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Azamgarh News: लेदौरा केंद्र के करोड़ों के निर्माण की साल भर में खुली पोल
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अहरौला के कृषि विज्ञान केंद्र लेदौरा के प्रशासनिक भवन सहित अन्य समस्याओं को दिखाते विज्ञान केंद
लेदौरा कृषि विज्ञान केंद्र के प्रशासनिक भवन और परिसर में हुए अन्य निर्माण कार्यों में एक साल के भीतर ही गंभीर खामियां सामने आई हैं। इन निर्माणों पर कुल दो करोड़ 91 लाख 38 हजार रुपये की लागत आई है। कार्यदायी संस्था उत्तर प्रदेश राज्य निर्माण सहकारी संघ लिमिटेड पर अब सवाल उठ रहे हैं।
प्रशासनिक भवन का निर्माण 2025 में एक करोड़ 30 लाख रुपये की लागत से हुआ था। इसका प्लास्टर जगह-जगह से उखड़ गया है और रंग-रोगन भी उड़ चुका है। लगाए गए पत्थर और टाइल्स भी टूट गए हैं।
कृषि विज्ञान केंद्र लेदौरा के प्रभारी एलसी वर्मा ने बताया कि शौचालय का फ्लश सिस्टम टूट गया है। सभागार में बने मंच की फर्श भी बैठ गई है। पूरी इमारत का रंग गायब हो गया है और सीमेंट दीवारों को छोड़कर गिर रही है। वर्मा ने कहा कि निर्माण को अभी एक साल ही हुआ है और अभी से इसकी पोल खुल रही है।
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कार्यदायी संस्था के अधिशासी अभियंता महेंद्र सिंह ने कहा कि मौखिक शिकायतों का निराकरण किया जा रहा है। उन्होंने आश्वासन दिया कि सभी शिकायतें इसी सप्ताह निस्तारित कर ली जाएंगी।
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अन्य निर्माणों में भी गड़बड़ी
प्रशासनिक भवन में लगा पांच किलोवाट का सोलर पैनल कई महीनों से खराब पड़ा है। इसकी आपूर्ति कुछ माह बाद ही बंद हो गई थी। शिकायत पर कार्यदायी संस्था के बिजली मिस्त्री ने इसे बिजली से जोड़ा और इन्वर्टर भी उठा ले गया, जिससे सोलर पैनल बेकार हो गया। परिसर में लगी दस सोलर स्ट्रीट लाइटों में से सात से अधिक खराब हो चुकी हैं। स्टोर रूम का गाड़ी चढ़ाने वाला रैंप भी टूटकर बैठ गया है।
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अधिकारियों से की शिकायत
एलसी वर्मा ने 20 जुलाई को कार्यदायी संस्था के अधिशासी अभियंता को समस्याओं को लेकर चिट्ठी लिखी थी। इससे पहले जिलाधिकारी की बैठक में भी मौखिक रूप से समस्या बताई गई थी। जिलाधिकारी ने कार्यदायी संस्था को फटकार लगाई और तत्काल सुधार के निर्देश दिए थे, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।
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प्रशासनिक भवन का निर्माण 2025 में एक करोड़ 30 लाख रुपये की लागत से हुआ था। इसका प्लास्टर जगह-जगह से उखड़ गया है और रंग-रोगन भी उड़ चुका है। लगाए गए पत्थर और टाइल्स भी टूट गए हैं।
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कृषि विज्ञान केंद्र लेदौरा के प्रभारी एलसी वर्मा ने बताया कि शौचालय का फ्लश सिस्टम टूट गया है। सभागार में बने मंच की फर्श भी बैठ गई है। पूरी इमारत का रंग गायब हो गया है और सीमेंट दीवारों को छोड़कर गिर रही है। वर्मा ने कहा कि निर्माण को अभी एक साल ही हुआ है और अभी से इसकी पोल खुल रही है।
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कार्यदायी संस्था के अधिशासी अभियंता महेंद्र सिंह ने कहा कि मौखिक शिकायतों का निराकरण किया जा रहा है। उन्होंने आश्वासन दिया कि सभी शिकायतें इसी सप्ताह निस्तारित कर ली जाएंगी।
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अन्य निर्माणों में भी गड़बड़ी
प्रशासनिक भवन में लगा पांच किलोवाट का सोलर पैनल कई महीनों से खराब पड़ा है। इसकी आपूर्ति कुछ माह बाद ही बंद हो गई थी। शिकायत पर कार्यदायी संस्था के बिजली मिस्त्री ने इसे बिजली से जोड़ा और इन्वर्टर भी उठा ले गया, जिससे सोलर पैनल बेकार हो गया। परिसर में लगी दस सोलर स्ट्रीट लाइटों में से सात से अधिक खराब हो चुकी हैं। स्टोर रूम का गाड़ी चढ़ाने वाला रैंप भी टूटकर बैठ गया है।
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अधिकारियों से की शिकायत
एलसी वर्मा ने 20 जुलाई को कार्यदायी संस्था के अधिशासी अभियंता को समस्याओं को लेकर चिट्ठी लिखी थी। इससे पहले जिलाधिकारी की बैठक में भी मौखिक रूप से समस्या बताई गई थी। जिलाधिकारी ने कार्यदायी संस्था को फटकार लगाई और तत्काल सुधार के निर्देश दिए थे, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।