आजमगढ़। संविधान बचाओ अधिवक्ता अभियान समिति के तत्वावधान में ‘नागरिकों के संवैधानिक अधिकारों एवं समानता’ विषयक गोष्ठी रविवार को हुई। अनिल कुमार राय ने कहा कि देश में नागरिकता कानून के खिलाफ जो संघर्ष चल रहा है, उसने हठधर्मी सरकार को बेचैन कर दिया है। उसे अपनी गलती का एहसास हो रहा है, जिसके कारण हिंदुस्तान की यह पहली सरकार है जिसे कानून को समझाने के लिए पूरी सरकार को सड़क पर निकलने के लिए मजबूर कर दिया।
उन्होंने कहा कि सरकार को हठधर्मिता छोड़कर इस कानून पर पुनर्विचार करना चाहिए। डॉ. जावेद अख्तर ने कहा कि संविधान को बचाने के लिए शाहीन बाग में महिलाओं ने मोर्चा को संभाला है। वह बधाई की पात्र हैं। कहा कि आज देश का नौजवान जाति और मजहब से ऊपर उठकर आवाज उठा रहे हैं, हम सभी को सरकार के गलत इरादों को जनता को समझाने की जरूरत है। गोरखपुर विश्वविद्यालय छात्रसंघ के पूर्व अध्यक्ष राम सिंह ने कहा कि आज समाज हित में संघर्ष करने का समय आ गया है। सरकार लोगों को भ्रम जाल में फंसाकर संवैधानिक अधिकारों को समाप्त करने का काम कर रही है। लोकतंत्र सेनानी जितेंद्र राय ने कहा कि जुमलों और समाज में भ्रम फैलाकर सत्ता में आई मोदी सरकार नौकरी देने से लेकर विदेशों से काला धन लाने में असफल साबित हुई। अपनी असफलता को छिपाने और झूठ को सामने न आने देने के लिए भाजपा सरकार को सीएए, एनआरसी, एनपीआर को लागू कर सांप्रदायिक रंग दे रही है। जय प्रकाश नारायन ने कहा कि भाजपा सरकार अपने मंसूबे में कामयाब नहीं होगी क्योंकि देश की लोकतांत्रिक ताकतें जाग चुकी हैं। शुभारंभ संविधान के प्रस्तावना शपथ से हुई। इस मौके पर अरुण सिंह, ईश्वरचंद्र यादव, हवलदार यादव, बीराम, दयाराम यादव, तारिक अहमद, विमला यादव, राजेश यादव, राजबहादुर यादव, परवेज अहमद, शमीम अहमद, इरफान अहमद, कामरेड राजबहादुर सिंह आदि रहे। अध्यक्षता कमलाकांत ने की। संचालन शमशाद अहमद ने किया।