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सहकारी बैंक के पूर्व मुख्य कार्यपालक अधिकारी के खिलाफ जांच शुरू
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आजमगढ़। जिला सहकारी बैंक के पूर्व सचिव और मुख्य कार्य पालक अधिकारी पर मुबारकपुर शाखा के ब्रांच मैनेजर रहे शशिशंकर ने एक करोड़ 45 लाख रुपये के हेराफेरी करने का आरोप लगाया था। अब ब्रांच मैनेजर के आरोपों की जांच शुरू हो गई है। जांच के लिए जांच अधिकारी द्वारा अभिलेख जुटाए जा रहे हैं।
जिला सहकारी बैंक मुबारकपुर शाखा के ब्रांच मैनेजर पद से सेवानिवृत्त शशिशंकर सिंह ने डीएम एनपी सिंह को शिकायती पत्र सौंपकर तत्कालीन सचिव और मुख्य कार्यपालक अधिकारी पर एक करोड़ 45 लाख रुपये के हेराफेरी का आरोप लगाया था। उनका आरोप है कि सचिव द्वारा बैंक के संड्री खाते में सरकार को वापस की जाने वाली धनराशि को कर्मचारियों से अनुचित लाभ लेकर बोनस, नकदीकरण व वेतन मद में भुगतान कर दिया गया। पूर्व डीएम ने उन्हें बैंकर्स की मीटिंग में कई बार संबंधित धनराशि को राजकीय कोष में जमा करने का निर्देश दिया था।इनके द्वारा बाध्यकारी नियमों का उल्लंघन किया गया। जिसमें छह माह पर ब्याज की गणना की जानी थी। लेकिन जानबूझकर कर्मचारियों से रिश्वत लेने के लिए पीएफ ट्रस्ट खाते में ब्याज की गणना न करके उसे लटकाते रहे। कर्मचारियों की सेवानिवृत्ति के बाद उनसे धन लेकर ही उन्हें भुगतान करते रहे। उनहोंने अपने कार्यकाल में कर्मचारियों के पीएफ फंड में जमा धनराशि में से लगभग एक करोड़ 45 लाख रुपये नियम विरुद्ध मनमाने ढंग से एक व्यक्ति को भुगतान कर दिया। उनकी इस शिकायत पर डीएम की ओर से एआर कोआपरेटिव को जांच अधिकारी नामित किया गया है। एआर कोआपरेटिव रामकिंकर द्विवेदी ने बताया कि डीएम के निर्देश पर जांच शुरू हो गई है। अभी अरोपों की जांच के लिए अभिलेख जुटाए जा रहे हैँ। जांच पूरी होने के बाद डीएम को रिपोर्ट सौंपी जाएगी।
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जिला सहकारी बैंक मुबारकपुर शाखा के ब्रांच मैनेजर पद से सेवानिवृत्त शशिशंकर सिंह ने डीएम एनपी सिंह को शिकायती पत्र सौंपकर तत्कालीन सचिव और मुख्य कार्यपालक अधिकारी पर एक करोड़ 45 लाख रुपये के हेराफेरी का आरोप लगाया था। उनका आरोप है कि सचिव द्वारा बैंक के संड्री खाते में सरकार को वापस की जाने वाली धनराशि को कर्मचारियों से अनुचित लाभ लेकर बोनस, नकदीकरण व वेतन मद में भुगतान कर दिया गया। पूर्व डीएम ने उन्हें बैंकर्स की मीटिंग में कई बार संबंधित धनराशि को राजकीय कोष में जमा करने का निर्देश दिया था।इनके द्वारा बाध्यकारी नियमों का उल्लंघन किया गया। जिसमें छह माह पर ब्याज की गणना की जानी थी। लेकिन जानबूझकर कर्मचारियों से रिश्वत लेने के लिए पीएफ ट्रस्ट खाते में ब्याज की गणना न करके उसे लटकाते रहे। कर्मचारियों की सेवानिवृत्ति के बाद उनसे धन लेकर ही उन्हें भुगतान करते रहे। उनहोंने अपने कार्यकाल में कर्मचारियों के पीएफ फंड में जमा धनराशि में से लगभग एक करोड़ 45 लाख रुपये नियम विरुद्ध मनमाने ढंग से एक व्यक्ति को भुगतान कर दिया। उनकी इस शिकायत पर डीएम की ओर से एआर कोआपरेटिव को जांच अधिकारी नामित किया गया है। एआर कोआपरेटिव रामकिंकर द्विवेदी ने बताया कि डीएम के निर्देश पर जांच शुरू हो गई है। अभी अरोपों की जांच के लिए अभिलेख जुटाए जा रहे हैँ। जांच पूरी होने के बाद डीएम को रिपोर्ट सौंपी जाएगी।
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