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ओवरलोड नावों में सफर करने को मजबूर ग्रामीण
ब्यूरो,अमर उजाला, आजमगढ़
Updated Sat, 06 Aug 2016 12:06 AM IST
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खरैलिया ढाला पर अपने गंतव्य को जाने के लिए नाव पर चढ़ने के लिए होड़।
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सगड़ी तहसील के देवरांचल में घाघरा स्थिर होने के बाद भी तीन दिनों से खतरा बिंदु के ऊपर बह रही है। रास्तों पर बाढ़ का पानी अभी तक नहीं कम हुआ है। प्रशासन ने ग्रामीणों के आवागमन के लिए सात नावें चलाई हैं लेकिन वह नाकाफी साबित हो रही है। इन नावों पर लोग ओवरलोड होकर सफर करने को विवश हैं।
जनपद के उत्तरी सीमा से होकर गुजरने वाली घाघरा का जलस्तर विगत तीन दिनों से स्थिर है। जलस्तर स्थिर होने से कटान तेज हो गया है। शुक्रवार को घाघरा ने देवारा खास राजा के मुराली का पुरा में एक मड़ई को अपने आगोश में ले लिया। वहीं नदी तेजी से कृषि योग्य भूमि को काटती जा रही है जिसे देख ग्रामीणों की धड़कनें बढ़ गई है। तहसीलदार सगड़ी शिवधर चौरसिया की मानें तो तहसील क्षेत्र के 11 गांवों के 7322 लोग प्रभावित हैं। जबकि प्रशासन की तरफ से सात नाव चार गांवों में चलाई जा रही हैं। हालात यह हैं कि इन नावों पर लोग ओवरलोड होकर सफर करने को विवश हैं।
ग्रामीणों द्वारा प्रशासन से और नाव चलाने की मांग की जा रही है लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही है। वहीं बाढ़ से प्रभावित ग्रामीणों के सामने सबसे बड़ी समस्या मिट्टी के तेल की है जो उन्हें नहीं मिल पा रहा है। सोनौरा, शाहडीह, अभन पट्टी, मसर्की, चक्की, बांका, बूढ़नपट्टी, देवारा खास राजा, झनझनपुर, मगर्वी आदि गांवों के रामलखन, रामदरश, रामसमुझ, हरिशंकर, भुंवर, रामसमुझ आदि ने बताया कि तेल मिलता भी है तो सिर्फ एक लीटर जो 20 रुपये की दर से उन्हें मिल रहा है।
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बाढ़ पीड़ितों से भी कोटेदार अधिक दाम ले रहे हैं। हरैया के पूर्ति निरीक्षक बिरेंदर यादव ने बताया कि बाढ़ पीड़ितों के लिए तेल सुरक्षित रखा गया है। शुक्रवार को नदी का जलस्तर बदरहुंआ नाले पर 71.99 मीटर और डिघिया नाले पर 71.08 मीटर पर बनी हुई है। नदी 16 जुलाई से डिघिया नाले पर खतरा बिंदु 70.40 मीटर और बदरहुंआ नाले पर 19 जुलाई से खतरा बिंदु 71.68 मीटर से ऊपर बह रही है।
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जनपद के उत्तरी सीमा से होकर गुजरने वाली घाघरा का जलस्तर विगत तीन दिनों से स्थिर है। जलस्तर स्थिर होने से कटान तेज हो गया है। शुक्रवार को घाघरा ने देवारा खास राजा के मुराली का पुरा में एक मड़ई को अपने आगोश में ले लिया। वहीं नदी तेजी से कृषि योग्य भूमि को काटती जा रही है जिसे देख ग्रामीणों की धड़कनें बढ़ गई है। तहसीलदार सगड़ी शिवधर चौरसिया की मानें तो तहसील क्षेत्र के 11 गांवों के 7322 लोग प्रभावित हैं। जबकि प्रशासन की तरफ से सात नाव चार गांवों में चलाई जा रही हैं। हालात यह हैं कि इन नावों पर लोग ओवरलोड होकर सफर करने को विवश हैं।
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ग्रामीणों द्वारा प्रशासन से और नाव चलाने की मांग की जा रही है लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही है। वहीं बाढ़ से प्रभावित ग्रामीणों के सामने सबसे बड़ी समस्या मिट्टी के तेल की है जो उन्हें नहीं मिल पा रहा है। सोनौरा, शाहडीह, अभन पट्टी, मसर्की, चक्की, बांका, बूढ़नपट्टी, देवारा खास राजा, झनझनपुर, मगर्वी आदि गांवों के रामलखन, रामदरश, रामसमुझ, हरिशंकर, भुंवर, रामसमुझ आदि ने बताया कि तेल मिलता भी है तो सिर्फ एक लीटर जो 20 रुपये की दर से उन्हें मिल रहा है।
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बाढ़ पीड़ितों से भी कोटेदार अधिक दाम ले रहे हैं। हरैया के पूर्ति निरीक्षक बिरेंदर यादव ने बताया कि बाढ़ पीड़ितों के लिए तेल सुरक्षित रखा गया है। शुक्रवार को नदी का जलस्तर बदरहुंआ नाले पर 71.99 मीटर और डिघिया नाले पर 71.08 मीटर पर बनी हुई है। नदी 16 जुलाई से डिघिया नाले पर खतरा बिंदु 70.40 मीटर और बदरहुंआ नाले पर 19 जुलाई से खतरा बिंदु 71.68 मीटर से ऊपर बह रही है।