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Azamgarh News: सरायमोहन में 58 साल, लपसीपुर में 21 साल से चल रही चकबंदी, सरकारी योजनाओं से वंचित हो रहे किसान

Mon, 12 Oct 2026 11:51 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Mon, 12 Oct 2026 11:51 PM IST
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Land consolidation has been ongoing for 58 years in Saraymohan and 21 years in Lapsipur; farmers are being deprived of government schemes.
जिले में कुल 1810 ग्राम पंचायतें हैं। इनमें कुल आठ लाख 27 हजार किसान हैं। इनमें से 17 हजार किसान आज भी फार्मर रजिस्ट्री और एक लाख 89 हजार 199 किसान किसान सम्मान निधि से वंचित हैं।
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इनमें से कुछ किसान अभिलेखों के अभाव में, तो ज्यादातर किसान गांव में चल रही चकबंदी प्रक्रिया के कारण इस योजना से वंचित हैं। जिले के 40 गांवों में चकबंदी की प्रक्रिया अभी तक अधूरी है। इनमें से किसी गांव में 58 साल, तो किसी गांव में 21 साल से चकबंदी की प्रक्रिया अधूरी है। इससे जमीन से संबंधित अभिलेख और नकल प्राप्त करने में कठिनाई से किसान सरकारी योजनाओं का लाभ पाने से वंचित हैं।
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गांव में जहां सामान्य तौर पर नकल के लिए करीब 310 रुपये खर्च होते हैं, वहीं उन्हें खेतों से संबंधित नकल प्राप्त करने में लगभग 500 रुपये तक खर्च करने पड़ रहे हैं।
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धारा 52 के तहत प्रकाशन के बजाय फिर से जारी हो रहे नोटिस
बरदह। ठेकमा ब्लॉक के सरायमोहन गांव में 58 साल बाद भी चकबंदी प्रक्रिया अधूरी है। वर्ष 1968 में शुरू हुई यह प्रक्रिया अब तक अंतिम चरण तक नहीं पहुंची, जिससे किसान परेशान हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि पुराने अभिलेख दीमक से नष्ट हो गए हैं। इसका हवाला देकर किसानों से ही कागजात मांगे जा रहे हैं। चक काटने के लिए पुराने स्वामित्व के बजाय वर्तमान मालिकाना स्थिति को आधार बनाया जा रहा है। इससे कई किसानों के हित प्रभावित होने की आशंका है। गाटों का मूल्यांकन 1969-70 में और चक परिवर्तन 1974-75 में हुआ था। इसके बावजूद धारा-52 के तहत चकबंदी पूर्ण होने का अंतिम प्रकाशन नहीं हुआ है। अंतिम प्रकाशन कराने के बजाय विभाग की ओर से उन्हें फिर से नोटिस जारी किए जा रहे हैं।
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21 साल बाद भी लपसीपुर के किसान परेशान
जहानागंज। विकास खंड के लपसीपुर गांव में कुल 850 किसान हैं। वर्ष 2005 में यह गांव चकबंदी के दायरे में आया था। तब से लेकर आज तक इस गांव में चकबंदी चल रही है, जो 21 साल बाद भी पूरी नहीं हो सकी है। इसके कारण गांव के 558 किसान, जिन्हें पहले किसान सम्मान निधि मिलती थी, अब इससे वंचित हैं। वहीं, फार्मर रजिस्ट्री अभी तक किसी की भी नहीं बनी है। लेखपाल दिलीप कुमार ने बताया कि गांव चकबंदी में है। जब तक चकबंदी की प्रक्रिया पूरी होकर अभिलेख राजस्व विभाग को नहीं सौंपे जाएंगे, तब तक ये कार्य नहीं हो पाएंगे।
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पहले मिलती थी सम्मान निधि, दो साल से बंद
मेंहनगर। विकास खंड के सिंहपुर धन्नी गांव में कुल लगभग 200 किसान हैं। इन किसानों को सम्मान निधि मिलती थी। वर्ष 2024 में गांव चकबंदी के दायरे में आया। चकबंदी में आने से पहले जिन किसानों ने अपनी ई-केवाईसी करा ली थी, उनकी सम्मान निधि अभी तक आ रही है। लेकिन जिन लोगों ने ई-केवाईसी नहीं कराई थी, चकबंदी शुरू होने के बाद उनकी ई-केवाईसी रुक गई और सम्मान निधि भी बंद हो गई।
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46 साल बाद भी मधसिया की चकबंदी अधूरी
तहबरपुर। विकासखंड के मधसिया ग्राम सभा में चकबंदी पूरी न होने से किसानों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। वर्ष 1980 में चकबंदी प्रक्रिया शुरू हुई, लेकिन यह अब तक पूरी नहीं हो सकी। इस कारण अधिकांश किसानों की फार्मर रजिस्ट्री नहीं हो पा रही है। इससे कई किसान प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के लाभ से वंचित हैं। ग्रामीणों ने अधिकारियों से मधसिया में चकबंदी की स्थिति की जांच कर प्रक्रिया पूरी कराने की मांग की है, ताकि किसानों के अभिलेख दुरुस्त हो सकें और उन्हें सरकारी योजनाओं का लाभ मिल सके।
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बोले ग्रामीण
राजस्व अभिलेखों की समस्या के चलते किसान परेशान हैं। नए आवेदकों को अभिलेख अपडेट करने में दिक्कत आ रही है, जबकि पुराने आवेदकों को लाभ मिल रहा है। -दुर्गेश राय, मधसिया।
21 साल से गांव की चकबंदी चल रही है, जो अधूरी है। इसके कारण गांव के किसान सम्मान निधि से वंचित हैं। वहीं, फार्मर रजिस्ट्री अभी तक किसी की भी नहीं बनी है। -रमेश सिंह, लपसीपुर।
चकबंदी पूरी नहीं होने के कारण गांव के अधिकांश किसानों की फार्मर रजिस्ट्री नहीं हो पा रही है। इसके चलते कई किसान प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के लाभ से वंचित हो रहे हैं। -मुकेश चतुर्वेदी, मधसिया।
58 साल बाद भी चकबंदी प्रक्रिया अंतिम चरण तक नहीं पहुंची, जिससे किसान परेशान हैं। पुराने अभिलेख दीमक से नष्ट हो गए हैं। इसका हवाला देकर किसानों से ही कागजात मांगे जा रहे हैं। -बृजेश राय, सरायमोहन।

000 वर्जन
जो पहलेनोहना था, वह नहीं किया गया। अब हमारे द्वारा प्रयास किया जा रहा है। हमने 10 साल से ऊपर की चकबंदी वाले गांवों को चिह्नित किया है। उम्मीद है कि एक या डेढ़ साल में हम इन गांवों को चकबंदी प्रक्रिया से बाहर कर देंगे। -लालता प्रसाद, एसओसी।
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