{"_id":"6a7e15cd8e14a54a9a0abdcd","slug":"paddy-crop-starts-producing-panicles-right-after-transplantation-farmers-feel-cheated-azamgarh-news-c-258-1-svns1005-155361-2026-08-14","type":"story","status":"publish","title_hn":"Azamgarh News: रोपाई के बाद ही धान की फसल में बनने लगीं बालियां, ठगा महसूस कर रहे किसान","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Azamgarh News: रोपाई के बाद ही धान की फसल में बनने लगीं बालियां, ठगा महसूस कर रहे किसान
विज्ञापन
डाही गांव में धान की फसल से फूटी बालियां। संवाद
कृषि रक्षा इकाई से धान का बीज लेकर रोपाई करने वाले किसान अब अपने को ठगा महसूस कर रहे हैं। रोपाई के कुछ दिन बाद ही पौधों में बालियां निकलने लगी हैं।
किसानों की शिकायत के बाद कृषि विज्ञान केंद्र लेदौरा के कृषि वैज्ञानिक महेंद्र गौतम खेत में पहुंचकर जांच की। जांच के बाद उन्होंने बीज में ही कमी बताई।
ब्लॉक के डाही निवासी किसान हरेंद्र सिंह और बनरपुरा के किसान चेतू निषाद ने कृषि रक्षा इकाई से सीओ-51 प्रजाति का धान का बीज खरीदकर नर्सरी लगाया। इसके बाद खेत तैयार कर धान की रोपाई की।
किसान हरेंद्र सिंह ने बताया कि जुलाई में धान की रोपाई की, लेकिन पौधे का विकास नहीं हुआ और पूरे खेत में असमय बालियां निकलने लगी हैं। लगभग साढ़े चार बीघा इस प्रजाति का धान लगाया गया है। ब्लॉक से अच्छी पैदावार होने की बात कहकर बीज दिया गया था।
चेतू भी एक बीघा धान की रोपाई किए थे। किसानों ने बताया कि रोपाई के कुछ ही दिनों बाद कल्ले नहीं बने और सभी पौधों में दो-दो, तीन-तीन दाने की बालियां निकल गई हैं। इससे मेहनत और लागत पर पानी फिर गया है। किसान अपने को ठगा महसूस कर रहे हैं। प्रमाणित बताकर बीज देने वाले विभाग के प्रति किसानों में रोष है।
विज्ञापन
00
फोटो संख्या- 31
बीज खरीदने के लिए जब कृषि रक्षा इकाई पर गया तो वहां के प्रभारी ने सीओ-51 को अच्छी प्रजाति का बीज बताकर दिया था। लेकिन रोपाई के कुछ दिन बाद ही इसमें बालियां आने लगीं। इस सीजन की पूरी लागत ही डूब गई। -किसान, हरेंद्र सिंह
00
फोटो संख्या- 32
कृषि विभाग किसानों को प्रमाणित बीज देने का दावा करता है, अब जो किसान इस प्रजाति का बीज ले गए, उनकी मेहनत पर तो पानी फिर गया। किसानों के नुकसान की भरपाई विभाग को करनी चाहिए। -किसान झिनकू सिंह
00
शिकायत के बाद मैं गांव में गया था। बीज में ही कमी थी, तभी ऐसा हुआ है। अब धान का न तो विकास होगा और न ही कल्ले ही निकलेंगे। कोयलसा और अतरौलिया ब्लॉक से भी इस तरह की शिकायत आ चुकी है। -महेंद्र गौतम, कृषि वैज्ञानिक।
00
यह मामला हमारे संज्ञान में है। सीओ-51 अच्छी प्रजाति है, बालियां निकलने से कोई समस्या नहीं है। यह एक हफ्ते के बाद पूरी तरह से कल्ले निकालकर कवर कर लेगा। -सदानंद चौधरी, जिला कृषि अधिकारी।
विज्ञापन
किसानों की शिकायत के बाद कृषि विज्ञान केंद्र लेदौरा के कृषि वैज्ञानिक महेंद्र गौतम खेत में पहुंचकर जांच की। जांच के बाद उन्होंने बीज में ही कमी बताई।
ब्लॉक के डाही निवासी किसान हरेंद्र सिंह और बनरपुरा के किसान चेतू निषाद ने कृषि रक्षा इकाई से सीओ-51 प्रजाति का धान का बीज खरीदकर नर्सरी लगाया। इसके बाद खेत तैयार कर धान की रोपाई की।
किसान हरेंद्र सिंह ने बताया कि जुलाई में धान की रोपाई की, लेकिन पौधे का विकास नहीं हुआ और पूरे खेत में असमय बालियां निकलने लगी हैं। लगभग साढ़े चार बीघा इस प्रजाति का धान लगाया गया है। ब्लॉक से अच्छी पैदावार होने की बात कहकर बीज दिया गया था।
विज्ञापन
चेतू भी एक बीघा धान की रोपाई किए थे। किसानों ने बताया कि रोपाई के कुछ ही दिनों बाद कल्ले नहीं बने और सभी पौधों में दो-दो, तीन-तीन दाने की बालियां निकल गई हैं। इससे मेहनत और लागत पर पानी फिर गया है। किसान अपने को ठगा महसूस कर रहे हैं। प्रमाणित बताकर बीज देने वाले विभाग के प्रति किसानों में रोष है।
विज्ञापन
00
फोटो संख्या- 31
बीज खरीदने के लिए जब कृषि रक्षा इकाई पर गया तो वहां के प्रभारी ने सीओ-51 को अच्छी प्रजाति का बीज बताकर दिया था। लेकिन रोपाई के कुछ दिन बाद ही इसमें बालियां आने लगीं। इस सीजन की पूरी लागत ही डूब गई। -किसान, हरेंद्र सिंह
00
फोटो संख्या- 32
कृषि विभाग किसानों को प्रमाणित बीज देने का दावा करता है, अब जो किसान इस प्रजाति का बीज ले गए, उनकी मेहनत पर तो पानी फिर गया। किसानों के नुकसान की भरपाई विभाग को करनी चाहिए। -किसान झिनकू सिंह
00
शिकायत के बाद मैं गांव में गया था। बीज में ही कमी थी, तभी ऐसा हुआ है। अब धान का न तो विकास होगा और न ही कल्ले ही निकलेंगे। कोयलसा और अतरौलिया ब्लॉक से भी इस तरह की शिकायत आ चुकी है। -महेंद्र गौतम, कृषि वैज्ञानिक।
00
यह मामला हमारे संज्ञान में है। सीओ-51 अच्छी प्रजाति है, बालियां निकलने से कोई समस्या नहीं है। यह एक हफ्ते के बाद पूरी तरह से कल्ले निकालकर कवर कर लेगा। -सदानंद चौधरी, जिला कृषि अधिकारी।