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आजमगढ़ में मुंबई से 13 दिन पहले आए प्रवासी की मौत से हड़कंप
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मार्टीनगंज। दीदारगंज के मखदुमपुर वनगांव में मुंबई से 13 दिन पहले आए एक प्रवासी बुजुर्ग की बृहस्पतिवार रात मौत हो गई। उसे बुखार और सांस फूलने की शिकायत थी। उसने प्राइवेट चिकित्सक को दिखाया था लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। जिला अस्पताल ले जाते समय मौत हो गई। प्रशासन और चिकित्सा विभाग को इसकी जानकारी दे दी गई है। अभी तक कोई गांव नहीं पहुंचा है। शव को अंतिम संस्कार कर दिया गया।
गांव निवासी 60 वर्षीय बुजुर्ग मुंबई में ऑटो चलाता था। 23 मई को श्रमिक स्पेशल ट्रेन से आया था और होम क्वारंटीन था। तीन जून को अचानक तबीयत खराब हुई। परिवार वालों का कहना है कि अचानक बुखार और सांस फूलने लगी। परिवार वालों ने उसे स्थानीय डॉक्टर को दिखाया तो उसने दवा दी, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। बृहस्पतिवार शाम परिजन उसे रानी की सराय में निजी डॉक्टर को दिखाने के लिए लेकर गए, लेकिन डॉक्टर ने भर्ती नहीं किया। परिजन उसे आजमगढ़ ले जा रहे थे कि रास्ते में ही रात करीब नौ बजे उसकी मौत हो गई। शव अभी घर पर पड़ा है। इसकी जानकारी तहसील के अधिकारियों और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के डॉक्टरों को दे दी गई है। वहीं, जब गांववालों और क्षेत्रवासियों को पता लगा कि मृतक कुछ दिन पहले मुंबई से आया था तो लोगों के अंदर कोरोना से हुई मौत का भय हो गया। मृतक के चार पुत्र हैं। वहीं, दोपहर तक किसी अधिकारी और चिकित्सक के न आने पर ग्रामीणों ने शव का अपने स्तर पर अंतिम संस्कार कर दिया।
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गांव निवासी 60 वर्षीय बुजुर्ग मुंबई में ऑटो चलाता था। 23 मई को श्रमिक स्पेशल ट्रेन से आया था और होम क्वारंटीन था। तीन जून को अचानक तबीयत खराब हुई। परिवार वालों का कहना है कि अचानक बुखार और सांस फूलने लगी। परिवार वालों ने उसे स्थानीय डॉक्टर को दिखाया तो उसने दवा दी, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। बृहस्पतिवार शाम परिजन उसे रानी की सराय में निजी डॉक्टर को दिखाने के लिए लेकर गए, लेकिन डॉक्टर ने भर्ती नहीं किया। परिजन उसे आजमगढ़ ले जा रहे थे कि रास्ते में ही रात करीब नौ बजे उसकी मौत हो गई। शव अभी घर पर पड़ा है। इसकी जानकारी तहसील के अधिकारियों और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के डॉक्टरों को दे दी गई है। वहीं, जब गांववालों और क्षेत्रवासियों को पता लगा कि मृतक कुछ दिन पहले मुंबई से आया था तो लोगों के अंदर कोरोना से हुई मौत का भय हो गया। मृतक के चार पुत्र हैं। वहीं, दोपहर तक किसी अधिकारी और चिकित्सक के न आने पर ग्रामीणों ने शव का अपने स्तर पर अंतिम संस्कार कर दिया।
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