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जेलर के बाद चार बंदी रक्षक भी निलंबित
ब्यूरो, अमर उजाला, आजमगढ़
Updated Thu, 28 May 2015 12:25 AM IST
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कारागार मंत्री के गृह जिले की जेल में मोबाइल बरामदगी के मामले में जेलर के बाद बुधवार को चार बंदी रक्षकों को भी निलंबित कर दिया गया, जबकि एसपी इन बंदी रक्षकों को मोबाइल बरामदगी में सहयोग करने की बात कहते हुए शासन से प्रशस्ति पत्र देने की सिफारिश कर चुके हैं। उधर, बैरकों में मारपीट और 54 मोबाइल मिलने के बाद गोरखपुर से आए डीआईजी जेल आरपी सिंह की जांच दूसरे दिन भी जारी रही। इस मामले में शासन ने एक सप्ताह में रिपोर्ट तलब की है।
मंडलीय जेल में 24 और 25 मई की रात हत्या के प्रयास के आरोपी प्रमोद तिवारी व बदमाश अमरजीत गिरोह के बीच मारपीट हो गई थी। घटना की जानकारी होते ही एसपी आकाश कुलहरि फोर्स के साथ जेल पहुंचे और बंदियों को काबू में किया। इसके बाद उन्होंने तलाशी कराई। इस दौरान बैरक नंबर तीन में सबसे अधिक मोबाइल मिले, जबकि विभिन्न जगहों पर छिपाकर रखे गए 54 मोबाइल जब्त किए गए।
उधर, बुधवार को भी जांच करने डीआईजी जेल आरपी सिंह मंडलीय कारागार पहुंचे। उन्होंने एक-एक बंदी रक्षक और जेलकर्मियों से जानकारी ली। बकौल डीआईजी, जांच में प्रथम दृष्टया जेलर और चार बंदी रक्षकों की लापरवाही उजागर हुई है। इसी आरोप में बंदी रक्षक अशोक यादव, जयप्रकाश यादव, आशुतोष सिंह और त्रिभुवन सिंह को निलंबित कर दिया गया है। पूरे मामले की जांच चल रही है।
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यदि उन पर लगे आरोप गलत पाए गए तो उन्हें बहाल कर दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि बवाल के मद्देनजर एहतियातन जेल में एक सेक्शन पीएसी तैनात कर दी गई है। साथ ही दस और बंदी रक्षकों की मांग की गई है। उधर, एसपी आकाश कुलहरि ने बताया कि बंदियों को किसने मोबाइल उपलब्ध कराया, इसकी जांच कराई जा रही है।
कोट :
आजमगढ़ जेल में मोबाइल बरामदगी गंभीर मामला है। दोषी पाए गए जेलर और चार बंदी रक्षकों को निलंबित कर दिया गया है। डीआईजी से एक सप्ताह में रिपोर्ट तलब की गई है। जेल में फिर ऐसा न हो, इसके लिए अधिकारियों को कठोर कदम उठाने को कहा गया है। जेल अधीक्षक से भी जवाब तलब किया जाएगा। - बलराम यादव, कारागार मंत्री
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मंडलीय जेल में 24 और 25 मई की रात हत्या के प्रयास के आरोपी प्रमोद तिवारी व बदमाश अमरजीत गिरोह के बीच मारपीट हो गई थी। घटना की जानकारी होते ही एसपी आकाश कुलहरि फोर्स के साथ जेल पहुंचे और बंदियों को काबू में किया। इसके बाद उन्होंने तलाशी कराई। इस दौरान बैरक नंबर तीन में सबसे अधिक मोबाइल मिले, जबकि विभिन्न जगहों पर छिपाकर रखे गए 54 मोबाइल जब्त किए गए।
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उधर, बुधवार को भी जांच करने डीआईजी जेल आरपी सिंह मंडलीय कारागार पहुंचे। उन्होंने एक-एक बंदी रक्षक और जेलकर्मियों से जानकारी ली। बकौल डीआईजी, जांच में प्रथम दृष्टया जेलर और चार बंदी रक्षकों की लापरवाही उजागर हुई है। इसी आरोप में बंदी रक्षक अशोक यादव, जयप्रकाश यादव, आशुतोष सिंह और त्रिभुवन सिंह को निलंबित कर दिया गया है। पूरे मामले की जांच चल रही है।
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यदि उन पर लगे आरोप गलत पाए गए तो उन्हें बहाल कर दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि बवाल के मद्देनजर एहतियातन जेल में एक सेक्शन पीएसी तैनात कर दी गई है। साथ ही दस और बंदी रक्षकों की मांग की गई है। उधर, एसपी आकाश कुलहरि ने बताया कि बंदियों को किसने मोबाइल उपलब्ध कराया, इसकी जांच कराई जा रही है।
कोट :
आजमगढ़ जेल में मोबाइल बरामदगी गंभीर मामला है। दोषी पाए गए जेलर और चार बंदी रक्षकों को निलंबित कर दिया गया है। डीआईजी से एक सप्ताह में रिपोर्ट तलब की गई है। जेल में फिर ऐसा न हो, इसके लिए अधिकारियों को कठोर कदम उठाने को कहा गया है। जेल अधीक्षक से भी जवाब तलब किया जाएगा। - बलराम यादव, कारागार मंत्री