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Azamgarh News: केंद्रीय वित्त का एक भी रुपये खर्च नहीं कर पाया मऊ का दोहरीघाट
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आजमगढ़। स्वच्छता, पेयजल और निर्माण जैसे बुनियादी विकास कार्यों के लिए केंद्र सरकार की ओर से दी जाने वाली केंद्रीय वित्त की धनराशि का समुचित उपयोग क्षेत्र पंचायतें नहीं कर पा रही हैं। लापरवाही और उदासीनता का सीधा असर ग्रामीण विकास पर पड़ रहा है। हालात इतने खराब हैं कि मऊ जिले की दोहरीघाट क्षेत्र पंचायत चालू वित्तीय वर्ष में केंद्रीय वित्त का एक भी रुपये खर्च नहीं कर सकी है, जबकि बलिया जिले की हनुमानगंज क्षेत्र पंचायत में महज 0.75 फीसदी धनराशि ही खर्च हो पाई है।
केंद्रीय वित्त से पंचायतों में नाली, खड़ंजा, सड़क, सामुदायिक शौचालय, पेयजल व्यवस्था और स्वच्छता से जुड़े कार्य कराए जाने हैं। इसके बावजूद जिम्मेदार अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों की निष्क्रियता के कारण योजनाएं फाइलों में ही सिमटकर रह गई हैं। मऊ की दोहरीघाट क्षेत्र पंचायत में पूरे वर्ष किसी भी मद में कोई कार्य स्वीकृत या पूर्ण नहीं कराया गया, जिससे ग्रामीणों को भारी असुविधा का सामना करना पड़ रहा है।
वहीं, बलिया जिले की हनुमानगंज क्षेत्र पंचायत की स्थिति भी बेहद चिंताजनक बनी हुई है। यहां आवंटित कुल धनराशि का 0.75 प्रतिशत ही खर्च किया जा सका है। शेष राशि खाते में पड़ी हुई है, जबकि गांवों में साफ-सफाई, पेयजल संकट और जर्जर संपर्क मार्ग जैसी समस्याएं जस की तस बनी हुई हैं। योजनाओं के क्रियान्वयन में देरी और उदासीनता के चलते विकास कार्य ठप पड़े हैं। यदि समय रहते धनराशि खर्च नहीं की गई तो बजट वापस होने की भी आशंका है, इससे भविष्य में आवंटन प्रभावित हो सकता है।
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इन ब्लॉकों की प्रगति अच्छी--
बलिया जिले की सीयर क्षेत्र पंचायत 100 प्रतिशत, दुबहड़ 99.60, आजमगढ़ की हरैया 96.54, रानी की सराय 92.23, लालगंज 92.02 प्रतिशत।
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इन ब्लाकों की खराब प्रगति--
मऊ जिले की दोहरीघाट 00, बलिया का हनुमानगंज 0.75, बांसडीह 28.80 और आजमगढ़ की तहबरपुर 30.68 प्रतिशत।
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केंद्रीय वित्त में मऊ की स्थिति सबसे खराब
केंद्रीय वित्त की धनराशि का क्षेत्र पंचायतों की ओर से उपभोग करने में आजमगढ़ मंडल स्तर पर आजमगढ़ जिला पहले स्थान पर है। यहां अभी तक 67.34 प्रतिशत धनराशि का उपभोग कर लिया गया है। वहीं बलिया 57.91 और मऊ जिले की वितीय प्रगति 43.10 प्रतिशत है। वहीं पंचम वित्त में आजमगढ़ 90.15 प्रतिशत, बलिया 83.48 और मऊ जिला की वित्तीय प्रगति 76.37 प्रतिशत है।
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क्षेत्र पंचायतों में आवंटित केंद्रीय वित्त की धनराशि के सापेक्ष ई-ग्राम स्वराज पोर्टल पर ऑनलाइन प्रदर्शित आंकड़ों की समीक्षा की गई। इसमें मऊ जिले की दोहरीघाट की प्रगति शून्य रही, वहीं बलिया जिले की महज 0.75 प्रतिशत प्रगति रही। इसके लिए जिलों के डीपीआरओ, बीडीओ और एडीओ पंचायतों को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि यथाशीघ्र निर्माण कार्य कराना सुनिश्चित कर रिपोर्ट दें। अभय कुमार शाही, डीडी पंचायत।
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केंद्रीय वित्त से पंचायतों में नाली, खड़ंजा, सड़क, सामुदायिक शौचालय, पेयजल व्यवस्था और स्वच्छता से जुड़े कार्य कराए जाने हैं। इसके बावजूद जिम्मेदार अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों की निष्क्रियता के कारण योजनाएं फाइलों में ही सिमटकर रह गई हैं। मऊ की दोहरीघाट क्षेत्र पंचायत में पूरे वर्ष किसी भी मद में कोई कार्य स्वीकृत या पूर्ण नहीं कराया गया, जिससे ग्रामीणों को भारी असुविधा का सामना करना पड़ रहा है।
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वहीं, बलिया जिले की हनुमानगंज क्षेत्र पंचायत की स्थिति भी बेहद चिंताजनक बनी हुई है। यहां आवंटित कुल धनराशि का 0.75 प्रतिशत ही खर्च किया जा सका है। शेष राशि खाते में पड़ी हुई है, जबकि गांवों में साफ-सफाई, पेयजल संकट और जर्जर संपर्क मार्ग जैसी समस्याएं जस की तस बनी हुई हैं। योजनाओं के क्रियान्वयन में देरी और उदासीनता के चलते विकास कार्य ठप पड़े हैं। यदि समय रहते धनराशि खर्च नहीं की गई तो बजट वापस होने की भी आशंका है, इससे भविष्य में आवंटन प्रभावित हो सकता है।
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इन ब्लॉकों की प्रगति अच्छी
बलिया जिले की सीयर क्षेत्र पंचायत 100 प्रतिशत, दुबहड़ 99.60, आजमगढ़ की हरैया 96.54, रानी की सराय 92.23, लालगंज 92.02 प्रतिशत।
इन ब्लाकों की खराब प्रगति
मऊ जिले की दोहरीघाट 00, बलिया का हनुमानगंज 0.75, बांसडीह 28.80 और आजमगढ़ की तहबरपुर 30.68 प्रतिशत।
केंद्रीय वित्त में मऊ की स्थिति सबसे खराब
केंद्रीय वित्त की धनराशि का क्षेत्र पंचायतों की ओर से उपभोग करने में आजमगढ़ मंडल स्तर पर आजमगढ़ जिला पहले स्थान पर है। यहां अभी तक 67.34 प्रतिशत धनराशि का उपभोग कर लिया गया है। वहीं बलिया 57.91 और मऊ जिले की वितीय प्रगति 43.10 प्रतिशत है। वहीं पंचम वित्त में आजमगढ़ 90.15 प्रतिशत, बलिया 83.48 और मऊ जिला की वित्तीय प्रगति 76.37 प्रतिशत है।
क्षेत्र पंचायतों में आवंटित केंद्रीय वित्त की धनराशि के सापेक्ष ई-ग्राम स्वराज पोर्टल पर ऑनलाइन प्रदर्शित आंकड़ों की समीक्षा की गई। इसमें मऊ जिले की दोहरीघाट की प्रगति शून्य रही, वहीं बलिया जिले की महज 0.75 प्रतिशत प्रगति रही। इसके लिए जिलों के डीपीआरओ, बीडीओ और एडीओ पंचायतों को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि यथाशीघ्र निर्माण कार्य कराना सुनिश्चित कर रिपोर्ट दें। अभय कुमार शाही, डीडी पंचायत।