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अब अस्तित्व की जंग लड़ रहीं नदियां
ब्यूरो/अमर उजाला,आजमगढ़
Updated Fri, 27 May 2016 11:53 PM IST
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नदियों की हालत खराब
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कहने को आजमगढ़ जनपद में एक दर्जन नदियां हैं लेकिन एक-दो को छोड़कर किसी भी नदी में पानी नहीं है। जिसका परिणाम है कि कई नदियों की जमीन पर लोगों ने कब्जा जमाकर अवैध निर्माण तो कई की जमीन पर लोगों ने खेती बारी करना शुरू कर दिया है।
आजमगढ़ जिला नदियों से घिरा है। इनमें तमसा, मंजूषा, कुंवर, घाघरा, छोटी सरयू, गांगी, बेसो, भैंसही, उदंती, मझुई, मंगई और सिलनी नदियां शामिल हैं। आज तमसा और घाघरा (सरयू) को छोड़ दें तो शायद ही किसी में पानी हो। तमसा का उद्गम स्थल मध्य प्रदेश के रिवा के पास पूर्वा झरना (तमा कुंड) है।
जो अयोध्या, आजमगढ़ होते बलिया में गंगा में जाकर मिल गई है। वहीं, सरयू का उद्गम स्थल हिमालय है, रामायण काल में सरयू कोसल जनपद की प्रमुख नदी थी। सगड़ी तहसील क्षेत्र के लाटघाट बाजार से होकर गुजरने वाली पुरानी सरयू नदी आज अपने अस्तित्व की जंग लड़ रही है। नदी में मिट्टी पटने से इसका पानी जल्दी सूख जाता है। इसके कारण, इसकी भूमि पर कई लोगों ने अवैध कब्जा जमा लिया है। सैकड़ों वर्ष पूर्व सरयू नदी (घाघरा) लाटघाट के पास से होकर गुजरती थी।
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धीरे-धीरे ही नदी की दिशा बदल गई और आज घाघरा नमहुला, परसिया, हाजीपुर होते हुए बह रही है। लाटघाट का नामकरण भी इसी नदी के नाम से जुड़ा है। बहुत समय पूर्व यहां एक लाटसाहब रहा करते थे। नदी के किनारे जहां एक पुल है, वहां पर एक घाट बना था जहां लोग स्नान आदि करते थे।
तभी से इस जगह का नाम लाटघाट बड़ा। पुरानी सरयू नदी अंबेडकर नगर से निकली है। बरहपुर के पास आकर यह नदी दो शाखाओं में विभक्त हो गई। एक शाखा बरहपुर से कटकर महुला होते हुए मऊ जनपद के पास जाकर घाघरा में विलीन हो गई। वहीं, दूसरी शाखा बरहपुर से लाटघाट होते हुए मऊ जनपद के सहरोज के पास तमसा में विलीन हो गई।
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आजमगढ़ जिला नदियों से घिरा है। इनमें तमसा, मंजूषा, कुंवर, घाघरा, छोटी सरयू, गांगी, बेसो, भैंसही, उदंती, मझुई, मंगई और सिलनी नदियां शामिल हैं। आज तमसा और घाघरा (सरयू) को छोड़ दें तो शायद ही किसी में पानी हो। तमसा का उद्गम स्थल मध्य प्रदेश के रिवा के पास पूर्वा झरना (तमा कुंड) है।
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जो अयोध्या, आजमगढ़ होते बलिया में गंगा में जाकर मिल गई है। वहीं, सरयू का उद्गम स्थल हिमालय है, रामायण काल में सरयू कोसल जनपद की प्रमुख नदी थी। सगड़ी तहसील क्षेत्र के लाटघाट बाजार से होकर गुजरने वाली पुरानी सरयू नदी आज अपने अस्तित्व की जंग लड़ रही है। नदी में मिट्टी पटने से इसका पानी जल्दी सूख जाता है। इसके कारण, इसकी भूमि पर कई लोगों ने अवैध कब्जा जमा लिया है। सैकड़ों वर्ष पूर्व सरयू नदी (घाघरा) लाटघाट के पास से होकर गुजरती थी।
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धीरे-धीरे ही नदी की दिशा बदल गई और आज घाघरा नमहुला, परसिया, हाजीपुर होते हुए बह रही है। लाटघाट का नामकरण भी इसी नदी के नाम से जुड़ा है। बहुत समय पूर्व यहां एक लाटसाहब रहा करते थे। नदी के किनारे जहां एक पुल है, वहां पर एक घाट बना था जहां लोग स्नान आदि करते थे।
तभी से इस जगह का नाम लाटघाट बड़ा। पुरानी सरयू नदी अंबेडकर नगर से निकली है। बरहपुर के पास आकर यह नदी दो शाखाओं में विभक्त हो गई। एक शाखा बरहपुर से कटकर महुला होते हुए मऊ जनपद के पास जाकर घाघरा में विलीन हो गई। वहीं, दूसरी शाखा बरहपुर से लाटघाट होते हुए मऊ जनपद के सहरोज के पास तमसा में विलीन हो गई।