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फिर से संचालित होगा पोषण पुनर्वास केंद्र, डीजी ने दिए निर्देश
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आजमगढ़। परिवार कल्याण के महानिदेशक ने प्रदेश के समस्त मुख्य चिकित्साधिकारियों को पत्र जारी कर सैम (अतिकुपोषित) बच्चों के प्रबंधन और पोषण पुनर्वास केंद्र (एनआरसी) को एक बार फिर से संचालन के लिए निर्देश दिए हैं। पत्र में कहा कि प्रदेश में कुपोषण एक गंभीर समस्या है। अति कुपोषित (सैम) बच्चों में बाल्यावस्था की बीमारियों और उससे होने वाली मृत्यु का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। देश कोविड-19 से प्रभावित है। सैम बच्चों में सामान्य बच्चों की अपेक्षा रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होती है। इसलिए उनमें कोविड-19 से ग्रसित होने का खतरा अधिक होता है। इन बातों को ध्यान में रखते हुए एनआरसी का सुचारु रूप से संचालन जरूरी है।
निर्देशित किया कि एनआरसी की सेवाओं की निरंतरता को इस समय भी बनाए रखना जरूरी है। जब तक कोविड-19 का जोखिम है समूह परामर्श, खेल चिकित्सा, खाना पकाने का प्रदर्शन आदि गतिविधियां निलंबित रखी जाएं। इनके स्थान पर उनके बेड के पास ही उन्हें परामर्श मिले। एनआरसी में भर्ती बच्चों को खांसी, जुकाम या सांस लेने में दिक्कत की जांच के लिए दिन में कम से कम दो बार टेस्ट किया जाए। एनआरसी में रहने के दौरान सैम बच्चों के लिए सैम प्रोटोकॉल का पालन किया जाए। यदि एनआरसी में भर्ती सैम बच्चा पांच ग्राम, प्रति किग्रा, प्रतिदिन की दर से अगले तीन दिनों तक लगातार बढ़ना शुरू हो गया है तो उसकी माता या देखभाल करने वाले व्यक्ति को दवा को छोड़ कर पौष्टिक एवं सुरक्षित भोजन तैयार करने, हाथ धुलने, खेल थेरेपी के साथ-साथ जरूरी परामर्श देकर उसे डिस्चार्ज किया जा सकता है। उसके बाद दूरभाष से उसकी देखभाल की जाए। चिकित्सकीय जटिलताओं वाले बच्चों को आमने-सामने देखभाल के लिए बुलाया जाए। टेक-होम राशन के गृह आधारित वितरण को प्राथमिकता दी जाए। एनआरसी से डिस्चार्ज सैम बच्चों की सूची आंगनबाड़ी केंद्रों के साथ साझा की जाए। समुदाय में चिह्नित सभी बच्चों की आशा, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता देखभाल करेंगी। उनकी देखभाल के लिए प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र अथवा पास के हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर को संदर्भित किया जाए।
कोविड-19 से लड़ने को एनआरसी पूरी तरह से तैयार
आजमगढ़। एनआरसी प्रभारी डॉ. कासिफ असरार का कहना कि एनआरसी के कर्मचारियों को कोविड-19 से बचाव करने के लिए प्रशिक्षण दिया गया है। उन्हें बताया गया कि कैसे वे काम के दौरान सोशल डिस्टेन्सिंग बनाए रखेंगे। साफ-सफाई तथा खाने की गुणवत्ता बनाए रखेंगे। जब तक कोविड-19 का जोखिम है समूह परामर्श, खेल चिकित्सा, खाना पकाने का प्रदर्शन आदि गतिविधियां निलंबित रखी जाएंगी। इनके स्थान पर उनके बेड के पास ही उन्हें परामर्श मिलेगा।
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निर्देशित किया कि एनआरसी की सेवाओं की निरंतरता को इस समय भी बनाए रखना जरूरी है। जब तक कोविड-19 का जोखिम है समूह परामर्श, खेल चिकित्सा, खाना पकाने का प्रदर्शन आदि गतिविधियां निलंबित रखी जाएं। इनके स्थान पर उनके बेड के पास ही उन्हें परामर्श मिले। एनआरसी में भर्ती बच्चों को खांसी, जुकाम या सांस लेने में दिक्कत की जांच के लिए दिन में कम से कम दो बार टेस्ट किया जाए। एनआरसी में रहने के दौरान सैम बच्चों के लिए सैम प्रोटोकॉल का पालन किया जाए। यदि एनआरसी में भर्ती सैम बच्चा पांच ग्राम, प्रति किग्रा, प्रतिदिन की दर से अगले तीन दिनों तक लगातार बढ़ना शुरू हो गया है तो उसकी माता या देखभाल करने वाले व्यक्ति को दवा को छोड़ कर पौष्टिक एवं सुरक्षित भोजन तैयार करने, हाथ धुलने, खेल थेरेपी के साथ-साथ जरूरी परामर्श देकर उसे डिस्चार्ज किया जा सकता है। उसके बाद दूरभाष से उसकी देखभाल की जाए। चिकित्सकीय जटिलताओं वाले बच्चों को आमने-सामने देखभाल के लिए बुलाया जाए। टेक-होम राशन के गृह आधारित वितरण को प्राथमिकता दी जाए। एनआरसी से डिस्चार्ज सैम बच्चों की सूची आंगनबाड़ी केंद्रों के साथ साझा की जाए। समुदाय में चिह्नित सभी बच्चों की आशा, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता देखभाल करेंगी। उनकी देखभाल के लिए प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र अथवा पास के हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर को संदर्भित किया जाए।
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कोविड-19 से लड़ने को एनआरसी पूरी तरह से तैयार
आजमगढ़। एनआरसी प्रभारी डॉ. कासिफ असरार का कहना कि एनआरसी के कर्मचारियों को कोविड-19 से बचाव करने के लिए प्रशिक्षण दिया गया है। उन्हें बताया गया कि कैसे वे काम के दौरान सोशल डिस्टेन्सिंग बनाए रखेंगे। साफ-सफाई तथा खाने की गुणवत्ता बनाए रखेंगे। जब तक कोविड-19 का जोखिम है समूह परामर्श, खेल चिकित्सा, खाना पकाने का प्रदर्शन आदि गतिविधियां निलंबित रखी जाएंगी। इनके स्थान पर उनके बेड के पास ही उन्हें परामर्श मिलेगा।
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