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Azamgarh News: 1970 से गायब तीन किलोमीटर नहर बनी मुसीबत

Tue, 01 Sep 2026 12:55 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Tue, 01 Sep 2026 12:55 AM IST
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Three-kilometer canal missing since 1970 becomes a problem.
शारदा खंड टांडा की टांडा खंड द्वितीय अहरौला माइनर नहर अपने गंतव्य से लगभग तीन किलोमीटर पहले ही गायब हो गई है। किसानों ने इस नहर को ‘कर्मनाशा नहर’ नाम दिया है।
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यह नहर 1970 के आसपास डेढ़ से दो दर्जन गांवों के किसानों की सिंचाई के लिए बनाई गई थी। हालांकि, यह कभी भी अपने उद्देश्य को पूरा नहीं कर पाई। इसके बावजूद विभाग की ओर से हर साल दो बार नहर की सफाई कराई जाती है।
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वर्तमान में नहर की लंबाई लगभग 11.5 किलोमीटर है, जबकि इसकी पूर्ण लंबाई 14.5 किलोमीटर बताई गई थी। नहर साल में दो बार साफ की जाती है, लेकिन यह पूरे 12 महीने सूखी रहती है। यदि कभी इसमें पानी आता भी है तो वह तटबंध तोड़कर किसानों के खेतों में घुस जाता है। इससे किसानों को भारी नुकसान होता है।
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नहर के गायब होने का मामला 1970 के दशक से जुड़ा है। जब नहर की खुदाई मड़ना तक पहुंची तो कुछ किसानों ने अपनी जमीन के लिए मुआवजा लिया। बाद में उन्होंने नहर को अपनी जमीन से जाने देने पर आपत्ति जताई।
इसका परिणाम यह हुआ कि नहर का आगे निर्माण रुक गया। इसके बाद विभाग ने नहर को पूरा करने का प्रयास नहीं किया। यही वजह है कि किसानों ने इस नहर का नाम ‘कर्मनाशा नहर’ रख दिया है।
लोगों ने नहर के रास्ते के लिए जमीन छोड़ रखी है। उस समय विवाद के बाद नहर की खुदाई बंद हो गई। इसके बाद आगे इसकी खुदाई नहीं हो पाई और कुछ खुदाई हुई भी थी तो लोगों ने उसे पाट दिया।
यहां से यह नहर लगभग तीन किलोमीटर आगे करनपुर इटौरा में जाकर शारदा सहायक खंड 32 के नाले में मिलनी थी, लेकिन आज तक नहीं मिल पाई है।
--------- वर्जन
बोले किसान
हम लोगों ने नहर विभाग से मुआवजा लिया है। घर के सामने ही नहर आकर खत्म हुई है, लेकिन हमने अपना घर नहर वाली जमीन छोड़कर ही बनाया है। विभाग जब चाहे तब नहर की खुदाई करा सकता है। बाकी आगे क्या स्थिति है, मुझे नहीं पता। -रामबहादुर यादव, मड़ना
1980 में हमारे बाबा बृजराज यादव ने सिंचाई विभाग में आपत्ति दर्ज कराई कि जिन किसानों ने विभाग से मुआवजा लिया है, नहर उधर से न जाकर हमारी जमीन से निकाली जा रही है, जो गलत है। खुदाई नहीं रुकी तो बाबा ने 1984 में सिंचाई विभाग की तत्कालीन कमिश्नरी में वाद दाखिल कर दिया और खुदाई रोक दी गई। -विनोद यादव, मड़ना
इस नहर पर जगह-जगह अतिक्रमण है। जब से नहर की खुदाई हुई, कभी गंतव्य तक पानी भी नहीं पहुंचा। जबकि यह किसानों के सिंचाई के साधन के लिए बनाई गई थी। इसकी सफाई तो साल में दो बार होती है, लेकिन मौके पर जैसे यह कोई जंगल का क्षेत्र हो। इतने बड़े-बड़े पौधे और पेड़ उसमें उगे हुए हैं। -रामसिंह पालीवाल, गोपालीपट्टी
नहर पूरी तरह से भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गई है। इसमें कभी पानी नहीं आता और न किसानों को इसका लाभ मिल रहा है, जबकि सफाई साल में दो बार होती है। 1994-95 में नहर को लेकर आंदोलन किया गया था, जिसमें टांडा से नहर और सिंचाई विभाग के कई अधिकारी मौके पर आए थे। उन्होंने समस्या दूर करने की बात कही थी, लेकिन आज तक इस नहर की समस्या ज्यों की त्यों बनी हुई है। -त्रिलोकी नाथ, मड़ना मुबारकपुर

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इस संबंध में सिंचाई खंड टांडा द्वितीय के सहायक अभियंता ध्रुव कुमार अग्रवाल ने कार्रवाई का आश्वासन दिया है। उन्होंने बताया कि मौके पर टीम भेजकर तमाम समस्याओं की जांच कराई जाएगी और नहर को गंतव्य तक पहुंचाने के लिए विभागीय अधिकारियों से भी संपर्क कर कार्रवाई की जाएगी। नहर सड़क के आगे क्यों नहीं पहुंची है, इसकी भी नक्शे के आधार पर पड़ताल कराई जाएगी। -ध्रुव कुमार अग्रवाल, सहायक अभियंता, सिंचाई खंड टांडा द्वितीय
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