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यूक्रेन में फंसे हैं जिले के आठ विद्यार्थी, किसी को मिली राहत तो कोई कर रहा दुआ

Sat, 26 Feb 2022 11:32 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Sat, 26 Feb 2022 11:32 PM IST
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Eight students of the district are trapped in Ukraine, some get relief and some are praying
यूक्रेन में ओडीशा नेशनल मेडिकल यूनिवर्सिटी से एमबीबीएस की पढ़ाई कर रही श्रेया यादव का परिवार। - फोटो : AZAMGARH
यूक्रेन पर रूस के हमले के बाद वहां जिले के आठ विद्यार्थी फंसे हैं। शनिवार को वहां से कुछ छात्रों को निकलने का रास्ता मिला। वहीं कुछ छात्र बंकर में रहने को विवश है। वहां फंसे विद्यार्थी खैरियत के लिए दुआ कर रहे हैं। हालांकि उन्हें भी निकालने की कवायद की जा रही है लेकिन यह व्यवस्था कब तक होगी कुछ भी कहना मुश्किल है। नगर के हीरापट्टी निवासी अनिल विश्वकर्मा ने बताया कि शाम को लगभग 5.45 बजे पुत्र विनीत विश्वकर्मा से बात हुई थी। उसने बताया कि उन्हें वहां से निकालने के लिए प्रयास शुरू हो गया है। गाड़ी की तलाश की जा रही है। गाड़ी मिलते ही उन्हें वहां से बाहर हंगरी ले जाया जाएगा। वहां से वह अपने देश के लिए रवाना होंगे। जिन लोगों के बच्चे यूक्रेन से निकलने में कामयाब रहे वे लोग ऊपर वाले का शुक्रिया अदा कर रहे हैं। जबकि जिनके बच्चे वहां अब भी फंसे हैं वह लोग उनके सकुशल वापसी की कामना कर रहे हैं।
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रोमानिया सीमा के लिए निकली श्रेया यादव
सरायमीर। थाना क्षेत्र के पवई लाडपुर गांव निवासी डॉ. नरेंद्र यादव की पुत्री श्रेया यादव यूक्रेन में ओडेशा नेशनल मेडिकल यूनिवर्सिटी से एमबीबीएस की पढ़ाई कर रही है। इस साल उनका चौथा साल है। अभी सितंबर 2021 को वह इंडिया से यूक्रेन गई हुई हैं। उनके पिता ने बताया कि शनिवार को 12बजे दिन में बेटी श्रेया यादव से बात हुई। उसने बताया कि कुछ छात्र शुक्रवार को गाड़ी से यूक्रेन से बार्डर क्रास कर के रुमानिया पहुंच गए हैं। उन्हीं छात्रों के बताए गए मार्ग पर ही मैं और ग्रुप के कई छात्र छात्राएं रूम से पैदल ही निकल कर वाहन की तलाश में हैं। अभी कोई वाहन नहीं मिला है कि रुमानिया बार्डर पर पहुंच जाएं।
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आपस में पैसा जुटाकर की बस की व्यवस्था, हुए रवाना
सगड़ी। रूस और यूक्रेन के बीच छिड़ी जंग में हालात गंभीर होते जा रहे हैं। रूस द्वारा की जा रही बमबारी से दहशत का माहौल है। रात भर जग कर लोग रात बिताने को मजबूर हैं। सगड़ी के खतीबपुर गांव निवासी रेनू यादव के भाई डॉ. सत्यशील यादव ने बताया कि शुक्रवार को पूरी रात बहन ने और अन्य छात्रों ने बंकर में रहकर रात गुजारी। वहीं सुबह होने पर छात्रावास में चली गई। शनिवार को दोपहर बाद यूक्रेन में फंसे छात्र छात्राओं ने पैसा इकट्ठा कर दो बसों की व्यवस्था की, यूक्रेन से रोमानिया के लिए दोपहर बाद दो बसें रवाना र्हुइं जिसमें रेनू यादव भी सवार थी। बस चालू होते ही छात्राओं ने हर हर महादेव के नारे लगाए। उन्होंने बताया कि अब आस जगी है कि मेरी बहन सकुशल घर वापस आ सकती है।
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अभी भी बंकर में है अनुष्का
आजमगढ़। नगर के सिधारी मुहल्ला निवासी अजय प्रताप सिंह की बेटी अनुष्का सिंह भी यूक्रेन में फंसी हुई हैं। परिवार के लोग उसकी कुशलता को लेकर चिंतित हैं। उन्होंने बताया कि हमारी बेटी से कुछ देर पहले बात हुई है। वह एंबेसी के करीब एक बंकर में है। उसने बताया कि अभी तक उनके बाहर निकलने की कोई व्यवस्था नहीं हुई है। चारों तरफ धमाकों की आवाज गूंज रही है जिससे बाहर निकलना दूभर लग रहा है। हमारी यही कामना है कि हमारी बेटी सकुशल घर लौटे।

सीमा से 1600 किमी दूर खारकीव में फंसे उज्ज्वल
आजमगढ़। नगर क्षेत्र के हीरापट्टी के रहने वाले निलेश कुमार गौड़ का बेटा उज्ज्वल गौड़ भी यूक्रेन के खारकीव शहर में रहकर मेडिकल की पढ़ाई कर रहा है। रूस के आक्रमण के बाद उज्ज्वल अपने साथियों के साथ बंकर में चला गया। जहां वह पूरी तरह से सुरक्षित है। उज्ज्वल ने फोन पर हुई वार्ता में बताया कि हम लोग पूरी तरह से सेफ हैं लेकिन बार्ड यहां से 1600 से 1700 किमी दूर है जिसके कारण हमें बाहर निकलने का कोई रास्ता नहीं सूझ रहा है। जिस जगह हम लोग हैं वहां भी रुक-रूक कर धमाकों की आवाज आ रही है। आज दिन के समय धमाके बंद हुए थे तो हमारे साथी बाहर निकले थे लेकिन थोड़ी देर बाद ही फिर धमाके होने लगे जिसके कारण सभी लोग अंदर आ गए। नीलेश ने बताया कि शाम को पुत्र से बात हुई थी। उसने बताया कि वह पूरी तरह से सुरक्षित है। जैसे ही सायरन बजता है उन्हें हास्टल में बने बंकर में जाना पड़ता है। उनके खाने पीने की पूरी व्यवस्था है। लेकिन वहां से निकलने की व्यवस्था नहीं हो पाई है। एंबेसी से उनसे संपर्क किया गया था और यह निर्देश दिया गया है कि जब तक न कहा जाए वह लोग बाहर न निकलें।
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