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तीन माह बाद भी जांच अधर में
अमर उजाला ब्यूरो/आजमगढ
Updated Sat, 15 Oct 2016 11:57 PM IST
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जिला जेल
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जिला कारागार की 22 फुट ऊंची दीवार गैस पाइप के सहारे फांदकर फरार हुए तीन बंदियों के मामले की तीन माह बाद भी मजिस्ट्रीयल जांच पूरी नहीं हो सकी। जबकि घटना के बाद ही जिलाधिकारी ने 15 दिन के भीतर जांच रिपोर्ट प्रस्तुत करने का आदेश दिया था। इस गंभीर मामले की जांच अब तक पूरी होना तो दूर जिस अधिकारी को जांच सौंपी गई है उन्हें इसकी जानकारी ही नहीं है। ऐसे में यह मामला कई तरह के सवालों के घेरे में है।
गाजीपुर जिले के मरदह थाना क्षेत्र के महारे गांव निवासी प्रकाश मुसहर, इसी जिले के गहमर थाना क्षेत्र के मनिया गांव निवासी चंद्रशेखर उर्फ शेखर मुसहर और नंदगंज थाना क्षेत्र के अगस्ता गांव निवासी जितेंद्र मुसहर तरवां थाना क्षेत्र के कालू सिंह का पूरा गांव में हुए तिहरे हत्याकांड और लूटपाट के मामले में जिला कारागार में बंद थे। इनकी ड्यूटी भोजनालय में लगी हुई थी। 18 अगस्त रक्षाबंधन के दिन यह तीनों बंदी गैस पाइप के सहारे जेल की 22 फुट ऊंची प्रधान दीवार फांदकर भाग गए।
इनका अब तक कोई पता नहीं चला। गिरफ्तारी के लिए पुलिस की पांच टीमों का गठन किया गया है। घटना के तुरंत बाद मौके पर पहुंचे डीएम सुहास एलवाई ने तात्कालीन एडीएम प्रशासन आशुतोष द्विवेदी को जांच सौंपते हुए जल्द से जल्द पूरा कर रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया लेकिन एडीएम द्वारा यह जांच पूरी नहीं की जा सकी। इसी दौरान आशुतोष द्विवेदी का स्थानांतरण मऊ जिले के मुख्य विकास अधिकारी के पद पर हो गया और वे 14 सितंबर को मऊ चले गए।
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उनके जाने के बाद डीएम ने यह जांच एडीएम वित्त/राजस्व को सौंप दी और पंद्रह दिन के भीतर जांच रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया। लेकिन जांच अब तक पूरी नहीं हो सकी। बताते चलें कि सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव के संसदीय क्षेत्र में जेल से बंदियों के भागने के मामले की जांच में हो रही इस प्रकार की लापरवाही पूरे प्रदेश के कानून व्यवस्था की पोल खोल रही है।
जेल से बंदियों के भागने के मामले की कोई भी जांच हमें नहीं सौंपी गई है, ना ही उसके विषय में हमें कोई जानकारी है। जब हमें पता ही नहीं है तो हम उसके विषय में क्या बताएं। - वीरेंद्र कुमार गुप्ता, एडीएम वित्त/राजस्व
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गाजीपुर जिले के मरदह थाना क्षेत्र के महारे गांव निवासी प्रकाश मुसहर, इसी जिले के गहमर थाना क्षेत्र के मनिया गांव निवासी चंद्रशेखर उर्फ शेखर मुसहर और नंदगंज थाना क्षेत्र के अगस्ता गांव निवासी जितेंद्र मुसहर तरवां थाना क्षेत्र के कालू सिंह का पूरा गांव में हुए तिहरे हत्याकांड और लूटपाट के मामले में जिला कारागार में बंद थे। इनकी ड्यूटी भोजनालय में लगी हुई थी। 18 अगस्त रक्षाबंधन के दिन यह तीनों बंदी गैस पाइप के सहारे जेल की 22 फुट ऊंची प्रधान दीवार फांदकर भाग गए।
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इनका अब तक कोई पता नहीं चला। गिरफ्तारी के लिए पुलिस की पांच टीमों का गठन किया गया है। घटना के तुरंत बाद मौके पर पहुंचे डीएम सुहास एलवाई ने तात्कालीन एडीएम प्रशासन आशुतोष द्विवेदी को जांच सौंपते हुए जल्द से जल्द पूरा कर रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया लेकिन एडीएम द्वारा यह जांच पूरी नहीं की जा सकी। इसी दौरान आशुतोष द्विवेदी का स्थानांतरण मऊ जिले के मुख्य विकास अधिकारी के पद पर हो गया और वे 14 सितंबर को मऊ चले गए।
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उनके जाने के बाद डीएम ने यह जांच एडीएम वित्त/राजस्व को सौंप दी और पंद्रह दिन के भीतर जांच रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया। लेकिन जांच अब तक पूरी नहीं हो सकी। बताते चलें कि सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव के संसदीय क्षेत्र में जेल से बंदियों के भागने के मामले की जांच में हो रही इस प्रकार की लापरवाही पूरे प्रदेश के कानून व्यवस्था की पोल खोल रही है।
जेल से बंदियों के भागने के मामले की कोई भी जांच हमें नहीं सौंपी गई है, ना ही उसके विषय में हमें कोई जानकारी है। जब हमें पता ही नहीं है तो हम उसके विषय में क्या बताएं। - वीरेंद्र कुमार गुप्ता, एडीएम वित्त/राजस्व