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अस्ताचलगामी सूर्य को व्रती महिलाओं ने दिया अर्घ्य
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आजमगढ़। पुत्र के दीर्घायु और परिवार की सुख समृद्धि की कामना के साथ रविवार की शाम को व्रती महिलाओं ने नदी, तालाबों के घाटों पर अस्ताचलगामी सूर्य अर्घ्य दिया। इससे पहले पूजन-अर्चन के लिए अपराह्न तीन बजे से ही श्रद्धालु महिलाएं घाटों की तरफ गाजे-बाजे के साथ रवाना हो गईं थीं। हर घाट पर छठी माता की प्रतिमा स्थापित की गई थी। शाम होते ही नगर क्षेत्र में तमसा तट पर मौजूद 17 घाट दीपों से जगमगा उठे। साथ ही छठ मैया की गीतों से पूरा क्षेत्र गुंजायमान रहा। अंधेरा होते ही विद्युत झालरों से घाटों पर रंग-बिरंगी रोशनी फैल गई।
सूर्य उपासना के चार दिवसीय महापर्व डाला छठ पर शाम को अस्ताचलगामी सूर्य को पहला अर्घ्य देने के लिए गाजे-बाजे के साथ व्रती महिलाएं घाटों की ओर निकल पड़ीं। शहर के लगभग हर मोहल्लों से घाटों तक छठ मैया के गीत गाती आस्था में डूबी महिलाओं का रेला लगा रहा। आगे-आगे परिवार के बच्चों सहित पुरुष डलिया में पूजन सामग्री लिए चल रहे थे। भीड़ का आलम यह था कि गौरीशंकर घाट, कदम घाट, भोला घाट, सिधारी, नरौली, राजघाट पर तिल रखने भर के लिए जगह नहीं बची थी। कमर भर पानी में व्रती महिलाएं अपनी-अपनी वेदियों के सामने सूर्य उपासना में डूबी अस्ताचलगामी सूर्य की तरफ टकटकी लगाए रखीं। भगवान भाष्कर के अस्त होते ही अर्घ्य देने के लिए हजारों हाथ एक साथ आगे बढ़े, तो हर तरफ भगवान भाष्कर के जयकारे लगने लगे। सूर्य का पूजन-अर्चन कर महिलाओं ने पूजा वेदी पर दीप जलाया और प्रसाद भी चढ़ाया। अर्घ्य देने के लिए इस कदर होड़ मची थी, कि घाटों पर जगह नहीं मिल पा रही थी। कारण कि व्रती महिलाओं के साथ उनके साथ गई महिलाएं और पति भी अर्घ्य देने में पीछे नहीं रहे। सर्वाधिक भीड़ दलालघाट, गौरी शंकर घाट, कटम घाट, भोला घाट और सिधारी घाट, हरबंशपुर घाट पर रही। इस दौरान पूजा पंडालों में दर्शन-पूजन के लिए तांता लगा रहा।
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सूर्य उपासना के चार दिवसीय महापर्व डाला छठ पर शाम को अस्ताचलगामी सूर्य को पहला अर्घ्य देने के लिए गाजे-बाजे के साथ व्रती महिलाएं घाटों की ओर निकल पड़ीं। शहर के लगभग हर मोहल्लों से घाटों तक छठ मैया के गीत गाती आस्था में डूबी महिलाओं का रेला लगा रहा। आगे-आगे परिवार के बच्चों सहित पुरुष डलिया में पूजन सामग्री लिए चल रहे थे। भीड़ का आलम यह था कि गौरीशंकर घाट, कदम घाट, भोला घाट, सिधारी, नरौली, राजघाट पर तिल रखने भर के लिए जगह नहीं बची थी। कमर भर पानी में व्रती महिलाएं अपनी-अपनी वेदियों के सामने सूर्य उपासना में डूबी अस्ताचलगामी सूर्य की तरफ टकटकी लगाए रखीं। भगवान भाष्कर के अस्त होते ही अर्घ्य देने के लिए हजारों हाथ एक साथ आगे बढ़े, तो हर तरफ भगवान भाष्कर के जयकारे लगने लगे। सूर्य का पूजन-अर्चन कर महिलाओं ने पूजा वेदी पर दीप जलाया और प्रसाद भी चढ़ाया। अर्घ्य देने के लिए इस कदर होड़ मची थी, कि घाटों पर जगह नहीं मिल पा रही थी। कारण कि व्रती महिलाओं के साथ उनके साथ गई महिलाएं और पति भी अर्घ्य देने में पीछे नहीं रहे। सर्वाधिक भीड़ दलालघाट, गौरी शंकर घाट, कटम घाट, भोला घाट और सिधारी घाट, हरबंशपुर घाट पर रही। इस दौरान पूजा पंडालों में दर्शन-पूजन के लिए तांता लगा रहा।
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