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Azamgarh News: महाविद्यालयों में फिर भेजे खाली लिफाफे
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आजमगढ़। महाराजा सुहेलदेव राज्य विश्वविद्यालय की सेमेस्टर परीक्षाओं में गड़बड़ी थमने का नाम नहीं ले रही है। शुक्रवार को शाम की पाली में कई महाविद्यालयों में एक बार फिर से खाली लिफाफे भेजे गए। जब इसकी शिकायत हुई तो महाविद्यालय की ई-मेल आईडी पर प्रश्नपत्र भेजा गया। जिसके बाद परीक्षाएं शुरू हुई। वहीं इस संबंध में पूछे जाने पर रजिस्ट्रार ने इससे इन्कार किया।
महाराजा सुहेलदेव राज्य विश्वविद्यालय से कुल 454 महाविद्यालय संबद्ध हैं। जिसमें आजमगढ़ के 211 और मऊ जनपद के 132 महाविद्यालयों को परीक्षा केंद्र बनाया गया है। विश्वविद्यालय विगत चार से परीक्षाएं करा रहा है। इसके बाद भी परीक्षाओं में गड़बड़ी थमने का नाम नहीं ले रही है।
अभी संस्कृत की परीक्षा में परीक्षा केंद्रों पर भेजे गए सादे लिफाफे का प्रकरण शांत भी नहीं हुआ था कि शुक्रवार को एक बार फिर से शाम की पाली में आयोजित बीए अंग्रेजी चतुर्थ सेमेस्टर की परीक्षा में महाविद्यालयों में फिर से कई लिफाफे सादे पहुंचे। जिसमें कोई प्रश्नपत्र ही नहीं था।
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वहीं एमए चतुर्थ सेमेस्टर की परीक्षा का प्रश्नपत्र ही महाविद्यालय नहीं पहुंचा। जब इसकी शिकायत महाविद्यालय की ओर से रजिस्ट्रार से की गई तो उन्होंने महाविद्यालय की ई-मेल आईडी पर प्रश्नपत्र भेज दिया। किसी तरह से महाविद्यालयों ने मेल पर आए प्रश्नपत्र का प्रिंट निकालकर पेपर को कराया। मामले फोन करने पर कुलपति ने फोन नहीं उठाया। वहीं रजिस्ट्रार विशेश्वर कुमार ने सादा लिफाफा पहुंचने और ई-मेल से प्रश्नपत्र भेजने से इन्कार किया। जबकि उन्हीं की ई-मेल आईडी से यह प्रश्नपत्र महाविद्यालयों को भेजा गया है।
हमें कहीं भी सादा लिफाफा पहुंचने की जानकारी नहीं है। रही बात ई-मेल से प्रश्नपत्र भेजने की तो आज कहीं भी किसी भी महाविद्यालय को हमारी ओर से वाट्सएप या ईमेल से प्रश्नपत्र नहीं भेजा गया है। - विशेश्वर प्रसाद, रजिस्ट्रार।
यह कैसी सतर्कता
आजमगढ़। पूर्व में सादा लिफाफा भेजे जाने और वाट्सएप पर पेपर भेजे जाने पर कुलपति प्रो. प्रदीप कुमार शर्मा ने सफाई दी थी। उनका कहना था कि एजेंसी को पूर्व में प्रवेश लेने वाले छात्रों की सूची प्रेषित की गई थी। बाद में छात्रों की संख्या बढ़ गई लेकिन अपडेट संख्या को कार्यदायी संस्था ने संज्ञान नहीं लिया और पूर्व में प्रेषित संख्या के आधार पर प्रश्नपत्र छापा और बाद में प्रेषित छात्रों की संख्या पर उन्होंने सादा लिफाफा भेज दिया। उन्होंने इस मामले में आगे से सतर्कता बरतने की बात कही थी। जबकि महाविद्यालयों में एडमिशन की डेट विश्वविद्यालय द्वारा ही निर्धारित की जाती है इसके बाद बच्चों के एडमिशन लिए जाते हैं। अगर विश्वविद्यालय द्वारा निर्धारित एडमिशन की तिथि निकल गई थी तो फिर बच्चों की संख्या कैसे बढ़ी? अगर डेट थी तो विश्वविद्यालय प्रशासन ने कैसे एडमिशन पूर्ण होने से पहले नामित एजेंसी को पेपर छापने का आर्डर दे दिया? कुलपति द्वारा दिया गया बयान इस तरह के कई सवाल खड़े करता है।
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महाराजा सुहेलदेव राज्य विश्वविद्यालय से कुल 454 महाविद्यालय संबद्ध हैं। जिसमें आजमगढ़ के 211 और मऊ जनपद के 132 महाविद्यालयों को परीक्षा केंद्र बनाया गया है। विश्वविद्यालय विगत चार से परीक्षाएं करा रहा है। इसके बाद भी परीक्षाओं में गड़बड़ी थमने का नाम नहीं ले रही है।
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अभी संस्कृत की परीक्षा में परीक्षा केंद्रों पर भेजे गए सादे लिफाफे का प्रकरण शांत भी नहीं हुआ था कि शुक्रवार को एक बार फिर से शाम की पाली में आयोजित बीए अंग्रेजी चतुर्थ सेमेस्टर की परीक्षा में महाविद्यालयों में फिर से कई लिफाफे सादे पहुंचे। जिसमें कोई प्रश्नपत्र ही नहीं था।
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वहीं एमए चतुर्थ सेमेस्टर की परीक्षा का प्रश्नपत्र ही महाविद्यालय नहीं पहुंचा। जब इसकी शिकायत महाविद्यालय की ओर से रजिस्ट्रार से की गई तो उन्होंने महाविद्यालय की ई-मेल आईडी पर प्रश्नपत्र भेज दिया। किसी तरह से महाविद्यालयों ने मेल पर आए प्रश्नपत्र का प्रिंट निकालकर पेपर को कराया। मामले फोन करने पर कुलपति ने फोन नहीं उठाया। वहीं रजिस्ट्रार विशेश्वर कुमार ने सादा लिफाफा पहुंचने और ई-मेल से प्रश्नपत्र भेजने से इन्कार किया। जबकि उन्हीं की ई-मेल आईडी से यह प्रश्नपत्र महाविद्यालयों को भेजा गया है।
हमें कहीं भी सादा लिफाफा पहुंचने की जानकारी नहीं है। रही बात ई-मेल से प्रश्नपत्र भेजने की तो आज कहीं भी किसी भी महाविद्यालय को हमारी ओर से वाट्सएप या ईमेल से प्रश्नपत्र नहीं भेजा गया है। - विशेश्वर प्रसाद, रजिस्ट्रार।
यह कैसी सतर्कता
आजमगढ़। पूर्व में सादा लिफाफा भेजे जाने और वाट्सएप पर पेपर भेजे जाने पर कुलपति प्रो. प्रदीप कुमार शर्मा ने सफाई दी थी। उनका कहना था कि एजेंसी को पूर्व में प्रवेश लेने वाले छात्रों की सूची प्रेषित की गई थी। बाद में छात्रों की संख्या बढ़ गई लेकिन अपडेट संख्या को कार्यदायी संस्था ने संज्ञान नहीं लिया और पूर्व में प्रेषित संख्या के आधार पर प्रश्नपत्र छापा और बाद में प्रेषित छात्रों की संख्या पर उन्होंने सादा लिफाफा भेज दिया। उन्होंने इस मामले में आगे से सतर्कता बरतने की बात कही थी। जबकि महाविद्यालयों में एडमिशन की डेट विश्वविद्यालय द्वारा ही निर्धारित की जाती है इसके बाद बच्चों के एडमिशन लिए जाते हैं। अगर विश्वविद्यालय द्वारा निर्धारित एडमिशन की तिथि निकल गई थी तो फिर बच्चों की संख्या कैसे बढ़ी? अगर डेट थी तो विश्वविद्यालय प्रशासन ने कैसे एडमिशन पूर्ण होने से पहले नामित एजेंसी को पेपर छापने का आर्डर दे दिया? कुलपति द्वारा दिया गया बयान इस तरह के कई सवाल खड़े करता है।