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नाटक ‘हेट-द सीन’ से नशे पर प्रहार
ब्यूरो, अमर उजाला, आजमगढ़
Updated Tue, 30 Dec 2014 12:19 AM IST
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रंग महोत्सव-2014 की चौथी शाम स्व. आयुष अग्र्रवाल के नाम रही। नाटक ‘हेट -द सीन’ के माध्यम से नशे पर प्रहार किया गया। वहीं विभिन्न प्रांतों से आए कलाकारों ने अपने-अपने प्रांत के लोकनृत्य की प्रस्तुति की।
सांस्कृतिक समिति लखनऊ के आरके नाग द्वारा लिखित नाटक ‘हेट- द सीन’ का मंचन राजीव प्रकाश के निर्देशन में किया गया। यह नाटक राष्ट्रपिता महात्मा गांधी केे कथन ‘पाप से घृणा करो पापी से नहीं’ पर आधारित है।
इसमें यह दिखाया गया कि दया घर का मुखिया अपने शराबी बेटे शेखर, पुत्रवधू शिखा और पौत्री मिनी के साथ रहता है। मामा यानि सुधीर शिखा का मुंहबोला भाई अपनी भांजी को उसके घर पढ़ाने आता है। शेखर के दोस्त भी उसी मानसिकता के हैं।
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शेखर सामान्य अवस्था में एक अच्छा पुत्र, पति, पिता होता है। वह बेटी और पत्नी का जन्म दिन अपनी विवाह की वर्षगांठ उत्साहपूर्वक मनाता है। लेकिन जब नशे की गिरफ्त में होता है तो अपनी निकृष्ट हरकताें से सबका जीना हराम कर देता है।
पिता का अपमान और लांछन, पत्नी की शारीरिक और मानसिक प्रताड़ना, चरित्र पर शंका, अपनी जान को खतरा, मामा का अपमान करता है।
पति की प्रताड़ना और उसकी हरकत से तंग होकर अंत में पत्नी शिखा घर छोड़ने के लिए विवश हो जाती है।
बेटी अपनी मां से अलग हो जाती है और शेखर बीमार होकर मौत की कगार पर पहुंच जाता है।
बेटी मिनी महात्मा गांधी के वाक्य को मूल मंत्र मानकर अपने पिता और परिवार के बीच सेतु का कार्य करती है। उसका वाक्य दोष तो शराब का है मेरे पिता का नहीं। फिर क्यों सब लोग उसके पिता से नफरत करते हैं।
उसके इस वाक्य से एक ओर शेखर को पश्चाताप और ग्लानि होती है और वह सबसे क्षमा मांगकर शराब छोड़ने का निश्चय करता है।
दूसरी ओर शिखा और दया को अपने किए व्यवहार पर पुन: सोचने को विवश करता है। इस दौरान नाटक ‘लेट मी फििनश’, ‘धर्मांतरण’ और ‘बूढ़ी काकी’ का मंचन किया गया।
नाटक के प्रमुख पात्रों में महर्षि कपूर ने दया, अनिल विश्वकर्मा ने शेखर, आकांक्षा वर्मा ने शिखा, नीतू शर्मा ने मिनी, अभिषेक श्रीवास्तव ने मामा सर, आर्यन यादव ने मैनेजर व डाक्टर, अभय दीक्षित ने पुलिस इंस्पेक्टर और विनय सिंह हार्दिक ने नशेबाज युवक की भूमिका निभाई।
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सांस्कृतिक समिति लखनऊ के आरके नाग द्वारा लिखित नाटक ‘हेट- द सीन’ का मंचन राजीव प्रकाश के निर्देशन में किया गया। यह नाटक राष्ट्रपिता महात्मा गांधी केे कथन ‘पाप से घृणा करो पापी से नहीं’ पर आधारित है।
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इसमें यह दिखाया गया कि दया घर का मुखिया अपने शराबी बेटे शेखर, पुत्रवधू शिखा और पौत्री मिनी के साथ रहता है। मामा यानि सुधीर शिखा का मुंहबोला भाई अपनी भांजी को उसके घर पढ़ाने आता है। शेखर के दोस्त भी उसी मानसिकता के हैं।
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शेखर सामान्य अवस्था में एक अच्छा पुत्र, पति, पिता होता है। वह बेटी और पत्नी का जन्म दिन अपनी विवाह की वर्षगांठ उत्साहपूर्वक मनाता है। लेकिन जब नशे की गिरफ्त में होता है तो अपनी निकृष्ट हरकताें से सबका जीना हराम कर देता है।
पिता का अपमान और लांछन, पत्नी की शारीरिक और मानसिक प्रताड़ना, चरित्र पर शंका, अपनी जान को खतरा, मामा का अपमान करता है।
पति की प्रताड़ना और उसकी हरकत से तंग होकर अंत में पत्नी शिखा घर छोड़ने के लिए विवश हो जाती है।
बेटी अपनी मां से अलग हो जाती है और शेखर बीमार होकर मौत की कगार पर पहुंच जाता है।
बेटी मिनी महात्मा गांधी के वाक्य को मूल मंत्र मानकर अपने पिता और परिवार के बीच सेतु का कार्य करती है। उसका वाक्य दोष तो शराब का है मेरे पिता का नहीं। फिर क्यों सब लोग उसके पिता से नफरत करते हैं।
उसके इस वाक्य से एक ओर शेखर को पश्चाताप और ग्लानि होती है और वह सबसे क्षमा मांगकर शराब छोड़ने का निश्चय करता है।
दूसरी ओर शिखा और दया को अपने किए व्यवहार पर पुन: सोचने को विवश करता है। इस दौरान नाटक ‘लेट मी फििनश’, ‘धर्मांतरण’ और ‘बूढ़ी काकी’ का मंचन किया गया।
नाटक के प्रमुख पात्रों में महर्षि कपूर ने दया, अनिल विश्वकर्मा ने शेखर, आकांक्षा वर्मा ने शिखा, नीतू शर्मा ने मिनी, अभिषेक श्रीवास्तव ने मामा सर, आर्यन यादव ने मैनेजर व डाक्टर, अभय दीक्षित ने पुलिस इंस्पेक्टर और विनय सिंह हार्दिक ने नशेबाज युवक की भूमिका निभाई।