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अब लैंडयूज परिवर्तन के मुद्दे पर फंसा पेच
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आजमगढ़। राज्य विश्वविद्यालय के निर्माण में भू उपयोग परिवर्तन का पेच फंस गया है। यशपालपुर-आजमबांध में चारागाह की जमीन का भू परिवर्तन करने के लिए शासन ने जिलाधिकारी को अधिकृत कर दिया है। दो गांवों का मामला होने के कारण जिलाधिकारी के लिए भी भू उपयोग बदलना आसान नहीं लग रहा है।
पहले प्रशासन ने सदर तहसील के मोहब्बतपुर में जमीन चिह्नित की गई थी। लो लैंड होने के कारण यहां निर्माण में अधिक लागत आ रही थी, जिसको देखते हुए जहानागंज विकास खंड के यशपालपुर-आजमबांध में जमीन का प्रस्ताव शासन को भेजा गया। शासन स्तर से इस जमीन को हरी झंडी दे दी। यह जमीन चारागाह की है। बिना भू उपयोग बदले इसमें विश्वविद्यालय नहीं बनाया जा सकता है। जिला प्रशासन ने मोहब्बतपुर की जमीन को चारागाह और यशपालपुर आजमबांध की जमीन को विश्वविद्यालय के नाम करने का प्रस्ताव भेजा। अब शासन ने डीएम को ही जमीन का लैंडयूज परिवर्तित करने के लिए अधिकृत कर दिया है।
शासन ने भले ही डीएम को जमीन का लैंडयूज परिवर्तन करने के लिए अधिकृत किया हो लेकिन दोनों भूखंडों की दूरी कई किलोमीटर होने के कारण उनमें एक को चारागाह और दूसरे को आवासीय बनाना आसान नहीं है। सीआरओ हरिशंकर ने बताया कि शासन ने भले ही डीएम को जमीन का लैंडयूज परिवर्तित करने के लिए अधिकृत किया है लेकिन दोनों जमीनों में काफी दूरी है। दोनों जमीन दो ग्राम पंचायतों की हैं। ऐसे में लैंड यूज बदलन आसान नहीं है। इसके लिए शासन को पत्र भेजा जा रहा है।
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पहले प्रशासन ने सदर तहसील के मोहब्बतपुर में जमीन चिह्नित की गई थी। लो लैंड होने के कारण यहां निर्माण में अधिक लागत आ रही थी, जिसको देखते हुए जहानागंज विकास खंड के यशपालपुर-आजमबांध में जमीन का प्रस्ताव शासन को भेजा गया। शासन स्तर से इस जमीन को हरी झंडी दे दी। यह जमीन चारागाह की है। बिना भू उपयोग बदले इसमें विश्वविद्यालय नहीं बनाया जा सकता है। जिला प्रशासन ने मोहब्बतपुर की जमीन को चारागाह और यशपालपुर आजमबांध की जमीन को विश्वविद्यालय के नाम करने का प्रस्ताव भेजा। अब शासन ने डीएम को ही जमीन का लैंडयूज परिवर्तित करने के लिए अधिकृत कर दिया है।
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शासन ने भले ही डीएम को जमीन का लैंडयूज परिवर्तन करने के लिए अधिकृत किया हो लेकिन दोनों भूखंडों की दूरी कई किलोमीटर होने के कारण उनमें एक को चारागाह और दूसरे को आवासीय बनाना आसान नहीं है। सीआरओ हरिशंकर ने बताया कि शासन ने भले ही डीएम को जमीन का लैंडयूज परिवर्तित करने के लिए अधिकृत किया है लेकिन दोनों जमीनों में काफी दूरी है। दोनों जमीन दो ग्राम पंचायतों की हैं। ऐसे में लैंड यूज बदलन आसान नहीं है। इसके लिए शासन को पत्र भेजा जा रहा है।
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