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Azamgarh News: जीएसटी की गणित में उलझे व्यापारी, पूंजी फंसने के डर से स्टॉक मंगाने में कर रहे परहेज

Sat, 20 Sep 2025 01:20 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Sat, 20 Sep 2025 01:20 AM IST
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Traders are entangled in the GST math, and are avoiding ordering stock for fear of capital being stuck.
त्योहारी सीजन की शुरुआत से पहले ही जिले के व्यापारी जीएसटी की गणित में उलझ गए हैं। 22 सितंबर से जीएसटी की नई दरें लागू हो जाएंगी। इससे बाजार में सामान की कीमतों का समीकरण बदलने वाला है। इसी बदलाव ने व्यापारियों की तैयारियों पर ब्रेक लगा दी है। व्यापारी असमंजस में हैं कि मौजूदा दर पर माल मंगवाएं या नई दरों का इंतजार करें।
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अर्थशास्त्रियों के मुताबिक, दुर्गा पूजा से दीपावली तक जनपद के बाजार में लगभग 1000 करोड़ रुपये से अधिक का कारोबार होता है। कपड़े, मिठाई, सजावट सामग्री, जूते-चप्पल, इलेक्ट्रॉनिक्स, पूजा सामग्री से लेकर यात्रा और मनोरंजन तक हर क्षेत्र में रोनक रहती है। इस बार उपभोक्ता खर्च में 15-20 प्रतिशत तक वृद्धि हो सकती है, लेकिन व्यापारियों की उलझन यह है कि 22 सितंबर के बाद जीएसटी दरें घटने वाली हैं, ऐसे में अगर वे अभी स्टॉक खरीदते हैं तो उन्हें ज्यादा टैक्स देना पड़ेगा, लेकिन माल बेचना कम दर पर होगा। इससे उनकी पूंजी फंस सकती है और आईटीसी का समायोजन करना भी चुनौतीपूर्ण होगा। कर मामलों के विशेषज्ञ जय गोविंद सिंह ने बताया कि यदि व्यापारी उच्च दर पर माल खरीदते हैं और बाद में निम्न दर पर बेचते हैं, तो आईटीसी समायोजन में अंतर आएगा। क्योंकि जो आईटीसी 28 प्रतिशत पर मिला है, उसे 18 प्रतिशत पर समायोजित करना होगा। शेष 10 प्रतिशत क्रेडिट लेजर में फंसा रह जाएगा, जिसका उपयोग करना मुश्किल होगा।
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व्यापारी बोले
कृषि यंत्र के फुटकर कारोबारी बृजेश यादव ने बताया कि माल तो पुराने स्लैब पर ही मंगवा रहे हैं लेकिन आपूर्ति नए स्लैब पर ही देंगे। बुकिंग बढ़ी है, मगर दर को लेकर सतर्कता बरतनी पड़ रही है।
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जूता कारोबारी मो. सलीम ने बताया कि पहले जूते पर 18 प्रतिशत जीएसटी था, अब 5 प्रतिशत हो गया है। ऐसे में हम स्टॉक खरीदने से रुके हैं, ताकि नुकसान न हो। वैसे भी दो तीन माह से बाजार की जो हालत है उसे देखते हुए कोई कारोबारी हिम्मत नहीं जुटा पा रहा है।
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अनुमानित कारोबार आंकड़े (सितंबर-अक्तूबर 2025):

क्षेत्र
अनुमानित कारोबार (रुपये में)

खुदरा बाजार (कपड़े, जूते, गहने, गिफ्ट) 40–45 करोड़
मिठाई और खाद्य पदार्थ 25–30 करोड़
सजावट, इलेक्ट्रॉनिक्स, लाइटिंग 20–25 करोड़
परिवहन व यात्रा सेवाएं 10–12 करोड़
मनोरंजन, इवेंट, सांस्कृतिक आयोजन 8–10 करोड़
अन्य (खिलौने, किचन, पूजा सामग्री) 12–15 करोड़
इसी तरह से अन्य सामानों की बिक्री से कुल मिलाकर करोड़ों रुपये के कारोबार का अनुमान है।
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