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तुलसी की खेती से किसानों की बढ़ी समृद्धि

Sun, 13 Feb 2022 11:15 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Sun, 13 Feb 2022 11:15 PM IST
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Tulsi cultivation increased prosperity of farmers
बीते 23 वर्षों से कम्हेनपुर के किसानों की आजीविका का साधन बनी तुलसी अब दो अन्य गांव हरैया और सिलनी के किसानों को भी समृद्ध बना रही है। इन गांवों के एक हजार से अधिक किसानों ने आस्था की प्रतीक तुलसी के पौधे की व्यावसायिक स्तर पर खेती शुरू की है। प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना में तुलसी उत्पादन के लिए जिले का चयन किया गया है। इसके बाद किसानों का रुझान तुलसी की खेती के प्रति बढ़ा है। अब तुलसी की खेती से किसानों की जिंदगी महक रही है।
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तुलसी का पौधा हर आंगन में लगाया जाता है। हिंदू आस्था से जुड़ा यह पौधा औषधीय गुणों से भी भरपूर है। परंपरागत खेती में लागत ज्यादा और मुनाफा कम होने कारण शहर से सटे कम्हेनपुर के किसानों ने सबसे पहले तुलसी की खेती आर्गेनिक विधि से करनी शुरू की। वर्ष 1998 से यहां पर तुलसी की खेती हो रही है। तुलसी के विपणन की समस्या ज्यादा है। उत्पादन को देखते हुए ब्रिटिश कंपनी आर्गेनिक इंडिया ने यहां अपनी प्रोसेसिंग यूनिट लगा दी तो विपणन की समस्या से भी किसान मुक्त हो गए। मुनाफा होने लगा तो आसपास के एक दर्जन गांवों में भी इसकी खेती शुरू हो गई। हालांकि बाद में कुछ समस्या आने पर दूसरे गांवों के लोगों ने इसकी खेती छोड़ दी लेकिन कम्हेनपुर, हरैया व सिलनी गांव के 1000 हजार से अधिक किसान इसकी खेती कर रहे हैं। सरकार ने प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना में जिले का चयन तुलसी उत्पादन के लिए किया गया है। 110 हेक्टेयर से अधिक रकबे में किसान तुलसी की खेती करते हैं। एक जिला एक उत्पाद योजना में शामिल होने के बाद किसानों का झुकाव इस तरफ हो गया है। किसान अब इसकी खेती कर रहे हैं।
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आर्गेनिक इंडिया करती है तुलसी की खरीद
आजमगढ़। जिला उद्यान अधिकारी ममता सिंह यादव ने बताया कि आर्गेनिक इंडिया का प्लांट स्थापित किया गया है। वह किसानों से तैयार तुलसी की फसल खरीदती है। तुलसी के डस्ट, अर्क और डंठल से उत्पाद तैयार कर अमेरिका, जर्मनी, जापान व स्विट्जरलैंड भेजा जाता है। अंतर्राष्ट्रीय बाजार में इसके बेहतर दाम मिल जाते हैं। जिले में जैविक विधि उत्पादित तुलसी का चाय के रूप में भी इस्तेमाल होता है और दवाएं भी बनती हैं। किसानों को तुलसी की खेती में मुनाफा होता है। कारण कि इस खेती में बीज मुफ्त में मिलता है। खाद की जरूरत नहीं पड़ती है।
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सिंचाई की भी बेहतर व्यवस्था
आजमगढ़। तुलसी की खेती करने वाले किसानों को सिंचाई के लिए परेशान नहीं होना पड़ता है। तीन से चार बीघा वाले किसानों के यहां आर्गेनिक इंडिया की ओर से फसलों की सिंचाई के लिए ट्यूबवेल की भी व्यवस्था की गई है। सिर्फ बिजली का बिल किसानों को देना पड़ता है। किसान तुलसी की खेती के साथ-साथ सहफसली की खेती भी आसानी से कर लेते हैं।
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