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बेगुनाह नौजवानों को न्याय दिलाकर रहेंगे
ब्यूरो, अमर उजाला, आजमगढ़
Updated Mon, 23 Feb 2015 12:16 AM IST
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शिब्ली एकेडमी हाल में रविवार को एसोसिएशन फार वेलफेयर मेडिकल एजूकेशनल एंड लीगल असिस्टेंस (अवमेला) के तत्वावधान में गोष्ठी आयोजित की गई। इस दौरान उपस्थित लोगों ने आजमगढ़ के फंसाए गए बेगुनाह नौजवानों, जो विभिन्न जेलों में बंद हैं, को छुड़ाने पर चर्चा की गई।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि और अध्यक्षता कर रहे जमियतुल उलेमा हिंद के राष्ट्रीय सचिव गुलजार अहमद आज़मी ने कहा कि आतंकवाद के नाम पर पूरे देश में 430 बेगुनाह नौजवानों को फंसाया गया है। इसमें से 58 का मुकदमा जमियतुल उलेमा हिंद लड़ रही है।
उन्होंने कहा कि मक्का मस्जिद, मालेगांव, अहमदाबाद आदि जितने भी स्थानों पर विस्फोट की घटनाएं हुईं, उसमें बेगुनाह नौजवानों को फंसाया गया है। असिमानंद का इकबालिया बयान इस बात का सबूत है कि विस्फोट मुसलमानों ने नहीं किया। उन्होंने कहा कि जब नरेंद्र मोदी को 16 मई 2014 को एक तरफ संसदीय दल का नेता चुना जा रहा था तो वही दूसरी तरह अक्षरधाम मामले के छह आरोपियों को कोर्ट ने बाइज्जत बरी कर दिया।
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नई दिल्ली से आए यासीन पटेल फलाही ने देश की कानून व्यवस्था पर अफसोस जताया। बोले, यहां दो तरह की व्यवस्थाएं आबाद हो गई हैं। ऐसे में हम बेगुनाहों की रिहाई के लिए कानून और वसूलों की रोशनी में लड़ाई लड़ रहे हैं। यही वजह है कि हाईकोर्ट ने सिमी पर लगे बैन को नाजायज बताया है।
अवमेला के अध्यक्ष डा. जावेद अख्तर ने कहा कि सत्य के मार्ग पर चलने वालों को सदैव ही परीक्षा से गुजरना पड़ता है फिर भी सत्य मार्ग से हम कभी विचलित नहीं हुए। उन्होंने कहा कि बटला एनकाउंटर और उसके बाद हुए अन्याय को लेकर हमारा संघर्ष चल रहा है और हम निर्दोषों को न्याय दिलाएंगे।
प्रो. डा. जावेद अली ने कहा कि मुसलमानों पर शक न किया जाए। मुसलमानों ने काबूल, बुखारा, समरकंद, कंधार की सरहदों से लेकर कन्या कुमारी तक सभी को एक धागे में पिरोया है। उन्होंने कहा कि मुसलमानों ने इस देश को सजाने और संवारने का ही नहीं बल्कि देश की आजादी में अपनी महती भूमिका का निर्वहन किया है। 1857 के स्वतंत्रता आंदोलन में सिर्फ दिल्ली में 25 हजार मुसलमानों ने देश की आजादी के लिए कुर्बानी दी है।
गोष्ठी की अध्यक्षता मुख्य अतिथि गुलजार अहमद आजमी ने संचालन डा. जावेद अख्तर ने किया। इस मौके पर डा. वाहिद अली, डा. अमीर आलम, डा. कमालुद्दीन, डा. फखरे आलम, मास्टर तरीक, डा. मोअज्जम, डा. जाहिद, मौलाना उमैर सिद्दीक नदवी, मिस्टर भाई, तारिक शफीक, तारिक शमीम आदि उपस्थित रहे। इस दौरान मुख्य अतिथि ने ‘फक्कूल आनीं नामक पुस्तक का विमोचन किया और हुदा मिल्ली स्कूल के बच्चों ने तराना पेश किया।
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कार्यक्रम के मुख्य अतिथि और अध्यक्षता कर रहे जमियतुल उलेमा हिंद के राष्ट्रीय सचिव गुलजार अहमद आज़मी ने कहा कि आतंकवाद के नाम पर पूरे देश में 430 बेगुनाह नौजवानों को फंसाया गया है। इसमें से 58 का मुकदमा जमियतुल उलेमा हिंद लड़ रही है।
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उन्होंने कहा कि मक्का मस्जिद, मालेगांव, अहमदाबाद आदि जितने भी स्थानों पर विस्फोट की घटनाएं हुईं, उसमें बेगुनाह नौजवानों को फंसाया गया है। असिमानंद का इकबालिया बयान इस बात का सबूत है कि विस्फोट मुसलमानों ने नहीं किया। उन्होंने कहा कि जब नरेंद्र मोदी को 16 मई 2014 को एक तरफ संसदीय दल का नेता चुना जा रहा था तो वही दूसरी तरह अक्षरधाम मामले के छह आरोपियों को कोर्ट ने बाइज्जत बरी कर दिया।
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नई दिल्ली से आए यासीन पटेल फलाही ने देश की कानून व्यवस्था पर अफसोस जताया। बोले, यहां दो तरह की व्यवस्थाएं आबाद हो गई हैं। ऐसे में हम बेगुनाहों की रिहाई के लिए कानून और वसूलों की रोशनी में लड़ाई लड़ रहे हैं। यही वजह है कि हाईकोर्ट ने सिमी पर लगे बैन को नाजायज बताया है।
अवमेला के अध्यक्ष डा. जावेद अख्तर ने कहा कि सत्य के मार्ग पर चलने वालों को सदैव ही परीक्षा से गुजरना पड़ता है फिर भी सत्य मार्ग से हम कभी विचलित नहीं हुए। उन्होंने कहा कि बटला एनकाउंटर और उसके बाद हुए अन्याय को लेकर हमारा संघर्ष चल रहा है और हम निर्दोषों को न्याय दिलाएंगे।
प्रो. डा. जावेद अली ने कहा कि मुसलमानों पर शक न किया जाए। मुसलमानों ने काबूल, बुखारा, समरकंद, कंधार की सरहदों से लेकर कन्या कुमारी तक सभी को एक धागे में पिरोया है। उन्होंने कहा कि मुसलमानों ने इस देश को सजाने और संवारने का ही नहीं बल्कि देश की आजादी में अपनी महती भूमिका का निर्वहन किया है। 1857 के स्वतंत्रता आंदोलन में सिर्फ दिल्ली में 25 हजार मुसलमानों ने देश की आजादी के लिए कुर्बानी दी है।
गोष्ठी की अध्यक्षता मुख्य अतिथि गुलजार अहमद आजमी ने संचालन डा. जावेद अख्तर ने किया। इस मौके पर डा. वाहिद अली, डा. अमीर आलम, डा. कमालुद्दीन, डा. फखरे आलम, मास्टर तरीक, डा. मोअज्जम, डा. जाहिद, मौलाना उमैर सिद्दीक नदवी, मिस्टर भाई, तारिक शफीक, तारिक शमीम आदि उपस्थित रहे। इस दौरान मुख्य अतिथि ने ‘फक्कूल आनीं नामक पुस्तक का विमोचन किया और हुदा मिल्ली स्कूल के बच्चों ने तराना पेश किया।