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मुबारकपुर दंगा : अली अकबर हत्याकांड में 27 साल बाद फैसला, तीन सगे भाइयों समेत 12 दोषी करार

Sat, 14 Feb 2026 12:59 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Sat, 14 Feb 2026 12:59 AM IST
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Mubarakpur riots: Verdict in Ali Akbar murder case after 27 years, 12 people including three brothers found guilty
17 अली अकबर की फाइल फोटो। संवाद
मुबारकपुर दंगा : अली अकबर हत्याकांड में 27 साल बाद फैसला, तीन सगे भाइयों समेत 12 दोषी करार
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आजमगढ़। मुबारकपुर क्षेत्र में शिया-सुन्नी दंगे के दौरान हुए अली अकबर हत्याकांड में 27 साल बाद अदालत ने फैसला सुनाया है। जिला एवं सत्र न्यायाधीश जय प्रकाश पांडेय ने शुक्रवार को इस घटनाक्रम में 12 लोगों को दोषी करार दिया। दोषियों में तीन सगे भाई हैं। सुनवाई के दौरान चार आरोपियों की मौत हो चुकी है। अदालत ने सजा के बिंदु पर सुनवाई के लिए 17 फरवरी की तिथि तय की है।

मुबारकपुर थाना क्षेत्र के गांव पूरा सोफी में 10 फीट जमीन के लिए शिया और सुन्नी समुदाय के लोगों में विवाद चल रहा था। 27 अप्रैल 1999 को शिया समुदाय के लोग मोहर्रम का जुलूस निकाल रहे थे। इसी दौरान दूसरे पक्ष की ओर से जुलूस रोकने पर विवाद हो गया। पथराव भी हुआ था। पुलिस-प्रशासन ने किसी तरह हालात काबू किए थे। शाम को पूरा ख्वाजा के अली अकबर ताजिया दफन करने हैदराबाद स्थित शाह के पंजे पर गए थे। इसके बाद वह लापता हो गए थे। अली अकबर के पुत्र जैगम ने 28 अप्रैल को थाने में गुमशुदगी दर्ज कराई थी। 30 अप्रैल को अली अकबर की सिर कटी लाश राजा भाट के पोखरे में मिली थी लेकिन सिर आज तक नहीं मिल सका। 30 अप्रैल को ही भतीजे नासिर हुसैन ने मुबारकपुर थाने में हत्या की प्राथमिकी दर्ज कराई थी। पुलिस की विवेचना में सामने आया कि मोहर्रम के जुलूस से लौटते समय अली अकबर की पीटकर हत्या कर दी गई थी। इस मामले में पुलिस ने 16 लोगों के खिलाफ चार्जशीट कोर्ट में दाखिल की थी। सुनवाई के दौरान हाजी मोहम्मद सुलेमान, नजीबुल्लाह, हमीदुल्लाह उर्फ झीनक और हाजी अब्दुल खालिक की मौत हो चुकी है। अभियोजन पक्ष की ओर से डीजीसी फौजदारी एवं एडीजीसी ने 9 गवाहों की न्यायालय में गवाही कराई। अदालत ने हुसैन अहमद निवासी हैदराबाद, मोहम्मद अयूब फैजी, फहीम अख्तर, असरार अहमद, मोहम्मद याकूब सभी निवासी दुल्हनपूरा, अली जहीर, इरशाद निवासी पूरा सोफी, मोहम्मद असद, अफजाल, अलाउद्दीन, दिलशाद व वसीम निवासी हैदराबाद को हत्या का दोषी करार दिया। इनमें मोहम्मद अयूब फैजी, फहीम अख्तर और मोहम्मद याकूब सगे भाई हैं
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मुबारकपुर में तीन बार भड़का था दंगा, 13 से अधिक लोगों की गई थी जान-अली अकबर हत्याकांड के बाद हालात बेकाबू हो गए थे। मुबारकपुर में दंगा भड़क गया था। पुलिस-प्रशासन की सख्ती के कारण कुछ समय के लिए माहौल शांत हो गया था, लेकिन वर्ष 2000 में फिर दोनों समुदायों के बीच तनाव ने हिंसक रूप ले लिया। 25 जनवरी 2000 को पूरा दुल्हन और शाह मोहम्मदपुर के बीच लूटपाट की घटना हुई थी। वाराणसी से लौट रहे सुन्नी समुदाय के लोगों पर हमला किया गया था। इस दंगे में तीन लोगों की हत्या कर दी गई थी। पुलिस-प्रशासन को कर्फ्यू लगाना पड़ा। इसके बाद 5 नवंबर 2000 को तीसरी बार हिंसा भड़क उठी। शिया समुदाय की दुकानों पर बम से हमला किए जाने की घटनाएं सामने आईं। हिंसा में 10 से ज्यादा लोगों की मौत हुई थी। स्थिति नियंत्रित करने के लिए कई महीने तक मुबारकपुर क्षेत्र में कर्फ्यू रहा था।

17 अली अकबर की फाइल फोटो। संवाद

17 अली अकबर की फाइल फोटो। संवाद

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