फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Azamgarh News ›   Russia Ukraine War Went work cook and guard handed weapons battlefield eight missing

Russia Ukraine War : किसी के पिता लापता, कोई बेटे के इंतजार में बैठा, रूस से नहीं लाैटे मऊ-आजमगढ़ के आठ लोग

Mon, 20 Jan 2025 12:05 AM IST
अमन विश्वकर्मा अमर उजाला नेटवर्क, आजमगढ़।
अमर उजाला नेटवर्क, आजमगढ़। Published by: अमन विश्वकर्मा Updated Mon, 20 Jan 2025 12:05 AM IST
सार

Russia Ukraine War : रूस और यूक्रेन युद्ध में पूर्वांचल के मऊ और आजमगढ़ के युवा भी जबरदस्ती भेजे जा रहे हैं। उन्हें कुर्क और गार्ड की नाैकरी में मोटी सैलरी का लालच देकर रूस भेजा जा रहा है।

विज्ञापन
Russia Ukraine War Went work cook and guard handed weapons battlefield eight missing
रूस-यूक्रेन युद्ध (सांकेतिक तस्वीर)। - फोटो : फ्रीपिक

विस्तार

Russia Ukraine War : रूस और यूक्रेन के बीच करीब तीन वर्षों से युद्ध जा रहा है। यह युद्ध भारत से हजारों किमी दूर लड़ा जा रहा है। लेकिन, इस युद्ध में कुक और सिक्योरिटी गार्ड की नौकरी का लालच देकर आजमगढ़ और मऊ जनपदों के एजेंटों के जरिए फंसाकर युद्ध में उतारा जा रहा है। 

विज्ञापन


अब तक इस जंग में आजमगढ़ के कन्हैया यादव और मऊ के श्यामसुंदर और सुनील यादव की मौत हो चुकी है। 

आजमगढ़ के राकेश यादव और मऊ के बृजेश यादव घायल होने के बाद घर लौट आए हैं। वहीं विनोद यादव, जोगेंद्र यादव, अरविंद यादव, रामचंद्रा, अजहरुद्दीन खान, हुमेश्वर प्रसाद, दीपक, धीरेंद्र कुमार का अब तक कुछ पता नहीं चल पाया है। घर वालों को उनके आने का इंतजार है। 
विज्ञापन


कंधरापुर थाना क्षेत्र के खोजापुर माधोपट्टी गांव निवासी योगेंद्र यादव भी उसी में हैं। पूछने पर योगेंद्र की छोटे भाई आशीष यादव ने बताया कि  मऊ के एजेंट विनोद यादव ने मेरे भाई को फंसा दिया। गार्ड की नौकरी के लिए लेकर गए और बार्डर पर भेज दिया। 

विज्ञापन
विज्ञापन

अपनों का इंतजार कर रहे परिजन
बताया कि भाई 15 जनवरी, 2024 को विनोद, सुमित और दुष्यंत नामक एजेंट के साथ गए उनको गार्ड और हेल्पर की नौकरी के लिए ले जाया गया। रूस पहुंचने के बाद उन्हें जबरन ट्रेनिंग देकर आर्मी में युद्ध के लिए भर्ती कर दिया गया। 

बताया कि भाई से अंतिम बार मई 2024 में बात हुई थी इसके बाद से भाई का कुछ पता नहीं चल सका है। भाई ने फोन पर बताया था कि 9 मई 2024 को युद्ध में उन्हें चोट लग गई थी। एंबेसी से हम लोगों ने बहुत कोशिश की लेकिन जानकारी नहीं मिल सकती है। 

शहर के गुलामी का पूरा निवासी अजहरूद्दीन को 27 जनवरी 2024 को एजेंट विनोद अपने साथ लेर गया था। अजहरुद्दीन की मां नसरीन रो रोकर कहती हैं कि विनोद मेरे घर आया और बोला, सिक्योरिटी गार्ड की नौकरी है, दो लाख रुपया महीना मिलेगा। 

मोटी तनख्वाह का दिया जा रहा लालच
सैलरी अच्छी समझकर मेरा बेटा वहां चला गया। जब बेटा वहां गया तो दो महीने तक तो हम सभी से बात होती रही। इसी बीच बेटे को ट्रेनिंग देकर लड़ाई के मैदान में भेज दिया गया। फिर एक दिन सूचना मिली कि युद्ध में बम गिरने से बेटा घायल हो गया। 

यह बात जब अजहरूद्दीन के अब्बू मैनुद्दीन को पता चली तो उन्हें एक अप्रैल को हार्ट अटैक आ गया और आठ अप्रैल को उनकी मौत हो गई। पिता की मौत के बाद हमने एजेंट विनोद से अपने बेटे से बात कराने की जिद की लेकिन उसने बात नहीं कराई। हमारे पास तो इलाज के भी पैसे नहीं थे। गहने बेचकर इलाज कराया फिर भी अजहरूद्दीन के अब्बू नहीं बचे। 

मेरी बेटे से अंतिम बात 27 अप्रैल को हुई थी। तब उसने कहा था कि अम्मी छह महीने तक यहां काम करूंगा और लौट आऊंगा लेकिन आज तक उसका पता नहीं चला है। इसी तरह से अन्य लोगों का भी कहना है कि उन्हें कुक और सिक्योरिटी गार्ड की नौकरी के नाम पर वहां भेजा गया और छोटी से ट्रेनिंग देकर जंग के मैदान में भेज दिया गया।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed