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Azamgarh News: शहर की हवा खराब, पांच दिन में 150 से 305 पर पहुंचा वायु गुणवत्ता सूचकांक

Tue, 25 Nov 2025 12:47 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Tue, 25 Nov 2025 12:47 AM IST
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The city's air quality dropped from 150 to 305 in five days
16 सगड़ी तहसील क्षेत्र में खेत में जलाई जा रही पराली। संवाद - फोटो : वाहनों को डायवर्ट करते पुलिसकर्मी।
आजमगढ़। शहर के कलक्ट्रेट क्षेत्र में सोमवार की दोपहर वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 305 पर पहुंच गया। पांच दिन पहले 19 नवंबर को यह स्तर 100 से 150 के आसपास था। एक दिन की छुट्टी के बाद खुले दफ्तर व कचहरी के चलते शहर में आए बड़ी संख्या में वाहनों और पराली जलाने को भी इसका कारण माना जा रहा है।
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पिछले सप्ताह कई दिनों तक प्रदूषण का स्तर कुछ स्थिर रहा था। इस सप्ताह की शुरुआत में ही वायु गुणवत्ता सूचकांक खतरनाक स्तर पर पहुंच गया। प्रशासन की ओर से प्रदूषण नियंत्रण के लिए कोई कदम नहीं उठाया जा रहा है, जबकि समस्या लगातार गंभीर होती जा रही है। कलक्ट्रेट क्षेत्र में दोपहर करीब 12 बजे वायु गुणवत्ता सूचकांक 300 पार कर गया।
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वहीं शाम को गिरावट के साथ 200 पर पहुंच गया। हवा में बढ़ते प्रदूषण के कारण लोगों को आंखों में जलन, सांस लेने में परेशानी, खांसी, गले में खराश और सीने में भारीपन की शिकायतें बढ़ सकती हैं। ठंड और हवा की कमी के कारण प्रदूषण के कण जमीन के पास जमा हो रहे हैं।
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गंभीर श्रेणी में हवा, वृद्धों बच्चों पर ज्यादा असर

वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) जब 300 से ऊपर चला जाता है, तो हवा की गुणवत्ता बहुत खराब या गंभीर श्रेणी में आ जाती है। यह स्तर सभी लोगों, विशेषकर बच्चों, बुजुर्गों और पहले से बीमार व्यक्तियों के लिए सीधा जानलेवा हो सकता है। एक्यूआई का इतना अधिक होना यह दर्शाता है कि हवा में हानिकारक सूक्ष्म कण पीएम-2.5 और पीएम-10 की सांद्रता बेहद खतरनाक स्तर पर पहुंच चुकी है। ये कण इतने महीन होते हैं कि वे मास्क को भेदकर सीधे फेफड़ों में और वहां से रक्तप्रवाह में प्रवेश कर जाते हैं।
तापमान गिरने से हवा रुक जाती है, तो प्रदूषण के कण हवा में फैल नहीं पाते और जमीन की सतह के पास ही जमा हो जाते हैं। जिससे एक्यूआई बढ़ जाता है और लोगों के स्वास्थ्य पर असर पड़ता है। - जितेंद्र कुमार, वैज्ञानिक सहायक प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड।

बच्चों, बुजुर्गों, अस्थमा के रोगियों और हृदय या फेफड़ों की बीमारी वाले लोगों को बाहरी गतिविधियों से बचना चाहिए। बाकी सभी को बाहरी गतिविधियों में कम भाग लेना चाहिए। अस्थमा से पीड़ित बच्चे और वयस्क जो बाहर रहते हैं, वह लोग मॉस्क लगाएं। - नंदू राम बर्मा, सीएमओ।
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