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फोन पर हुई बात तो मिली राहत लेकिन सता रही चिंता
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अमिलो। अफगानिस्तान में फंसे मुबारकपुर थाना क्षेत्र के नरावं गांव निवासी धर्मेंद्र चौहान पुत्र हरखू चौहान के परिवार के लोग भले ही धर्मेंद्र से फोन पर बात कर उसके सकुशल होने पर राहत महसूस कर रहे हैं। लेकिन उन्हें उसके वहां से निकलने को लेकर चिंता सता रही है। इसके लिए परिवार के लोग ईश्वर से धर्मेंद्र के सकुशल घर वापस आने की प्रार्थना कर रहे हैं।
तालिबान के अफगानिस्तान पर कब्जा करने की खबर ने जहां पूरे विश्व के माथे पर चिंता पर लकीरें खींच दी हैं। वहीं जिले के मुबारकपुर थाना क्षेत्र के नरावं गांव निवासी धर्मेंद्र चौहान के परिवार का भी हाल कुछ ऐसा ही है। दो वर्ष पहले 17 सितंबर 2019 को धर्मेंद्र अफगानिस्तान गया था। वहां वह एक स्टील प्लांट में काम करने लगा। अफगानिस्तान पर तालिबान का कब्जा होने के बाद वह फैक्ट्री में ही कैद होकर रह गया है। भाभी कौशिल्या देवी ने बताया कि बृहस्पतिवार की सुबह आठ बजे फोन से वार्ता हुई है। धर्मेंद्र ने बताया कि वह अपने स्टील प्लांट में रहकर सुरक्षित काम कर रहे हैं। उन्हें किसी प्रकार का कोई खतरा महसूस नहीं हो रहा है। लेकिन अफगानिस्तान में काफी अफरा तफरी का माहौल कायम है। विदेश के लोग अफगानिस्तान में अपने आप को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। वह वहां से निकलकर किसी तरह से अपने देश जाने की हर कोशिश करने में लगे हुए हैं। वहीं धर्मेंद्र से बात होने पर और उसका कुशल क्षेम जानकर परिजनों को थोड़ी राहत तो मिली लेकिन उन्हें वहां के माहौल को देख धर्मेंद्र के सकुशल वापसी की चिंता सता रही है। इसके लिए परिवार के लोग ईश्वर से प्रार्थना करने में जुटे हुए हैँ। धर्मेंद्र चौहान पांच भाईयों में दूसरे नंबर पर है। धर्मेन्द्र चौहान के दो पुत्र व एक पुत्री है।
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पति लौटे सकुशल यही है सरकार से मांग
अमिलो। धर्मेंद्र की पत्नी आशा देवी ने कहा कि पति से आज सुबह ही मेरी बात हुई है। कपंनी की तरफ से उन्हें खाना और रहने की व्यवस्था की गई है। लेकिन वहां के हालात को देखते हुए हमारी सरकार से मांग है कि वह हमारे पति को सकुशल घर पहुंचाए। अब हम उन्हें बाहर नहीं जाने देंगे यहीं रहकर कुछ करेंगे।
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तालिबान के अफगानिस्तान पर कब्जा करने की खबर ने जहां पूरे विश्व के माथे पर चिंता पर लकीरें खींच दी हैं। वहीं जिले के मुबारकपुर थाना क्षेत्र के नरावं गांव निवासी धर्मेंद्र चौहान के परिवार का भी हाल कुछ ऐसा ही है। दो वर्ष पहले 17 सितंबर 2019 को धर्मेंद्र अफगानिस्तान गया था। वहां वह एक स्टील प्लांट में काम करने लगा। अफगानिस्तान पर तालिबान का कब्जा होने के बाद वह फैक्ट्री में ही कैद होकर रह गया है। भाभी कौशिल्या देवी ने बताया कि बृहस्पतिवार की सुबह आठ बजे फोन से वार्ता हुई है। धर्मेंद्र ने बताया कि वह अपने स्टील प्लांट में रहकर सुरक्षित काम कर रहे हैं। उन्हें किसी प्रकार का कोई खतरा महसूस नहीं हो रहा है। लेकिन अफगानिस्तान में काफी अफरा तफरी का माहौल कायम है। विदेश के लोग अफगानिस्तान में अपने आप को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। वह वहां से निकलकर किसी तरह से अपने देश जाने की हर कोशिश करने में लगे हुए हैं। वहीं धर्मेंद्र से बात होने पर और उसका कुशल क्षेम जानकर परिजनों को थोड़ी राहत तो मिली लेकिन उन्हें वहां के माहौल को देख धर्मेंद्र के सकुशल वापसी की चिंता सता रही है। इसके लिए परिवार के लोग ईश्वर से प्रार्थना करने में जुटे हुए हैँ। धर्मेंद्र चौहान पांच भाईयों में दूसरे नंबर पर है। धर्मेन्द्र चौहान के दो पुत्र व एक पुत्री है।
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पति लौटे सकुशल यही है सरकार से मांग
अमिलो। धर्मेंद्र की पत्नी आशा देवी ने कहा कि पति से आज सुबह ही मेरी बात हुई है। कपंनी की तरफ से उन्हें खाना और रहने की व्यवस्था की गई है। लेकिन वहां के हालात को देखते हुए हमारी सरकार से मांग है कि वह हमारे पति को सकुशल घर पहुंचाए। अब हम उन्हें बाहर नहीं जाने देंगे यहीं रहकर कुछ करेंगे।
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