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तीन पाकिस्तानियों का नहीं लग सका सुराग
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आजमगढ़। जनपद में वर्ष 1961 से आए तीन पाकिस्तानी नागरिकों का अभी तक सुराग नहीं लग सका है। वहीं, शासन पाकिस्तानी खुफिया एंजेसी आईएसआई और उनके पोषित आतंकबादी संगठनों तथा राष्ट्रविरोधी गतिविधियों पर नियंत्रण को लेकर परेशान है। इस संबंध में कमिश्नर को समीक्षा करने के निर्देश दिए गए थे। निर्देश के मद्देनजर लापता पाकिस्तानी नागरिकों, जल्दी धनी होने वालों, धार्मि स्थानों के निर्माण, पाकिस्तान जाने वाले लोग, बांग्लादेशी नागरिकों, कश्मीर से आए संदिग्ध आदि की सूचना तलब की गई थी। शुक्रवार को कमिश्नर ने समीक्षा में पुलिस अधिकारियों को पैनी नजर रखने के निर्देश दिए।
जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 और 35ए हटाए जाने के बाद शासन की ओर से सुरक्षा को लेकर विशेष सक्रियता बरती जा रही है। इस क्रम में शासन की ओर से कमिश्नर की अध्यक्षता में कई बिंदुओं पर समीक्षा के निर्देश दिए गए थे। इन बिंदुओं पर रिपोर्ट तलब की गई थी। वर्ष 1960 से लेकर तीन ऐसे पाकिस्तानी नागरिक वीजा पर जनपद आए जिनके बारे में कोई जानकारी नहीं है। 18 अगस्त 1960 को पाक के कराची से मो. इस्लाम नसीम पुत्र मोहम्मद हसन अपने पिता के घर सजनी थाना अहरौला आया था, लेकिन इनके वापस जाने की कोई सूचना नहीं है। हालांकि इनके पाकिस्तान के परिजनों का कहना है कि उनकी नौत हो चुकी है। इसी दिन पाकिस्तान के करांची स अजीमुल्ला पुत्र मो. सफी गंभीरपुर के जहनियांपुर आया था। इनके बारे में भी कोई जानकारी नहीं है। जहनियापुर में पता करने पर पता चला कि इस नाम का यहां कोई आया ही नहीं था। एक अन्य पाक नागरकि के बारे में भी कोई जानकारी नहीं है। इसी तरह बांग्लादेश का भी एक नागरिक गायब है। 1978 में बांग्लादेश के चटगांव से सैय्यद तकी हसन आब्दी फूलपुर के सहजेरपुर में आया था। इसके खिलाफ जौनपुर में दर्ज एक मुकदमे में इसे गिरफ्तार भी किया गया था। जमानत पर रिहा होने के बाद से लापता है। इसके साथ ही जनपद के तीन शिक्षण संस्थाओं में 120 कश्मीरी छात्र शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं।
इसके साथ ही साइबर कैफे, कम समय में धनी होने वालों आदि के बारे में भी सूचना मांगी गई थी, लेकिन ऐसा कोई मामला पकड़ में नहीं आया है। कमिश्नर कनक त्रिपाठी ने इस बिंदुओं पर शुक्रवार को समीक्षा की। पुलिस अधिकारियों को पैनी नजर रखने के निर्देश दिए।
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जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 और 35ए हटाए जाने के बाद शासन की ओर से सुरक्षा को लेकर विशेष सक्रियता बरती जा रही है। इस क्रम में शासन की ओर से कमिश्नर की अध्यक्षता में कई बिंदुओं पर समीक्षा के निर्देश दिए गए थे। इन बिंदुओं पर रिपोर्ट तलब की गई थी। वर्ष 1960 से लेकर तीन ऐसे पाकिस्तानी नागरिक वीजा पर जनपद आए जिनके बारे में कोई जानकारी नहीं है। 18 अगस्त 1960 को पाक के कराची से मो. इस्लाम नसीम पुत्र मोहम्मद हसन अपने पिता के घर सजनी थाना अहरौला आया था, लेकिन इनके वापस जाने की कोई सूचना नहीं है। हालांकि इनके पाकिस्तान के परिजनों का कहना है कि उनकी नौत हो चुकी है। इसी दिन पाकिस्तान के करांची स अजीमुल्ला पुत्र मो. सफी गंभीरपुर के जहनियांपुर आया था। इनके बारे में भी कोई जानकारी नहीं है। जहनियापुर में पता करने पर पता चला कि इस नाम का यहां कोई आया ही नहीं था। एक अन्य पाक नागरकि के बारे में भी कोई जानकारी नहीं है। इसी तरह बांग्लादेश का भी एक नागरिक गायब है। 1978 में बांग्लादेश के चटगांव से सैय्यद तकी हसन आब्दी फूलपुर के सहजेरपुर में आया था। इसके खिलाफ जौनपुर में दर्ज एक मुकदमे में इसे गिरफ्तार भी किया गया था। जमानत पर रिहा होने के बाद से लापता है। इसके साथ ही जनपद के तीन शिक्षण संस्थाओं में 120 कश्मीरी छात्र शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं।
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इसके साथ ही साइबर कैफे, कम समय में धनी होने वालों आदि के बारे में भी सूचना मांगी गई थी, लेकिन ऐसा कोई मामला पकड़ में नहीं आया है। कमिश्नर कनक त्रिपाठी ने इस बिंदुओं पर शुक्रवार को समीक्षा की। पुलिस अधिकारियों को पैनी नजर रखने के निर्देश दिए।
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