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Azamgarh News: गो आश्रय स्थलों पर बनाए जाएंगे चारागाह, बढ़ेंगी सुविधाएं
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जिले के गो आश्रय स्थलों की व्यवस्था सुधारने के लिए शासन स्तर पर पहल शुरू की गई है। अब पशुपालन विभाग की ओर से गो आश्रय स्थलों में चारागाह विकसित किए जाएंगे, ताकि निराश्रित गोवंश को सालभर हरा चारा मिल सके।
इसके साथ ही सोलर लाइट, चरनी, शेड, नाली, चबूतरा और भूसा गोदाम समेत अन्य सुविधाएं विकसित की जाएंगी। इसके लिए पशुपालन विभाग ने वीबीजी रामजी योजना के तहत प्रस्ताव तैयार कर ग्राम्य विकास विभाग को भेजेगा।
जिले में संचालित 84 गो आश्रय स्थलों में से पहले चरण में 25 स्थलों पर काम कराया जाएगा। प्रस्ताव में कुल 30 कार्य शामिल किए गए हैं। ग्राम्य विकास विभाग इन कार्यों का आगणन तैयार करेगा, जिसके बाद निर्माण कार्य शुरू कराया जाएगा।
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गो आश्रय स्थलों में चारागाह विकसित होने से पशुओं के लिए स्थानीय स्तर पर हरे चारे की उपलब्धता सुनिश्चित होगी। इससे गोवंश के पोषण और स्वास्थ्य में सुधार होगा। साथ ही चारे की खरीद पर होने वाला खर्च भी कम होगा।
इसके अलावा पशुओं के खाने-पीने के लिए हौद और चरनी और बैठने के लिए चबूतरा और कैटल शेड बनाए जाएंगे। वर्मी कंपोस्ट की भी व्यवस्था की जाएगी। गो आश्रय स्थलों पर मिट्टी की भराई कराई जाएगी।
भूसा सुरक्षित रखने के लिए गोदाम का निर्माण होगा, जबकि जल निकासी के लिए नालियां बनाई जाएंगी। सोलर प्लांट और लाइट की व्यवस्था से केंद्रों पर बिजली की सुविधा भी बेहतर होगी। जिले में वर्तमान में 84 गो आश्रय स्थल संचालित हैं। इन स्थलों पर कुल 8854 गोवंश संरक्षित हैं।
-- वर्जन
सभी केंद्रों पर हरे चारे की व्यवस्था सुनिश्चित करने के उद्देश्य से वीबीजी रामजी योजना के तहत कार्यों का प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है। ग्राम्य विकास विभाग की ओर से कार्यों का आगणन तैयार होने के बाद काम शुरू कराया जाएगा। -डॉ. मुकेश गुप्ता, सीवीओ।
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इसके साथ ही सोलर लाइट, चरनी, शेड, नाली, चबूतरा और भूसा गोदाम समेत अन्य सुविधाएं विकसित की जाएंगी। इसके लिए पशुपालन विभाग ने वीबीजी रामजी योजना के तहत प्रस्ताव तैयार कर ग्राम्य विकास विभाग को भेजेगा।
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जिले में संचालित 84 गो आश्रय स्थलों में से पहले चरण में 25 स्थलों पर काम कराया जाएगा। प्रस्ताव में कुल 30 कार्य शामिल किए गए हैं। ग्राम्य विकास विभाग इन कार्यों का आगणन तैयार करेगा, जिसके बाद निर्माण कार्य शुरू कराया जाएगा।
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गो आश्रय स्थलों में चारागाह विकसित होने से पशुओं के लिए स्थानीय स्तर पर हरे चारे की उपलब्धता सुनिश्चित होगी। इससे गोवंश के पोषण और स्वास्थ्य में सुधार होगा। साथ ही चारे की खरीद पर होने वाला खर्च भी कम होगा।
इसके अलावा पशुओं के खाने-पीने के लिए हौद और चरनी और बैठने के लिए चबूतरा और कैटल शेड बनाए जाएंगे। वर्मी कंपोस्ट की भी व्यवस्था की जाएगी। गो आश्रय स्थलों पर मिट्टी की भराई कराई जाएगी।
भूसा सुरक्षित रखने के लिए गोदाम का निर्माण होगा, जबकि जल निकासी के लिए नालियां बनाई जाएंगी। सोलर प्लांट और लाइट की व्यवस्था से केंद्रों पर बिजली की सुविधा भी बेहतर होगी। जिले में वर्तमान में 84 गो आश्रय स्थल संचालित हैं। इन स्थलों पर कुल 8854 गोवंश संरक्षित हैं।
सभी केंद्रों पर हरे चारे की व्यवस्था सुनिश्चित करने के उद्देश्य से वीबीजी रामजी योजना के तहत कार्यों का प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है। ग्राम्य विकास विभाग की ओर से कार्यों का आगणन तैयार होने के बाद काम शुरू कराया जाएगा। -डॉ. मुकेश गुप्ता, सीवीओ।