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मां भगवती के पांचवे स्वरुप स्कन्द माता की आराधना की
Updated Tue, 26 Sep 2017 01:31 AM IST
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बागपत। शारदीय नवरात्र में मां भगवती के पांचवें स्वरूप स्कंद माता की चमेली के फूल, अनार फल और पंच मेवा से पूजा अर्चना की। मां भगवती का श्रृंगार किया। दुर्गा सरस्वती का पाठ किया। माता की चौकी पर देवी की आराधना की।
सोमवार को नवरात्र के पांचवें दिन मां भगवती के पांचवें स्वरूप स्कंद माता की आराधना की । चमेली के फूल और अनार के फल के साथ पंच मेवा अर्पित कर मां की आराधना की । ज्योतिषाचार्य राज कुमार शास्त्री ने बताया स्कंद माता वात्सल्य की मूर्ति है। जिनको संतान नहीं होती है, उन्हें इनकी पूजा अर्चना करने से उनकी यह मुराद मां पूरी कर देती है। भगवान कार्तिकेय बाल रूप से स्कंद माता की गोद में बैठे हैं। माता की उपासना के साथ ही भगवान स्कंद की भी पूजा स्वत: हो जाती है, क्योंकि स्कंद भगवान बाल रूप में सदा अपनी माता की गोद में विराजमान रहते हैं। भवसागर के दु:खों से छुटकारा पाने के लिए इससे दूसरा सुलभ रास्ता नहीं है। इनकी उपासना पूजा से मन की कंठा, कलह, द्वेष सब समाप्त हो जाता है। मृत्युलोक में स्वर्ग की भांति परम सुख का अनुभव भक्त प्राप्त करते हैं। बाबा जानकी दास मंदिर में दिव्य आरती हुई। प्रसाद का वितरण किया । इसमें सुमन, कौशल, आरती, राज रानी, दुर्गावती, सुभाष, गुलशन, राजेश गौतम, मनीष, दीपक मिश्रा, संजय शर्मा आदि रहे।
पुरानी तहसील मोहल्ले में माता की चौकी पर स्कंद माता की पूजा अर्चना की । माता का गुणगान किया। मनमोहक झांकियों ने श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध किया। इसमें देवेंद्र शर्मा, मिट्ठन लाल वर्मा, उपेंद्र शर्मा, राजीव, दिनेश, रामू, राजीव, बांके लाल, पप्पू, मनीष आदि रहे। शहर के बागेश्वर महादेव मंदिर, हनुमान मंदिर, पक्का घाट, शालिगराम, शिव मंदिर में श्रद्धालुओं ने भजन कीर्तन कर मां का गुणगान किया।
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सोमवार को नवरात्र के पांचवें दिन मां भगवती के पांचवें स्वरूप स्कंद माता की आराधना की । चमेली के फूल और अनार के फल के साथ पंच मेवा अर्पित कर मां की आराधना की । ज्योतिषाचार्य राज कुमार शास्त्री ने बताया स्कंद माता वात्सल्य की मूर्ति है। जिनको संतान नहीं होती है, उन्हें इनकी पूजा अर्चना करने से उनकी यह मुराद मां पूरी कर देती है। भगवान कार्तिकेय बाल रूप से स्कंद माता की गोद में बैठे हैं। माता की उपासना के साथ ही भगवान स्कंद की भी पूजा स्वत: हो जाती है, क्योंकि स्कंद भगवान बाल रूप में सदा अपनी माता की गोद में विराजमान रहते हैं। भवसागर के दु:खों से छुटकारा पाने के लिए इससे दूसरा सुलभ रास्ता नहीं है। इनकी उपासना पूजा से मन की कंठा, कलह, द्वेष सब समाप्त हो जाता है। मृत्युलोक में स्वर्ग की भांति परम सुख का अनुभव भक्त प्राप्त करते हैं। बाबा जानकी दास मंदिर में दिव्य आरती हुई। प्रसाद का वितरण किया । इसमें सुमन, कौशल, आरती, राज रानी, दुर्गावती, सुभाष, गुलशन, राजेश गौतम, मनीष, दीपक मिश्रा, संजय शर्मा आदि रहे।
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पुरानी तहसील मोहल्ले में माता की चौकी पर स्कंद माता की पूजा अर्चना की । माता का गुणगान किया। मनमोहक झांकियों ने श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध किया। इसमें देवेंद्र शर्मा, मिट्ठन लाल वर्मा, उपेंद्र शर्मा, राजीव, दिनेश, रामू, राजीव, बांके लाल, पप्पू, मनीष आदि रहे। शहर के बागेश्वर महादेव मंदिर, हनुमान मंदिर, पक्का घाट, शालिगराम, शिव मंदिर में श्रद्धालुओं ने भजन कीर्तन कर मां का गुणगान किया।
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