{"_id":"609409717885c537641824c6","slug":"panchayat-elections-bsp-sp-on-par-bjp-also-gives-tough-competition","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"पंचायत चुनाव : बसपा-सपा बराबरी पर, भाजपा ने भी दी कड़ी टक्कर ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
पंचायत चुनाव : बसपा-सपा बराबरी पर, भाजपा ने भी दी कड़ी टक्कर
Thu, 06 May 2021 08:51 PM IST
गीतार्जुन गौतम
अमर उजाला नेटवर्क, आजमगढ़
अमर उजाला नेटवर्क, आजमगढ़
Published by: गीतार्जुन गौतम
Updated Thu, 06 May 2021 08:51 PM IST
सार
त्रिकोणीय संघर्ष से विधानसभा चुनाव में बदल सकता है पूर्वांचल का सियासी समीकरण
विज्ञापन
पंचायत चुनाव।
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
आजमगढ़ मंडल के तीनों जनपदों में पंचायत चुनाव की स्थिति देखें तो सपा और बसपा जहां बराबरी पर हैं वहीं भाजपा इनसे ज्यादा पीछे नहीं है। कांग्रेस की हालत तो सुभासपा से भी खराब दिख रही है। बलिया , मऊ और आजमगढ़ तीनों जिलों में कांग्रेस ने सिर्फ चार सीटें जीती हैं वहीं सुभासपा को अकेले बलिया में सात सीटों पर मिली जीत सभी राजनीतिक दलों के लिए खतरे की घंटी है। इस आधार पर कहा जा सकता है कि आगामी विधानसभा चुनावों में आजमगढ़ मंडल में त्रिकोणीय संघर्ष हो सकता है। पिछले विस चुनावों में ज्यादा से ज्यादा सीटों पर सपा और बसपा का ही कब्जा रहा है। भाजपा हर बार सपा-बसपा के तिलिस्म को तोड़ने का प्रयास करती है लेकिन इसमें सफल नहीं हो पाती।
पंचायत चुनावों की स्थिति पर गौर करें तो मंडल की 176 सीटों में सपा और बसपा को 26-26 सीटें, भाजपा को 22 सीटें, कांग्रेस को चार और सुभासपा को सात सीटें मिली हैं। इसके अलावा एआईएमआईएम, राष्ट्रीय उलेमा कौंसिल, अपना दल को एक-एक सीटें मिली हैं। वहीं आजाद समाज पार्टी के हिस्से दो सीटें आई हैं। इन आंकड़ों पर गौर तो आगामी विधानसभा चुनावों में भाजपा सपा और बसपा को कड़ी टक्कर देने की ओर बढ़ती नजर आ रही है।
आजमगढ़ जनपद की 84 सीटों में बसपा को 10, सपा को 12 और भाजपा को 11 सीटों पर जीत मिली। जबकि कांग्रेस, राष्ट्रीय उलेमा कौंसिल व एआईएमआईएम को एक-एक सीटें मिली। वहीं आजाद समाज पार्टी ने दो सीटों पर कब्जा जमाया। निर्दलियों ने 45 सीटों पर कब्जा जमाया। वहीं मऊ में बसपा सभी राजनीतिक दलों पर भारी है लेकिन निर्दलीय यहां भी सभी राजनीतिक दलों पर भारी हैं। मऊ में बसपा को सात, सपा को दो और भाजपा को दो सीटें मिली हैं। शेष 23 सीटें निर्दलियों के हाथ लगी। वहीं बलिया जनपद की 58 सीटों में सपा का पलड़ा भारी रहा। सपा ने यहां पर 12 सीटों पर कब्जा जमाया जबकि बसपा और भाजपा को नौ-नौ सीटों से संतोष करना पड़ा।
विज्ञापन
यहां पर तीन सीटें कांग्रेेस को मिली और सात सीटों पर सुभासपा के प्रत्याशियों ने बाजी मारी। 28 सीटें निर्दलियों के खाते में आई। अगर पंचायत चुनाव जैसा प्रदर्शन भाजपा विधानसभा चुनाव में भी दोहराती है तो सपा और बसपा के लिए आगे की राह बहुत कठिन होगी। सबसे खराब हालत कांग्रेस की हैं। सत्ता गवांने के बाद उत्तर प्रदेश में फिर अपना परचम फहराने की पार्टी द्वारा हर संभव कोशिश की जा रही है लेकिन विगत चार सालों में पार्टी द्वारा की गई मेहनत का फल मिलता नहीं दिख रहा है। तीन जनपदों की 176 सीटों में से पार्टी के हिस्से में मात्र चार सीटें आई। इसमें आजमगढ़ में एक और बलिया में तीन सीटें मिली। जबकि मऊ में पार्टी का खाता भी नहीं खुल सका।
विज्ञापन
पंचायत चुनावों की स्थिति पर गौर करें तो मंडल की 176 सीटों में सपा और बसपा को 26-26 सीटें, भाजपा को 22 सीटें, कांग्रेस को चार और सुभासपा को सात सीटें मिली हैं। इसके अलावा एआईएमआईएम, राष्ट्रीय उलेमा कौंसिल, अपना दल को एक-एक सीटें मिली हैं। वहीं आजाद समाज पार्टी के हिस्से दो सीटें आई हैं। इन आंकड़ों पर गौर तो आगामी विधानसभा चुनावों में भाजपा सपा और बसपा को कड़ी टक्कर देने की ओर बढ़ती नजर आ रही है।
विज्ञापन
आजमगढ़ जनपद की 84 सीटों में बसपा को 10, सपा को 12 और भाजपा को 11 सीटों पर जीत मिली। जबकि कांग्रेस, राष्ट्रीय उलेमा कौंसिल व एआईएमआईएम को एक-एक सीटें मिली। वहीं आजाद समाज पार्टी ने दो सीटों पर कब्जा जमाया। निर्दलियों ने 45 सीटों पर कब्जा जमाया। वहीं मऊ में बसपा सभी राजनीतिक दलों पर भारी है लेकिन निर्दलीय यहां भी सभी राजनीतिक दलों पर भारी हैं। मऊ में बसपा को सात, सपा को दो और भाजपा को दो सीटें मिली हैं। शेष 23 सीटें निर्दलियों के हाथ लगी। वहीं बलिया जनपद की 58 सीटों में सपा का पलड़ा भारी रहा। सपा ने यहां पर 12 सीटों पर कब्जा जमाया जबकि बसपा और भाजपा को नौ-नौ सीटों से संतोष करना पड़ा।
विज्ञापन
यहां पर तीन सीटें कांग्रेेस को मिली और सात सीटों पर सुभासपा के प्रत्याशियों ने बाजी मारी। 28 सीटें निर्दलियों के खाते में आई। अगर पंचायत चुनाव जैसा प्रदर्शन भाजपा विधानसभा चुनाव में भी दोहराती है तो सपा और बसपा के लिए आगे की राह बहुत कठिन होगी। सबसे खराब हालत कांग्रेस की हैं। सत्ता गवांने के बाद उत्तर प्रदेश में फिर अपना परचम फहराने की पार्टी द्वारा हर संभव कोशिश की जा रही है लेकिन विगत चार सालों में पार्टी द्वारा की गई मेहनत का फल मिलता नहीं दिख रहा है। तीन जनपदों की 176 सीटों में से पार्टी के हिस्से में मात्र चार सीटें आई। इसमें आजमगढ़ में एक और बलिया में तीन सीटें मिली। जबकि मऊ में पार्टी का खाता भी नहीं खुल सका।
सुभासपा ने बलिया में सात सीट जीत बजाई खतरे की घंटी
आजमगढ़। एआईएमआईएम से गठबंधन कर 2022 का विधानसभा चुनाव लड़ने का ऐलान कर चुके सुभासपा के ओमप्रकाश राजभर की पार्टी को आजमगढ़ और मऊ में सफलता नहीं मिल सकी। आजमगढ़ में एआईएमआईएम को एक सीट जरूर मिली है लेकिन बलिया में सुभासपा को सात सीटों पर जीत मिलना अन्य राजनीतिक दलों की विधानसभा चुनाव में गणित विगाड़ सकती है। विधानसभा चुनाव में सुभासपा के साथ एआईएमआईएम के साथ शिवपाल यादव की प्रगतिशील समाजवादी पार्टी लोहिया भी खड़ी होंगी।
बसपा और सपा रहे बराबर तो भाजपा ने भी दी कड़ी टक्कर
विधानसभा चुनावों में आजमगढ़ मंडल में सपा और बसपा के बीच कांटे का संघर्ष देखने को मिलता है। ज्यादा से ज्यादा से ज्यादा सीटों पर सपा और बसपा की कब्जा रहता है। वहीं भाजपा सपा और बसपा के तिलस्म को तोड़ने में अभी तक कामयाब नहीं हो सकी है। लेकिन अगर मंडल के तीनों जनपदों में पंचायत चुनाव की स्थिति देखें तो सपा और बसपा जहां बराबरी पर हैं वहीं भाजपा भी इनसे ज्यादा पीछे नहीं है। जिसके कारण इस बार मंडल में एक त्रिकोणीय संघर्ष होने की संभावना है। लेकिन कांग्रेस की हालत सुभासपा से भी खराब नजर आती है। मंडल के तीनों में कांग्रेस ने जहां चार सीटें जीती हैं वहीं सुभासपा एक ही जनपद में सात सीटें जीतकर उससे काफी आगे निकल गई। बलिया में सुभासपा को सात सीटों पर मिली जीत सभी राजनीतिक दलों के लिए खतरे की घंटी है।
मंडल के तीनों जनपद में सपा और बसपा विगत कई विधानसभा चुनावों से एक छत्र अपना दबदाबा कायम किए हुए है। भाजपा हर बार सपा और बसपा के तिलस्म को तोड़ने का प्रयास करती है लेकिन इसमें उसे अब तक सफलता नहीं मिल सकी है। लेकिन अगर पंचायत चुनावों की स्थिति पर गौर करें तो मंडल की 176 सीटों में सपा और बसपा को 26-26 सीटें, भाजपा को 22 सीटें, कांग्रेस को चार और सुभासपा को सात सीटें मिली हैं। इसके अलावा एआईएमआईएम, राष्ट्रीय उलेमा कौंसिल, अपना दल को एक-एक सीटें मिली हैं।
आजमगढ़। एआईएमआईएम से गठबंधन कर 2022 का विधानसभा चुनाव लड़ने का ऐलान कर चुके सुभासपा के ओमप्रकाश राजभर की पार्टी को आजमगढ़ और मऊ में सफलता नहीं मिल सकी। आजमगढ़ में एआईएमआईएम को एक सीट जरूर मिली है लेकिन बलिया में सुभासपा को सात सीटों पर जीत मिलना अन्य राजनीतिक दलों की विधानसभा चुनाव में गणित विगाड़ सकती है। विधानसभा चुनाव में सुभासपा के साथ एआईएमआईएम के साथ शिवपाल यादव की प्रगतिशील समाजवादी पार्टी लोहिया भी खड़ी होंगी।
बसपा और सपा रहे बराबर तो भाजपा ने भी दी कड़ी टक्कर
विधानसभा चुनावों में आजमगढ़ मंडल में सपा और बसपा के बीच कांटे का संघर्ष देखने को मिलता है। ज्यादा से ज्यादा से ज्यादा सीटों पर सपा और बसपा की कब्जा रहता है। वहीं भाजपा सपा और बसपा के तिलस्म को तोड़ने में अभी तक कामयाब नहीं हो सकी है। लेकिन अगर मंडल के तीनों जनपदों में पंचायत चुनाव की स्थिति देखें तो सपा और बसपा जहां बराबरी पर हैं वहीं भाजपा भी इनसे ज्यादा पीछे नहीं है। जिसके कारण इस बार मंडल में एक त्रिकोणीय संघर्ष होने की संभावना है। लेकिन कांग्रेस की हालत सुभासपा से भी खराब नजर आती है। मंडल के तीनों में कांग्रेस ने जहां चार सीटें जीती हैं वहीं सुभासपा एक ही जनपद में सात सीटें जीतकर उससे काफी आगे निकल गई। बलिया में सुभासपा को सात सीटों पर मिली जीत सभी राजनीतिक दलों के लिए खतरे की घंटी है।
मंडल के तीनों जनपद में सपा और बसपा विगत कई विधानसभा चुनावों से एक छत्र अपना दबदाबा कायम किए हुए है। भाजपा हर बार सपा और बसपा के तिलस्म को तोड़ने का प्रयास करती है लेकिन इसमें उसे अब तक सफलता नहीं मिल सकी है। लेकिन अगर पंचायत चुनावों की स्थिति पर गौर करें तो मंडल की 176 सीटों में सपा और बसपा को 26-26 सीटें, भाजपा को 22 सीटें, कांग्रेस को चार और सुभासपा को सात सीटें मिली हैं। इसके अलावा एआईएमआईएम, राष्ट्रीय उलेमा कौंसिल, अपना दल को एक-एक सीटें मिली हैं।
वहीं आजाद समाज पार्टी के हिस्से दो सीटें आई हैं। इन आंकड़ों पर गौर तो आगामी विधानसभा चुनावों में भाजपा सपा और बसपा को कड़ी टक्कर देने की ओर बढ़ती नजर आ रही है। आजमगढ़ जनपद की 84 सीटों में बसपा को 10, सपा को 12 और भाजपा को 11 सीटों पर जीत मिली। जबकि कांग्रेस, राष्ट्रीयब उलेमा कौंसिल व एआईएमआईएम को एक-एक सीटें मिली। वहीं आजाद समाज पार्टी ने दो सीटों पर कब्जा जमाया। निर्दलियों ने 45 सीटों पर कब्जा जमाया। वहीं मऊ में बसपा सभी राजनीतिक दलों पर भारी है लेकिन निर्दलीय यहां भी सभी राजनीतिक दलों पर भारी हैं। मऊ में बसपा को सात, सपा को दो और भाजपा को दो सीटें मिली हैं।
शेष 23 सीटें निर्दलियों के हाथ लगी। वहीं बलिया जनपद की 58 सीटों में सपा का पलड़ा भारी रहा। सपा ने यहां पर 12 सीटों पर कब्जा जमाया जबकि बसपा और भाजपा को नौ-नौ सीटों से संतोष करना पड़ा। यहां पर तीन सीटें कांग्रेेस को मिली और सात सीटों पर सुभासपा के प्रत्याशियों ने बाजी मारी। 28 सीटें निर्दलियों के खाते में आई। अगर पंचायत चुनाव के कारनामे को भाजपा विधानसभा चुनाव में भी दोहराती है तो सपा और बसपा के लिए आगे की राह बहुत कठिन होगी। सबसे खराब हालत कांग्रेस की हैं। सत्ता गवांने के बाद उत्तर प्रदेश में फिर अपना परचम फहराने की फिराक में पार्टी द्वारा हर संभव कोशिश की जा रही है। लेकिन विगत चार सालों में पार्टी द्वारा की गई मेहनत का फल मिलता नहीं दिख रहा है। क्योंकि तीन जनपदों की 176 सीटों में से पार्टी के हिस्से में मात्र चार सीटें आई। जिसमें आजमगढ़ में एक और बलिया में तीन सीटें मिली। जबकि मऊ में पार्टी का खाता भी नहीं खुल सका।
सुभासपा ने बलिया में सात सीट जीत बजाई खतरे की घंटी
एआईएमआईएम से गठबंधन कर 2022 का विधानसभा चुनाव लड़ने का ऐलान कर चुके सुभासपा के ओमप्रकाश राजभर की पार्टी को आजमगढ़ और मऊ में सफलता नहीं मिल सकी। आजमगढ़ में एआईएमआईएम को एक सीट जरूर मिली है। लेकिन बलिया में सुभासपा को सात सीटों पर जीत मिलना अन्य राजनीतिक दलों का विधानसभा चुनाव में गणित विगाड़ सकता है। क्योंकि विधानसभा चुनाव में सुभासपा के साथ एआईएमआईएम के साथ शिवपाल यादव की प्रगतिशील समाजवादी पार्टी लोहिया भी खड़ी होगी।
शेष 23 सीटें निर्दलियों के हाथ लगी। वहीं बलिया जनपद की 58 सीटों में सपा का पलड़ा भारी रहा। सपा ने यहां पर 12 सीटों पर कब्जा जमाया जबकि बसपा और भाजपा को नौ-नौ सीटों से संतोष करना पड़ा। यहां पर तीन सीटें कांग्रेेस को मिली और सात सीटों पर सुभासपा के प्रत्याशियों ने बाजी मारी। 28 सीटें निर्दलियों के खाते में आई। अगर पंचायत चुनाव के कारनामे को भाजपा विधानसभा चुनाव में भी दोहराती है तो सपा और बसपा के लिए आगे की राह बहुत कठिन होगी। सबसे खराब हालत कांग्रेस की हैं। सत्ता गवांने के बाद उत्तर प्रदेश में फिर अपना परचम फहराने की फिराक में पार्टी द्वारा हर संभव कोशिश की जा रही है। लेकिन विगत चार सालों में पार्टी द्वारा की गई मेहनत का फल मिलता नहीं दिख रहा है। क्योंकि तीन जनपदों की 176 सीटों में से पार्टी के हिस्से में मात्र चार सीटें आई। जिसमें आजमगढ़ में एक और बलिया में तीन सीटें मिली। जबकि मऊ में पार्टी का खाता भी नहीं खुल सका।
सुभासपा ने बलिया में सात सीट जीत बजाई खतरे की घंटी
एआईएमआईएम से गठबंधन कर 2022 का विधानसभा चुनाव लड़ने का ऐलान कर चुके सुभासपा के ओमप्रकाश राजभर की पार्टी को आजमगढ़ और मऊ में सफलता नहीं मिल सकी। आजमगढ़ में एआईएमआईएम को एक सीट जरूर मिली है। लेकिन बलिया में सुभासपा को सात सीटों पर जीत मिलना अन्य राजनीतिक दलों का विधानसभा चुनाव में गणित विगाड़ सकता है। क्योंकि विधानसभा चुनाव में सुभासपा के साथ एआईएमआईएम के साथ शिवपाल यादव की प्रगतिशील समाजवादी पार्टी लोहिया भी खड़ी होगी।