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गेहूं खरीद में जिले को प्रदेश में मिला पांचवां स्थान
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आजमगढ़। प्रदेश में गेहूं की सरकारी खरीद बंद हो गई है। जनपद में 71000 मीट्रिक टन गेहूं खरीद का लक्ष्य निर्धारित किया गया था। जिसके सापेक्ष मात्र 19.59 प्रतिशत ही गेहूं की खरीद हो सकी। लेकिन भले ही जनपद में गेहूं की खरीद कम हुई पर राहत की बात यह रही कि गेहूं खरीद के मामले जनपद का पूरे प्रदेश में पांचवें स्थान पर रहा।
जनपद में पिछले वर्ष लगभग 100 फिसदी गेहूं की खरीद हुई थी। लेकिन इस 15 दिन गेहूं खरीद का समय और बढ़ने के बाद भी खरीद 50 प्रतिशत तक भी नहीं पहुंच सकी। जनपद में गेहूं खरीद का कार्य एक अप्रैल से शुरू हुआ था। इसके लिए शासन की ओर से 71000 मीट्रिक टन गेहूं की खरीद का लक्ष्य निर्धारित किया गया था। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए कुल 73 क्रय केंद्रों की स्थापना की गई थी। खरीदारी के बीच में ही रूस और यूक्रेन के बीच युद्घ शुरू हो गया जिसके कारण बाजार महंगा हो गया जिसकी वजह से किसान क्रय केंद्रों पर गेहूं की बिक्री करने के लिए नहीं पहुंचे। जिसका परिणाम रहा लक्ष्य 71000 मीट्रिक टन के सापेक्ष मात्र 13908.42 मीट्रिक टन ही गेहूं की खरीद हो सकी। इस खरीदारी को खाद्य विभाग, भारतीय खाद्य निगम और पीसीएफ के क्रय केंद्रों के माध्यम से किया गया। लेकिन अगर तीन एजेंसियों द्वारा की गई खरीद का प्रतिशत देखें तो सबसे कम खरीदारी भारतीय खाद्य निगम के क्रय केंद्रों पर हुई। जनपद में 4158 किसानों से गेहूं की खरीद की गई। खरीद के बाद किसानों को कुल 2802.55 लाख रुपये का भुगतान करना था। जिसमें से 2785.04 लाख रुपये का भुगतान कर दिया गया है। अभी तक 17.51 लाख रुपये किसानों का बकाया है। सबसे बड़ी बात तो यह है कि खाद्य विभाग और भारतीय खाद्य निगम ने किसानों से खरीदे गए गेहूं के सारे पैसे का भुगतान तो कर दिया लेकिन पीसीएफ अभी तक 17.51 लाख रुपये का भुगतान नहीं कर सका है।
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जनपद में पिछले वर्ष लगभग 100 फिसदी गेहूं की खरीद हुई थी। लेकिन इस 15 दिन गेहूं खरीद का समय और बढ़ने के बाद भी खरीद 50 प्रतिशत तक भी नहीं पहुंच सकी। जनपद में गेहूं खरीद का कार्य एक अप्रैल से शुरू हुआ था। इसके लिए शासन की ओर से 71000 मीट्रिक टन गेहूं की खरीद का लक्ष्य निर्धारित किया गया था। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए कुल 73 क्रय केंद्रों की स्थापना की गई थी। खरीदारी के बीच में ही रूस और यूक्रेन के बीच युद्घ शुरू हो गया जिसके कारण बाजार महंगा हो गया जिसकी वजह से किसान क्रय केंद्रों पर गेहूं की बिक्री करने के लिए नहीं पहुंचे। जिसका परिणाम रहा लक्ष्य 71000 मीट्रिक टन के सापेक्ष मात्र 13908.42 मीट्रिक टन ही गेहूं की खरीद हो सकी। इस खरीदारी को खाद्य विभाग, भारतीय खाद्य निगम और पीसीएफ के क्रय केंद्रों के माध्यम से किया गया। लेकिन अगर तीन एजेंसियों द्वारा की गई खरीद का प्रतिशत देखें तो सबसे कम खरीदारी भारतीय खाद्य निगम के क्रय केंद्रों पर हुई। जनपद में 4158 किसानों से गेहूं की खरीद की गई। खरीद के बाद किसानों को कुल 2802.55 लाख रुपये का भुगतान करना था। जिसमें से 2785.04 लाख रुपये का भुगतान कर दिया गया है। अभी तक 17.51 लाख रुपये किसानों का बकाया है। सबसे बड़ी बात तो यह है कि खाद्य विभाग और भारतीय खाद्य निगम ने किसानों से खरीदे गए गेहूं के सारे पैसे का भुगतान तो कर दिया लेकिन पीसीएफ अभी तक 17.51 लाख रुपये का भुगतान नहीं कर सका है।
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