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शिक्षक, शिक्षामित्र और अनुदेशक बनेंगे प्रवासी श्रमिकों के मित्र
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आजमगढ़। जिले में काफी संख्या में प्रवासी मजदूर लौटे है। इन मजदूरों को जागरूक करने और सहयोग प्रदान करने के लिए शिक्षकों, शिक्षामित्रों व अनुदेशकों को बतौर प्रवासी श्रमिक मित्र के रूप में तैनात करने की योजना बनाई गई है।
जिलाधिकारी एनपी सिंह ने बताया कि एक अप्रैल से अब तक जिले में लगभग 70 हजार प्रवासी श्रमिक आ चुके है। अभी भी लगभग 25 हजार प्रवासी श्रमिकों के वापसी का अनुमान लगाया जा रहा है। काफी संख्या में प्रवासी मजदूर अपने-अपने माध्यमों से पहुंच रहे है। जो बिना जांच आदि के घर पहुंच जा रहे है। वहीं ट्रेन व बस से आने वाले मजदूरों की जांच हो रही है, दो दिन शेल्टर रूम में रखे जाने के बाद वे भी घर भेज कर होम क्वारंटीन करा दिए जा रहे है। काफी संख्या में प्रवासियों के जिले में पहुंचने जिला प्रशासन के समक्ष दो तरह की चुनौती सामने आ रही है। एक तो कम्यूनिटी ट्रांसमिशन को रोकना तो दूसरा सामाजिक-आर्थिक तंगी से मानसिक अवसाद से प्रवासी श्रमिकों को बचाना। होम क्वारंटीन किए गए लोगों पर नजर रखने के लिए वर्तमान में लेखपाल, सेक्रेटरी, आशा, आंगनबाड़ी व ज्ञ्प्रधान की ड्यूटी लगी हुई है। वहीं अब शिक्षक, शिक्षामित्र व अनुदेशक भी बतौर प्रवासी श्रमिक मित्र के रूप में लगाए जाएंगे। इनकी जिम्मेदारी होगी कि वे क्वारंटीन किए गए लोगों को जागरूक करेंगे और उन्हें स्थानीय स्तर पर रोजगार आदि पाने में भी मदद करेंगे। सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने का भी प्रयास करेंगे।
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जिलाधिकारी एनपी सिंह ने बताया कि एक अप्रैल से अब तक जिले में लगभग 70 हजार प्रवासी श्रमिक आ चुके है। अभी भी लगभग 25 हजार प्रवासी श्रमिकों के वापसी का अनुमान लगाया जा रहा है। काफी संख्या में प्रवासी मजदूर अपने-अपने माध्यमों से पहुंच रहे है। जो बिना जांच आदि के घर पहुंच जा रहे है। वहीं ट्रेन व बस से आने वाले मजदूरों की जांच हो रही है, दो दिन शेल्टर रूम में रखे जाने के बाद वे भी घर भेज कर होम क्वारंटीन करा दिए जा रहे है। काफी संख्या में प्रवासियों के जिले में पहुंचने जिला प्रशासन के समक्ष दो तरह की चुनौती सामने आ रही है। एक तो कम्यूनिटी ट्रांसमिशन को रोकना तो दूसरा सामाजिक-आर्थिक तंगी से मानसिक अवसाद से प्रवासी श्रमिकों को बचाना। होम क्वारंटीन किए गए लोगों पर नजर रखने के लिए वर्तमान में लेखपाल, सेक्रेटरी, आशा, आंगनबाड़ी व ज्ञ्प्रधान की ड्यूटी लगी हुई है। वहीं अब शिक्षक, शिक्षामित्र व अनुदेशक भी बतौर प्रवासी श्रमिक मित्र के रूप में लगाए जाएंगे। इनकी जिम्मेदारी होगी कि वे क्वारंटीन किए गए लोगों को जागरूक करेंगे और उन्हें स्थानीय स्तर पर रोजगार आदि पाने में भी मदद करेंगे। सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने का भी प्रयास करेंगे।
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