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सकीना का ताबूत देख रो पड़ीं
ब्यूरो/अमर उजाला, आजमगढ़
Updated Wed, 18 Nov 2015 12:16 AM IST
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फूलपुर नगर स्थित शिया आबादी में अंजुमन मासूमिया के तत्वावधान में सोमवार की देर रात इमाम हुसैन की बेटी जनाबे सकीना की याद में शब्बेदारी का आयोजन किया गया।
इस दौरान या सकीना या अब्बास की दर्द भरी सदाएं गूंजती रही। आधी रात के बाद जनाबे सकीना का ताबूत उठाया गया। जियारत करते ही महिलाएं रो पड़ी।
वहीं अंजुमनों ने नौहों के बीच सीनाजनी और मातम कर जनाबे सकीना के साथ ही कर्बला के शहीदों को खिराजे अकीदत पेश की।
शब्बेदारी की शुरुआत मुहम्म्द हारून ने कुरआन पाक की तिलावत से किया। इसके बाद शायरे अहलबैत असगर बेलहरवी, कैसर माहुली, अफसर ने नजराना अकीदत पेश किया।
लखनऊ से आए मौलाना कमर अब्बास साहब ने मजलिस को खिताब करते हुए कहा कि इमाम हुसैन ने पूरी दुनिया में इंसानियत को फैलाया है।
उन्होंने यजीद की अधीनता स्वीकार करने से इंकार करते हुए शहीद हो जाना बेहतर समझा। उन्होंने कहा कि इमाम हुसैन की चार साल की मासूब जनाबे सकीना को यजीदी सेना ने बेहद तकलीफे पहुंचाई।
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उन्हें भूखा रखा यहां तक की उनके कोमल गालों पर थप्पड़ बरसाए। अजीयत सहते हुए आखिरकार सकीना ने शहादत पायी। यह मंजर सुनते ही मजलिस में मौजूद अजादार रो पड़े।
अंजुमन जीनते इस्लाम मुस्तफाबाद, अंजुमन असगरिया अमहट सुल्तानपुर, अंजुमन गुलशने अब्बास भादी शाहगंज, अंजुमन अब्बसिया जलालपुर ने नौहा मातम किया।
भोर में पांच बजे जनाबे सकीना का ताबूत निकाला गया। जिस पर अजादार महिला और पुरुषों ने अकीदत के फूल चढ़ाए और उन्हें खिराजे अकीदत पेश की।
निजामत जीशान हैदर ने की जबकि आभार मुहम्म्द आलम और अबरार ने प्रकट किया।
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इस दौरान या सकीना या अब्बास की दर्द भरी सदाएं गूंजती रही। आधी रात के बाद जनाबे सकीना का ताबूत उठाया गया। जियारत करते ही महिलाएं रो पड़ी।
वहीं अंजुमनों ने नौहों के बीच सीनाजनी और मातम कर जनाबे सकीना के साथ ही कर्बला के शहीदों को खिराजे अकीदत पेश की।
शब्बेदारी की शुरुआत मुहम्म्द हारून ने कुरआन पाक की तिलावत से किया। इसके बाद शायरे अहलबैत असगर बेलहरवी, कैसर माहुली, अफसर ने नजराना अकीदत पेश किया।
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लखनऊ से आए मौलाना कमर अब्बास साहब ने मजलिस को खिताब करते हुए कहा कि इमाम हुसैन ने पूरी दुनिया में इंसानियत को फैलाया है।
उन्होंने यजीद की अधीनता स्वीकार करने से इंकार करते हुए शहीद हो जाना बेहतर समझा। उन्होंने कहा कि इमाम हुसैन की चार साल की मासूब जनाबे सकीना को यजीदी सेना ने बेहद तकलीफे पहुंचाई।
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उन्हें भूखा रखा यहां तक की उनके कोमल गालों पर थप्पड़ बरसाए। अजीयत सहते हुए आखिरकार सकीना ने शहादत पायी। यह मंजर सुनते ही मजलिस में मौजूद अजादार रो पड़े।
अंजुमन जीनते इस्लाम मुस्तफाबाद, अंजुमन असगरिया अमहट सुल्तानपुर, अंजुमन गुलशने अब्बास भादी शाहगंज, अंजुमन अब्बसिया जलालपुर ने नौहा मातम किया।
भोर में पांच बजे जनाबे सकीना का ताबूत निकाला गया। जिस पर अजादार महिला और पुरुषों ने अकीदत के फूल चढ़ाए और उन्हें खिराजे अकीदत पेश की।
निजामत जीशान हैदर ने की जबकि आभार मुहम्म्द आलम और अबरार ने प्रकट किया।