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नौटंकी को मिले राष्ट्रीय संगीतिका का दर्जा
ब्यूरो, अमर उजाला, आजमगढ़
Updated Mon, 21 Mar 2016 12:48 AM IST
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लोक महोत्सव देशज में आयोजित परिचर्चा में भाग लेने मथुरा से आए वरिष्ठ रंगकर्मी मोहन स्वरूप भाटिया ने कहा कि विलुप्त हो रही नौटंकी के उत्थान के लिए आवश्यक है कि उसे राष्ट्रीय संगीतिका (नेशनल ओपेरा) घोषित किया जाए क्योंकि यही एक ऐसी स्वच्छ विधा है, जिसके जरिए योजनाओं का भी प्रचार-प्रसार किया जा सकता है।
पत्रकारिता से लंबे समय तक जुड़े रहे भाटिया ने अमर उजाला से बातचीत में कहा कि सांस्कृतिक क्षेत्र में भारत की यही एक ऐसी अपनी विधा है जिसमें समसामयिक, लोककथा के साथ पौराणिक कथाओं का भी समावेश है। आज देश के झंडे से लेकर राष्ट्रीय पशु, पक्षी तक घोषित हो चुके हैं लेकिन संगीत का नहीं हुआ है।
ऐसे में इस विधा को आयाम देने के लिए जरूरी है कि इसे राष्ट्रीय संगीतिका घोषित किया जाए। चर्चित नौटंकी भूदान के लेखक भाटिया ने कहा कि उपेक्षा के कारण इस विधा के कलाकार लीक से हटकर कार्यक्रमों का मंचन करने लगे। इसी से यह विधा बदनाम हुई। प्रयास किए जाए तो इसकी बदनामी के दाग धुल जाएंगे।
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आकाशवाणी के लिए कई नौटंकी लिख चुके भाटिया कहते हैं कि नौटंकी ही ऐसी विधा है, जो रात नौ बजे शुरू होती है। इसके कलाकार जीवंत प्रस्तुति कर दर्शकों को पूरी रात रोके रखते हैं और किसी विधा में यह दम नहीं है।
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पत्रकारिता से लंबे समय तक जुड़े रहे भाटिया ने अमर उजाला से बातचीत में कहा कि सांस्कृतिक क्षेत्र में भारत की यही एक ऐसी अपनी विधा है जिसमें समसामयिक, लोककथा के साथ पौराणिक कथाओं का भी समावेश है। आज देश के झंडे से लेकर राष्ट्रीय पशु, पक्षी तक घोषित हो चुके हैं लेकिन संगीत का नहीं हुआ है।
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ऐसे में इस विधा को आयाम देने के लिए जरूरी है कि इसे राष्ट्रीय संगीतिका घोषित किया जाए। चर्चित नौटंकी भूदान के लेखक भाटिया ने कहा कि उपेक्षा के कारण इस विधा के कलाकार लीक से हटकर कार्यक्रमों का मंचन करने लगे। इसी से यह विधा बदनाम हुई। प्रयास किए जाए तो इसकी बदनामी के दाग धुल जाएंगे।
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आकाशवाणी के लिए कई नौटंकी लिख चुके भाटिया कहते हैं कि नौटंकी ही ऐसी विधा है, जो रात नौ बजे शुरू होती है। इसके कलाकार जीवंत प्रस्तुति कर दर्शकों को पूरी रात रोके रखते हैं और किसी विधा में यह दम नहीं है।