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कैफी आजमी के गीत गुनगुनाकर किया याद
ब्यूरो/अमर उजाला, आजमगढ़
Updated Fri, 15 Jan 2016 12:08 AM IST
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प्रगतिशील शायर स्व. कैफी आजमी की 97वीं जयंती पर गुरुवार को मेजवां गांव स्थित फतेह मंजिल में गुरुवार को मनाया गया। स्कूली छात्राओं ने विविध सांस्कृतिक कार्यक्रमों से लोगों का दिल जीत लिया। इस दौरान लोगों ने कैफी आजमी को याद करते हुए उनके चित्र पर पुष्प अर्पित की। उनके गीतों को गुनगुनाकर लोगों ने उन्हें याद किया।
कार्यक्रम की शुरुआत कैफी आजमी और उनके पिता फतेह हुसैन की मूर्ति पर दीप जलाकर किया गया। मुख्य अतिथि तहसीलदार शिवसागर दूबे ने कहा कि कैफी आजमी ने अपनी रचनाओं से आजमगढ़ का नाम देश विदेश में रोशन कर चुके हैं। उनकी शायरी आज भी प्रासंगिक हैं।
कैफी साहब आजीवन लिख कर गरीबों और असहायों की आवाज को बुलंद करते रहे हैं। पूर्व प्रधान एखलाक अहमद ने कहा कि कैफी साहब ने इलाके में तालीम का जो चिराग जलाया है, वह बुझ न पाए, यह हम लोगों की जिम्मेदारी है। उन्होंने अपने साथ रहे कैफी के अंतिम पलों को भी सांझा किया।
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सांस्कृतिक कार्यक्रमों में छात्राओं ने प्यार का जश्न नई तरह मनाना होगा, गम किसी दिल में सही गम को मिटाना होगा... पेश किया। इस दौरान फतेह मंजिल में कैफी आजमी के जीवन काल के दौरान उनके द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले सामानों की प्रदर्शनी लगाई गई। जिसे आस-पास के ग्रामीणों उसे बारीकी से देखा। संचालन जितेंद्र पांडेय ने किया। अंत में मेजवां सोसायटी के प्रबंधक आशुतोष त्रिपाठी ने सभी का आभार प्रकट किया।
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कार्यक्रम की शुरुआत कैफी आजमी और उनके पिता फतेह हुसैन की मूर्ति पर दीप जलाकर किया गया। मुख्य अतिथि तहसीलदार शिवसागर दूबे ने कहा कि कैफी आजमी ने अपनी रचनाओं से आजमगढ़ का नाम देश विदेश में रोशन कर चुके हैं। उनकी शायरी आज भी प्रासंगिक हैं।
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कैफी साहब आजीवन लिख कर गरीबों और असहायों की आवाज को बुलंद करते रहे हैं। पूर्व प्रधान एखलाक अहमद ने कहा कि कैफी साहब ने इलाके में तालीम का जो चिराग जलाया है, वह बुझ न पाए, यह हम लोगों की जिम्मेदारी है। उन्होंने अपने साथ रहे कैफी के अंतिम पलों को भी सांझा किया।
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सांस्कृतिक कार्यक्रमों में छात्राओं ने प्यार का जश्न नई तरह मनाना होगा, गम किसी दिल में सही गम को मिटाना होगा... पेश किया। इस दौरान फतेह मंजिल में कैफी आजमी के जीवन काल के दौरान उनके द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले सामानों की प्रदर्शनी लगाई गई। जिसे आस-पास के ग्रामीणों उसे बारीकी से देखा। संचालन जितेंद्र पांडेय ने किया। अंत में मेजवां सोसायटी के प्रबंधक आशुतोष त्रिपाठी ने सभी का आभार प्रकट किया।