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70 हजार बच्चों पर मात्र एक डॉक्टर
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आजमगढ़। कोरोना संक्रमण के तीसरी लहर की चर्चा आम हो रही है। तीसरी लहर बच्चों के लिए खतरनाक बताई जा रही है। वहीं जिले में एक बाल रोग विशेषज्ञ डॉक्टर पर 70445 बच्चों के इलाज की जिम्मेदारी है। ऐसे में स्वास्थ्य महकमा कैसे कोरोना के तीसरी लहर से मुकाबला करेगा, यह समझ से परे है। वहीं पीआईसीयू यूनिट की बात की जाए तो मात्र सात सरकारी अस्पतालों में 250 बेड की व्यवस्था ही उपलब्ध है।
2011 की जनगणना के अनुसार जिले में 0 से 14 साल तक के बच्चों की कुल संख्या 1690679 है। जिसमें शून्य से चार साल के 453250 बच्चे, पांच से नौ साल के 610897 बच्चे तथा 10 से 14 साल के 624528 बच्चे हैं। इन बच्चों पर कोरोना संक्रमण के तीसरी लहर का खतरा मंडरा रहा है, लेकिन संक्रमण से बचाने के जिले में मौजूद संसाधनों का काफी बुरा हाल है। स्वास्थ्य महकमे में बच्चों के डॉक्टरों की जो संख्या है उसके अनुसार तो एक डॉक्टर के भरोसे 70445 बच्चे हैं। जिले में सरकारी बाल रोग विशेषज्ञों की कुल संख्या मात्र 24 है। जिसमें पांच जिला अस्पताल, छह जिला महिला अस्पताल, पांच राजकीय मेडिकल कॉलेज, तीन 100 शैय्या अतरौलिया अस्पताल व एक-एक सीएचसी मुबारकपुर, बिलरियागंज, बरदह, फूलपुर व मार्टीनगंज पर तैनात है। ऐसे में निश्चित तौर पर यह सोचने वाली बात है कि यदि कही कोरोना की तीसरी लहर आ गई तो स्वास्थ्य महकमा मासूमों का इलाज कैसे करेगा। पीआईसीयू यूनिट की बात की जाए तो यह भी अब तक सात सरकारी अस्पतालों में ही शुरू किया जा सका है। जिसमें मेडिकल कॉलेज में लगभग 100 बेड, 100 शैय्या अतरौलिया में 40 बेड, जिला अस्पताल, सीएचसी कोयलसा, लाटघाट, लालगंज व 100 शैय्या तरवां में 12-12 बेड की व्यवस्था की गई है। प्राइवेट बाल रोग विशेषज्ञों की बात की जाए तो इनकी की जिले में संख्या डेढ़ दर्जन भर से अधिक नहीं है। तीसरी लहर आने पर बच्चों को बचाना जिले में काफी टेढ़ी खीर ही साबित होगी।
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जिले में बाल रोग विशेषज्ञों की संख्या निश्चित तौर पर कम है। फिर भी महकमा पूरी तरह से तीसरी लहर को लेकर अलर्ट पर है। लगभग ढाई सौ पीआईसीयू बेड की व्यवस्था हम कर चुके है। जरूरत पड़ने पर इसकी संख्या और बढ़ाई भी जा सकती है। तीसरी लहर से बच्चों को बचाने की पूरी तैयारी है। - डॉ. एके मिश्रा, सीएमओ, आजमगढ़।
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2011 की जनगणना के अनुसार जिले में 0 से 14 साल तक के बच्चों की कुल संख्या 1690679 है। जिसमें शून्य से चार साल के 453250 बच्चे, पांच से नौ साल के 610897 बच्चे तथा 10 से 14 साल के 624528 बच्चे हैं। इन बच्चों पर कोरोना संक्रमण के तीसरी लहर का खतरा मंडरा रहा है, लेकिन संक्रमण से बचाने के जिले में मौजूद संसाधनों का काफी बुरा हाल है। स्वास्थ्य महकमे में बच्चों के डॉक्टरों की जो संख्या है उसके अनुसार तो एक डॉक्टर के भरोसे 70445 बच्चे हैं। जिले में सरकारी बाल रोग विशेषज्ञों की कुल संख्या मात्र 24 है। जिसमें पांच जिला अस्पताल, छह जिला महिला अस्पताल, पांच राजकीय मेडिकल कॉलेज, तीन 100 शैय्या अतरौलिया अस्पताल व एक-एक सीएचसी मुबारकपुर, बिलरियागंज, बरदह, फूलपुर व मार्टीनगंज पर तैनात है। ऐसे में निश्चित तौर पर यह सोचने वाली बात है कि यदि कही कोरोना की तीसरी लहर आ गई तो स्वास्थ्य महकमा मासूमों का इलाज कैसे करेगा। पीआईसीयू यूनिट की बात की जाए तो यह भी अब तक सात सरकारी अस्पतालों में ही शुरू किया जा सका है। जिसमें मेडिकल कॉलेज में लगभग 100 बेड, 100 शैय्या अतरौलिया में 40 बेड, जिला अस्पताल, सीएचसी कोयलसा, लाटघाट, लालगंज व 100 शैय्या तरवां में 12-12 बेड की व्यवस्था की गई है। प्राइवेट बाल रोग विशेषज्ञों की बात की जाए तो इनकी की जिले में संख्या डेढ़ दर्जन भर से अधिक नहीं है। तीसरी लहर आने पर बच्चों को बचाना जिले में काफी टेढ़ी खीर ही साबित होगी।
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जिले में बाल रोग विशेषज्ञों की संख्या निश्चित तौर पर कम है। फिर भी महकमा पूरी तरह से तीसरी लहर को लेकर अलर्ट पर है। लगभग ढाई सौ पीआईसीयू बेड की व्यवस्था हम कर चुके है। जरूरत पड़ने पर इसकी संख्या और बढ़ाई भी जा सकती है। तीसरी लहर से बच्चों को बचाने की पूरी तैयारी है। - डॉ. एके मिश्रा, सीएमओ, आजमगढ़।
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