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निठल्ले की डायरी में झलके जीवन के विविध पक्ष
ब्यूरो, अमर उजाला, आजमगढ़
Updated Tue, 23 Dec 2014 12:18 AM IST
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में आयोेजित आरंगम-2014 में सोमवार की तीसरी शाम लोकनृत्य और ‘निठल्ले की
डायरी’ नाटक के नाम रही।
इसमें कलाकारों ने अपने भावपूर्ण अभिनय से लोगों को मंत्रमुग्ध कर दिया। यह नाटक स्व. ‘हरिशंकर परसाई’ द्वारा लिखित कहानी पर आधारित था।
जिसमें उन्होंने जीवन और समाज के हर पक्ष को अपना विषय बनाया। नाटक के दो चरित्र कक्का और निठल्ला हैं। निठल्ले कि डायरी में एक वृहद दुनिया के वे द्वार खुले हैं जिसकी धूल झाड़ने और जिनकी तरफ देखने की जरूरत नहीं समझी जाती।
कक्का परिवर्तनों की धमा चौकड़ी में अभी-अभी हमारे बीच से खोया आदमी है जिसकी परछाई हमें बेचैन करती है। वहीं दूसरी ओर निठल्ला जो परेशान व्यक्ति है, लोगों की मदद करना चाहता है और करता भी है।
लेकिन लोग उसे पागल और बुद्धू कहकर नीचा दिखाते रहते हैं। इस नाटक की प्रस्तुति विवेचना रंगमंडल जबलपुर द्वारा की गई जिसके निदेशकअरुण पांडेय रहे।
आरंगम के तीसरे दिन लोकनृत्य की प्रस्तुति हुई जिसमें चिल्ड्रेन गार्डेन का मराठी नृत्य, तपस्या क्रिएटिव स्कूल का लोक नृत्य, रिद्म डांस एकेडमी का क्लासिकल नृत्य शामिल रहा।
क्लासिकल नृत्य की आखिरी प्रस्तुति एक छोटी बच्ची ने दी। इसके साथ ही कव्वाली का भी आयोजन किया गया जिसे दर्शकों ने खूब सराहा। इस मौके पर नित्यानंद मिश्र, डा. एके सिंह, प्रवीण सिंह, संजय श्रीवास्तव, मनीष तिवारी, मदन मोहन पांडेय, प्रवीण दीक्षित, कुलभूषण सिंह आदि मौजूद रहे।
इसमें कलाकारों ने अपने भावपूर्ण अभिनय से लोगों को मंत्रमुग्ध कर दिया। यह नाटक स्व. ‘हरिशंकर परसाई’ द्वारा लिखित कहानी पर आधारित था।
जिसमें उन्होंने जीवन और समाज के हर पक्ष को अपना विषय बनाया। नाटक के दो चरित्र कक्का और निठल्ला हैं। निठल्ले कि डायरी में एक वृहद दुनिया के वे द्वार खुले हैं जिसकी धूल झाड़ने और जिनकी तरफ देखने की जरूरत नहीं समझी जाती।
कक्का परिवर्तनों की धमा चौकड़ी में अभी-अभी हमारे बीच से खोया आदमी है जिसकी परछाई हमें बेचैन करती है। वहीं दूसरी ओर निठल्ला जो परेशान व्यक्ति है, लोगों की मदद करना चाहता है और करता भी है।
लेकिन लोग उसे पागल और बुद्धू कहकर नीचा दिखाते रहते हैं। इस नाटक की प्रस्तुति विवेचना रंगमंडल जबलपुर द्वारा की गई जिसके निदेशकअरुण पांडेय रहे।
आरंगम के तीसरे दिन लोकनृत्य की प्रस्तुति हुई जिसमें चिल्ड्रेन गार्डेन का मराठी नृत्य, तपस्या क्रिएटिव स्कूल का लोक नृत्य, रिद्म डांस एकेडमी का क्लासिकल नृत्य शामिल रहा।
क्लासिकल नृत्य की आखिरी प्रस्तुति एक छोटी बच्ची ने दी। इसके साथ ही कव्वाली का भी आयोजन किया गया जिसे दर्शकों ने खूब सराहा। इस मौके पर नित्यानंद मिश्र, डा. एके सिंह, प्रवीण सिंह, संजय श्रीवास्तव, मनीष तिवारी, मदन मोहन पांडेय, प्रवीण दीक्षित, कुलभूषण सिंह आदि मौजूद रहे।