समय 96 अर्घ्य समोशरण निर्मित मंडलों पर अर्पित किया। पंडित अशोक जैन ने कहा कि आज उत्तम मार्दव धर्म है और मान के अभाव का नाम मार्दव धर्म है। इस पर्व में सभी आम साधना एवं संयम के साथ अपना जीवन व्यतीत करते हैं। प्राणी मात्र पर क्रोध नहीं करना और उनकी दया पालना चाहिए। सामूहिक आरती के उपरांत सांस्कृतिक कार्यक्रम की श्रृंखला में सुकुमाल बने मुनी सुकुमाल की सुंदर नाटिका का मंचन किया। जैन समाज के बच्चों ने सांस्कृतिक नाटकों का मंचन किया। इसमें पीयूष जैन, बिजेंद्र जैन, अतुल जैन, मयंक जैन, विकास जैन, मोहित जैन, पुनीत जैन, नमन जैन, नीलम जैन, प्रिया, कामिनी मौजूद रहे।
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