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आजमगढ़: यूजीसी के नए नियमों को लेकर राजपूत सेवा संगठन हुआ लामबंद, डीएम के जरिए राष्ट्रपति को सौंपा ज्ञापन
Sat, 05 Sep 2026 05:44 PM IST
Pragati Chand
अमर उजाला नेटवर्क, आजमगढ़।
अमर उजाला नेटवर्क, आजमगढ़।
Published by: Pragati Chand
Updated Sat, 05 Sep 2026 05:44 PM IST
सार
आजमगढ़ जिले में राजपूत सेवा संगठन ने यूजीसी के नए नियमों को लेकर डीएम के जरिए राष्ट्रपति को चार सूत्रीय मांगों का ज्ञापन सौंपा। संगठन ने सभी नागरिकों के लिए समान अवसर सुनिश्चित करने के लिए मांगों पर तत्काल कार्रवाई की अपील की है।
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यूजीसी के नए नियमों को लेकर राजपूत सेवा संगठन हुआ लामबंद
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
राजपूत सेवा संगठन ने सामाजिक समरसता, समानता, न्याय और राष्ट्रहित की भावना से प्रेरित होकर शनिवार को राष्ट्रपति को एक ज्ञापन सौंपा है। संगठन ने सभी नागरिकों के लिए समान अवसर सुनिश्चित करने के लिए चार प्रमुख मांगों पर तत्काल कार्रवाई की अपील की है।
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ज्ञापन में संगठन ने कहा है कि भारत के प्रत्येक नागरिक को बिना किसी भेदभाव के शिक्षा, रोजगार और विकास के समान अवसर मिलने चाहिए। संगठन की मांग है कि विश्वविद्यालय अनुदान आयोग यानि यूजीसी के नए नियमों को तुरंत समाप्त किया जाए ताकि किसी भी वर्ग के विद्यार्थियों को भेदभाव या असमानता का अनुभव न हो। सभी विद्यार्थियों के लिए समान अवसर और निष्पक्ष प्रक्रिया सुनिश्चित की जानी चाहिए।
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एससी-एसटी एक्ट में गलत या झूठा आरोप लगाने वाले पर गिरफ्तारी के साथ 6 माह की जेल का प्रावधान हो, ताकि इस कानून का दुरुपयोग रोका जा सके। आरोप फर्जी साबित होने पर पीड़ित को 10 गुना मुआवजा दिया जाए। सरकारी धन की प्राप्ति के लिए एससी-एसटी को पेशे के रूप में उपयोग करने वाले लोगों को प्रतिबंधित किया जाए।
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संगठन की मांग है कि आरक्षण व्यवस्था की व्यापक समीक्षा की जाए और आर्थिक रूप से कमजोर नागरिकों को प्राथमिकता देने की दिशा में नीति बनाई जाए। वर्तमान में आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लिए संविधान के अनुच्छेद 15(6) और 16(6) के तहत अधिकतम 10 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान है। संगठन आर्थिक आधार पर इसे और व्यापक बनाने की मांग करता है। यह ज्ञापन राजपूत सेवा संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष अवधेश सिंह द्वारा डीएम के माध्यम से माननीय राष्ट्रपति को भेजा गया।