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न किताबें और न यूनिफार्म और खुल गए स्कूल
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आजमगढ़। जिले के परिषदीय स्कूल तो खोल दिए गए, लेकिन बच्चों के लिए न तो किताबें भेजी गई हैं और न ही यूनिफार्म। ऐसी परिस्थिति में बच्चों की पढ़ाई कैसे होगी ? बच्चे बिना यूनिफार्म व किताबों के ही स्कूल जा रहे हैं।
जिले के परिषदीय स्कूलों में करीब चार लाख छात्र-छात्रा पंजीकृत हैं। सभी को निशुल्क यूनिफॉर्म के अलावा जूते, मौजे, बैग निशुल्क उपलब्ध कराने का प्रावधान है। लेकिन अभी तक इन व्यवस्थाओं के लिए विभाग को शासन से बजट नहीं मिला है। इसके उलट आधी अधूरी तैयारियों के बीच एक सितंबर से सभी परिषदीय स्कूल खोल दिए गए हैं। फिलहाल लगभग 95 फीसद किताबें जिले को मिल गई हैं, लेकिन इन किताबों को बच्चों में वितरण नहीं किया जा सका है। ऐसे में बिना किताब, बैग, यूनिफॉर्म ही बच्चे स्कूल जाने के लिए मजबूर हैं। अव्यवस्था के बीच बहुत से बच्चे स्कूल जाने तक से कतरा रहे हैं। बीएसए अतुल सिंह का कहना है कि यूनिफॉर्म, स्कूल बैग, जूते, मौजे वितरण के लिए अभी शासन से बजट नहीं मिला है। जल्द बजट मिलने की उम्मीद है। जो किताबें उपलब्ध हैं, फिलहाल उन्हीं को बच्चों तक पहुंचाकर बच्चों को बेहतर शिक्षा देने का प्रयास किया जा रहा है।
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जिले के परिषदीय स्कूलों में करीब चार लाख छात्र-छात्रा पंजीकृत हैं। सभी को निशुल्क यूनिफॉर्म के अलावा जूते, मौजे, बैग निशुल्क उपलब्ध कराने का प्रावधान है। लेकिन अभी तक इन व्यवस्थाओं के लिए विभाग को शासन से बजट नहीं मिला है। इसके उलट आधी अधूरी तैयारियों के बीच एक सितंबर से सभी परिषदीय स्कूल खोल दिए गए हैं। फिलहाल लगभग 95 फीसद किताबें जिले को मिल गई हैं, लेकिन इन किताबों को बच्चों में वितरण नहीं किया जा सका है। ऐसे में बिना किताब, बैग, यूनिफॉर्म ही बच्चे स्कूल जाने के लिए मजबूर हैं। अव्यवस्था के बीच बहुत से बच्चे स्कूल जाने तक से कतरा रहे हैं। बीएसए अतुल सिंह का कहना है कि यूनिफॉर्म, स्कूल बैग, जूते, मौजे वितरण के लिए अभी शासन से बजट नहीं मिला है। जल्द बजट मिलने की उम्मीद है। जो किताबें उपलब्ध हैं, फिलहाल उन्हीं को बच्चों तक पहुंचाकर बच्चों को बेहतर शिक्षा देने का प्रयास किया जा रहा है।
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