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राजनीतिक दलों ने स्वार्थ के लिए वन नेशन वन इलेक्शन व्यवस्था खत्म की : केतकी
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आजमगढ़। 1951 से 1963 तक देश में एक साथ चुनाव होते थे, लेकिन कुछ राजनीतिक दलों ने अपने स्वार्थ के लिए इस व्यवस्था को समाप्त कर दिया। यह कहना है बलिया से विधायक केतकी सिंह का। वह हरिऔध कला केंद्र में वन नेशन, वन इलेक्शन पर सोमवार को एक कार्यक्रम में बोल रही थीं। इस दौरान मुख्य अतिथि राज्यसभा सांसद सीमा द्विवेदी ने भी वन नेशन वन इलेक्शन के महत्व और इसके फायदों पर विस्तृत चर्चा की।
विधायक केतकी सिंह ने कहा कि अखिलेश यादव को पहले यह समझना चाहिए कि जब वे कांग्रेस को समर्थन दे रहे थे, तब देश की क्या स्थिति थी। आज नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश सशक्त हो रहा है। कठोर निर्णय लेना अखिलेश या राहुल गांधी के बस की बात नहीं है।
मुलायम सिंह यादव ने समाजवादी पार्टी को मेहनत से खड़ा किया था, लेकिन अखिलेश ने इसके लिए कोई परिश्रम नहीं किया। राणा सांगा और अन्य विवादों पर बोलते हुए उन्होंने विपक्ष पर राष्ट्रविरोधी और धर्मविरोधी गतिविधियों में शामिल होने का आरोप लगाया।
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चाहे औरंगजेब की बधाई का मामला हो, रामायण की प्रतियां जलाने का मामला हो, या श्री रामचंद्र जी पर विवादित बयानबाजी, विपक्ष देश की अखंडता को तोड़ने में शर्म नहीं करता। जनता इनके असली चेहरे को पहचान चुकी है और इन्हें ठुकरा दिया है।
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विधायक केतकी सिंह ने कहा कि अखिलेश यादव को पहले यह समझना चाहिए कि जब वे कांग्रेस को समर्थन दे रहे थे, तब देश की क्या स्थिति थी। आज नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश सशक्त हो रहा है। कठोर निर्णय लेना अखिलेश या राहुल गांधी के बस की बात नहीं है।
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मुलायम सिंह यादव ने समाजवादी पार्टी को मेहनत से खड़ा किया था, लेकिन अखिलेश ने इसके लिए कोई परिश्रम नहीं किया। राणा सांगा और अन्य विवादों पर बोलते हुए उन्होंने विपक्ष पर राष्ट्रविरोधी और धर्मविरोधी गतिविधियों में शामिल होने का आरोप लगाया।
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चाहे औरंगजेब की बधाई का मामला हो, रामायण की प्रतियां जलाने का मामला हो, या श्री रामचंद्र जी पर विवादित बयानबाजी, विपक्ष देश की अखंडता को तोड़ने में शर्म नहीं करता। जनता इनके असली चेहरे को पहचान चुकी है और इन्हें ठुकरा दिया है।