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तीन राइस मिलरों के संपत्तियों का हुआ मूल्यांकन
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सरकार की ओर से प्रतिवर्ष किसानों केे उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाने के लिए धान और गेहूं की खरीद की जाती है। गेहूं को गोदामों में भरने के साथ ही धान को खरीद कर मिलरों का इसका चावल बनाने के लिए एग्रीमेंट कर धान का आवंटन किया जाता है। लेकिन पिछले साल धान लेने वाले आठ मिलरों ने चावल जमा नहीं किया। जिसके कारण अब प्रशासन कार्रवाई के मूड में आ चुका है।
जिले में पिछले वर्ष हुई धान खरीद के बाद धान को मिलरों से एग्रीमेंट करने के बाद धान का आवंटन कर दिया गया। आवंटन के बाद इनमें से आठ मिलरों से सरकार से मिले धान से बने चावल को वापस नहीं किया। इनमें पांच मिलर पीसीएफ से संबद्घ हैं जबकि तीन राइस मिलें मार्केटिंग से जुड़ी थी। अब इनसे बकाया धान की वसूली के लिए प्रशासन ने कमर कसी है। इसी क्रम में सोमवार को मार्केटिंग विभाग द्वारा तीन मिलरों जिवली ठेकमा, कृष्णा ग्रामोद्योग ठेकमा और बाबा कीनाराम राइस मिल सदर के मिलरों के संपत्ति का मूल्यांकन किया गया। डिप्टी आरएमओ गोविंद उपाध्याय ने बताया कि इन लोगों के ऊपर चावल का बकाया है। जिसकी वसूली के लिए प्रयास किया जा रहा है। इसी मामले में एक मिलर के खिलाफ एफआईआर भी दर्ज कराई जा चुकी है।
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जिले में पिछले वर्ष हुई धान खरीद के बाद धान को मिलरों से एग्रीमेंट करने के बाद धान का आवंटन कर दिया गया। आवंटन के बाद इनमें से आठ मिलरों से सरकार से मिले धान से बने चावल को वापस नहीं किया। इनमें पांच मिलर पीसीएफ से संबद्घ हैं जबकि तीन राइस मिलें मार्केटिंग से जुड़ी थी। अब इनसे बकाया धान की वसूली के लिए प्रशासन ने कमर कसी है। इसी क्रम में सोमवार को मार्केटिंग विभाग द्वारा तीन मिलरों जिवली ठेकमा, कृष्णा ग्रामोद्योग ठेकमा और बाबा कीनाराम राइस मिल सदर के मिलरों के संपत्ति का मूल्यांकन किया गया। डिप्टी आरएमओ गोविंद उपाध्याय ने बताया कि इन लोगों के ऊपर चावल का बकाया है। जिसकी वसूली के लिए प्रयास किया जा रहा है। इसी मामले में एक मिलर के खिलाफ एफआईआर भी दर्ज कराई जा चुकी है।
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