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Azamgarh News: अजमतगढ़ में 7.96 करोड़ खर्च, 20 ग्राम पंचायतों को नहीं मिला एक भी रुपया
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जिले में वीबीजी-रामजी में विपरीत परिस्थितियों में धनराशि खर्च करने के मामले में अजमतगढ़ पहली पायदान पर है। जुलाई से अब तक इस ब्लॉक में 7.96 करोड़ रुपये का भुगतान हुआ है, पर ब्लॉक की 20 ग्राम पंचायतों के हाथ अभी तक एकदम खाली हैं।
इन ग्राम पंचायतों के हिस्से एक रुपया भी नहीं आया है। इसी तरह सर्वाधिक धनराशि खर्च कर दूसरे पायदान पर रहे हरैया ब्लॉक में दो, तो तीसरे पायदान पर रहे विकासखंड मेंहनगर में नौ ग्राम पंचायतें ऐसी हैं, जो अब तक एक रुपये के लिए भी तरस रही हैं। इन ग्राम पंचायतों के एक भी जॉबकार्डधारक को एक भी रुपया नहीं मिल पाया है।
एक जुलाई से मनरेगा की जगह लागू वीबीजी-रामजी (विकसित भारत-गारंटी फॉर रोजगार एवं आजीविका मिशन) के श्रम मद में अभी तक पूरे जिले में 44.44 करोड़ रुपये खर्च हो गए हैं। प्रदेश में आजमगढ़ ने सर्वाधिक धनराशि खर्च करने में पहला स्थान हासिल किया है।
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जिले में बारिश के दौरान विपरीत परिस्थितियों में भी मिशन तेजी से दौड़ा। आलम यह रहा कि विकासखंडों से धड़ाधड़ स्वीकृतियां मिलीं और रोजगारपरक योजना कागजों पर चल निकली। बारिश के दौरान पोखरों की खोदाई से लेकर बाहा और नाला खोदाई तक की गई।
इसका नतीजा रहा कि विकासखंडों की पसंदीदा ग्राम पंचायतों को खूब काम मिले और भुगतान हुए। इसमें विकासखंड अजमतगढ़ जिले में पहले नंबर पर रहा। यहां अतरकच्छा जैसी ग्राम पंचायत को बिना पर्याप्त जांच के काम कराने की स्वीकृति दी गई और अभी तक 56 लाख तक के भुगतान भी किए गए।
इसके अलावा कुछ अन्य ग्राम पंचायतों को 41, 26, 22-22 लाख रुपये तक दिए गए। इसमें 22 ग्राम पंचायतों को ब्लॉक प्रशासन भूल गया। योजना शुरू होने के तीन माह बाद भी इनके हिस्से एक फूटी कौड़ी तक नहीं आई।
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जिले में 205 ग्राम पंचायतों के हाथ खाली
वीबीजी-रामजी में अब प्रत्येक गरीब जॉबकार्डधारक परिवार को 125 दिन का रोजगार देना है। जुलाई से जिले की कुल 1810 ग्राम पंचायतों में यह योजना शुरू हुई। यहां कुछ ग्राम पंचायतों ने इसे अवसर के रूप में तब्दील किया, तो कुछ ग्राम पंचायतें इसमें पिछड़ गईं। हाल यह रहा कि अक्तूबर के मध्य तक जिले की 204 ग्राम पंचायतें ऐसी रहीं, जिन्हें एक रुपया भी नहीं मिला, जबकि जिले में 44.44 करोड़ रुपये का खर्च होना पोर्टल पर दर्ज है।
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जिले में ब्लाकवार भुगतान और शून्य धनराशि की ग्राम पंचायतों का विवरण-- (धनराशि लाख में)
ब्लॉक - कुल भुगतान - शून्य धनराशि
1- अहरौला - 131.54 - 08
2- अतरौलिया - 61.35 - 01
3- अजमतगढ़ - 796.74 - 20
4- बिलरियागंज - 62.9 - 31
5- हरैया - 421.61 - 02
6- जहानागंज - 354.73 - 13
7- कोयलसा - 52.8 - 02
8- लालगंज - 265.5 - 08
9- महाराजगंज - 224.03 - 02
10- मार्टीनगंज - 133.82 - 03
11- मेंहनगर - 368.44 - 09
12- मीरजापुर - 52.01 - 09
13- मोहम्मदपुर - 179.41 - 10
14- पल्हना - 34.84 - 03
15- पल्हनी - 30.27 - 07
16- पवई - 286.18 - 03
17- फूलपुर - 66.09 - 07
18- रानी की सराय - 32.29 - 13
19- सठियांव - 368.55 - 01
20- तहबरपुर - 113.39 - 09
21- तरवां - 148.19 - 22
22- ठेकमा - 260.27 - 22
-- -- -- -वर्जन
काम तो सभी ग्राम पंचायतों में हुए हैं लेकिन, अजमतगढ़ और हरैया विकासखंड में मजदूरों की उपलब्धता अधिक है। इसलिए इन विकासखंडों में काम अधिक होते हैं। यह आज की बात नहीं है, बल्कि शुरू से ही यही स्थिति है। सिर्फ अहरौला विकासखंड की एक ग्राम पंचायत का टेक्निकल इश्यू फंसा हुआ है। इसके कारण वहां काम नहीं हुआ है। बाकी सभी ग्राम पंचायतों में काम हुए हैं। -संजय सिंह, डीडीओ व प्रभारी वीबीजी-रामजी।
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इन ग्राम पंचायतों के हिस्से एक रुपया भी नहीं आया है। इसी तरह सर्वाधिक धनराशि खर्च कर दूसरे पायदान पर रहे हरैया ब्लॉक में दो, तो तीसरे पायदान पर रहे विकासखंड मेंहनगर में नौ ग्राम पंचायतें ऐसी हैं, जो अब तक एक रुपये के लिए भी तरस रही हैं। इन ग्राम पंचायतों के एक भी जॉबकार्डधारक को एक भी रुपया नहीं मिल पाया है।
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एक जुलाई से मनरेगा की जगह लागू वीबीजी-रामजी (विकसित भारत-गारंटी फॉर रोजगार एवं आजीविका मिशन) के श्रम मद में अभी तक पूरे जिले में 44.44 करोड़ रुपये खर्च हो गए हैं। प्रदेश में आजमगढ़ ने सर्वाधिक धनराशि खर्च करने में पहला स्थान हासिल किया है।
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जिले में बारिश के दौरान विपरीत परिस्थितियों में भी मिशन तेजी से दौड़ा। आलम यह रहा कि विकासखंडों से धड़ाधड़ स्वीकृतियां मिलीं और रोजगारपरक योजना कागजों पर चल निकली। बारिश के दौरान पोखरों की खोदाई से लेकर बाहा और नाला खोदाई तक की गई।
इसका नतीजा रहा कि विकासखंडों की पसंदीदा ग्राम पंचायतों को खूब काम मिले और भुगतान हुए। इसमें विकासखंड अजमतगढ़ जिले में पहले नंबर पर रहा। यहां अतरकच्छा जैसी ग्राम पंचायत को बिना पर्याप्त जांच के काम कराने की स्वीकृति दी गई और अभी तक 56 लाख तक के भुगतान भी किए गए।
इसके अलावा कुछ अन्य ग्राम पंचायतों को 41, 26, 22-22 लाख रुपये तक दिए गए। इसमें 22 ग्राम पंचायतों को ब्लॉक प्रशासन भूल गया। योजना शुरू होने के तीन माह बाद भी इनके हिस्से एक फूटी कौड़ी तक नहीं आई।
जिले में 205 ग्राम पंचायतों के हाथ खाली
वीबीजी-रामजी में अब प्रत्येक गरीब जॉबकार्डधारक परिवार को 125 दिन का रोजगार देना है। जुलाई से जिले की कुल 1810 ग्राम पंचायतों में यह योजना शुरू हुई। यहां कुछ ग्राम पंचायतों ने इसे अवसर के रूप में तब्दील किया, तो कुछ ग्राम पंचायतें इसमें पिछड़ गईं। हाल यह रहा कि अक्तूबर के मध्य तक जिले की 204 ग्राम पंचायतें ऐसी रहीं, जिन्हें एक रुपया भी नहीं मिला, जबकि जिले में 44.44 करोड़ रुपये का खर्च होना पोर्टल पर दर्ज है।
जिले में ब्लाकवार भुगतान और शून्य धनराशि की ग्राम पंचायतों का विवरण
ब्लॉक - कुल भुगतान - शून्य धनराशि
1- अहरौला - 131.54 - 08
2- अतरौलिया - 61.35 - 01
3- अजमतगढ़ - 796.74 - 20
4- बिलरियागंज - 62.9 - 31
5- हरैया - 421.61 - 02
6- जहानागंज - 354.73 - 13
7- कोयलसा - 52.8 - 02
8- लालगंज - 265.5 - 08
9- महाराजगंज - 224.03 - 02
10- मार्टीनगंज - 133.82 - 03
11- मेंहनगर - 368.44 - 09
12- मीरजापुर - 52.01 - 09
13- मोहम्मदपुर - 179.41 - 10
14- पल्हना - 34.84 - 03
15- पल्हनी - 30.27 - 07
16- पवई - 286.18 - 03
17- फूलपुर - 66.09 - 07
18- रानी की सराय - 32.29 - 13
19- सठियांव - 368.55 - 01
20- तहबरपुर - 113.39 - 09
21- तरवां - 148.19 - 22
22- ठेकमा - 260.27 - 22
काम तो सभी ग्राम पंचायतों में हुए हैं लेकिन, अजमतगढ़ और हरैया विकासखंड में मजदूरों की उपलब्धता अधिक है। इसलिए इन विकासखंडों में काम अधिक होते हैं। यह आज की बात नहीं है, बल्कि शुरू से ही यही स्थिति है। सिर्फ अहरौला विकासखंड की एक ग्राम पंचायत का टेक्निकल इश्यू फंसा हुआ है। इसके कारण वहां काम नहीं हुआ है। बाकी सभी ग्राम पंचायतों में काम हुए हैं। -संजय सिंह, डीडीओ व प्रभारी वीबीजी-रामजी।