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विरह-वेदना असहनीय : अन्नपूर्णा
ब्यूरो/अमर उजाला, आजमगढ़
Updated Tue, 16 Feb 2016 12:24 AM IST
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आजमगढ़-गाजीपुर मार्ग पर इटौरा मोड़ पर मौजूद महामृत्युंजय अस्पताल डेंटल कॉलेज परिसर में आयोजित सर्वदेव मंदिर प्राण प्रतिष्ठा महायज्ञ में नौवें दिन मैहर से पधारी मानस पुत्री अन्नपूर्णा देवी ने अपने प्रवचन से वातावरण को भक्तिमय कर दिया।
उन्होंने विरह की वेदना से लोगों को परिचित कराया। कार्यक्रम में शामिल हुए संपूर्णानंद संस्कृत विवि काशी के कुलपति प्रो. यदुनाथ प्रसाद दूबे और काशी विद्वत परिषद के अध्यक्ष रामयत्न शुक्ल को कॉलेज प्रबंधक बजरंग त्रिपाठी ने अभिनंदन पत्र और अंग वस्त्र देकर सम्मानित किया।
अन्नपूर्णा देवी ने कहा कि जीवात्मा के लिए सबसे बड़ी दुख की घड़ी तब होती है, जब वह परमात्मा से अलग होता है। यह पीड़ा असहनीय होती है। उन्होंने अयोध्यावासियों को उदाहरण के रूप में बताया,
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बोली जब प्रभु श्रीराम वनागमन के लिए चले, तो अयोध्यावासी अधीर हो गए। इसके अलावा उनकी दशा और बुरी थी, जो प्रभु श्रीराम के वात्सल्य से परिचित थे, उनका तात्पर्य राजा दशरथ और उनकी रानियों से था।
ऐसे में राजा दशरथ तो इस विछोह को बर्दास्त भी नहीं कर सकें। क्योंकि उन्हें वेदना के बाद पुत्र का सुख मिला था।
इससे पूर्व मंदिर के यज्ञ मंडप में सोमवार को अग्नि की स्थापना की गई।
साथ ही गायत्री मंत्र का जाप भी किया गया। इस अवसर पर क्षेत्र के लोगों की भीड़ कार्यक्रम स्थल पर उमड़ी थी।
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उन्होंने विरह की वेदना से लोगों को परिचित कराया। कार्यक्रम में शामिल हुए संपूर्णानंद संस्कृत विवि काशी के कुलपति प्रो. यदुनाथ प्रसाद दूबे और काशी विद्वत परिषद के अध्यक्ष रामयत्न शुक्ल को कॉलेज प्रबंधक बजरंग त्रिपाठी ने अभिनंदन पत्र और अंग वस्त्र देकर सम्मानित किया।
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अन्नपूर्णा देवी ने कहा कि जीवात्मा के लिए सबसे बड़ी दुख की घड़ी तब होती है, जब वह परमात्मा से अलग होता है। यह पीड़ा असहनीय होती है। उन्होंने अयोध्यावासियों को उदाहरण के रूप में बताया,
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बोली जब प्रभु श्रीराम वनागमन के लिए चले, तो अयोध्यावासी अधीर हो गए। इसके अलावा उनकी दशा और बुरी थी, जो प्रभु श्रीराम के वात्सल्य से परिचित थे, उनका तात्पर्य राजा दशरथ और उनकी रानियों से था।
ऐसे में राजा दशरथ तो इस विछोह को बर्दास्त भी नहीं कर सकें। क्योंकि उन्हें वेदना के बाद पुत्र का सुख मिला था।
इससे पूर्व मंदिर के यज्ञ मंडप में सोमवार को अग्नि की स्थापना की गई।
साथ ही गायत्री मंत्र का जाप भी किया गया। इस अवसर पर क्षेत्र के लोगों की भीड़ कार्यक्रम स्थल पर उमड़ी थी।