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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Azamgarh News ›   Three departments of one crore embezzlement co-operative bank

तीन विभागों के एक करोड़ दबा गया कोआपरेटिव बैंक

Tue, 05 Sep 2017 11:51 PM IST
आजमगढ़/ब्यूरो, अमर उजाला
आजमगढ़/ब्यूरो, अमर उजाला Updated Tue, 05 Sep 2017 11:51 PM IST
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आजमगढ़। सपा सरकार के दौरान दिसंबर 2013 में छात्रवृत्ति, शुल्क प्रतिपूर्ति और पेंशन रुपये पौने तीन करोड़ रुपये के घोटाले की शिकायत हुई थी। मामले की जांच की गई तो कोआपरेटिव बैंक की बूढ़नपुर शाखा ने एक करोड़ रुपये मुख्य शाखा को ये कहते हुए लौटा दिए कि शाखा पर सूची और खाता संख्या न होने के कारण ये धनराशि अवितरित पड़ी हुई है।
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इसे विभागों के नेशनल खाते में वापस कर दिया जाए। रुपया वापस आने के बाद बैंक ने विभाग के खातों में इसे वापस नहीं किया, बल्कि इसका वितरण अपने कर्मचारियों की सैलरी देने में कर दिया। विभागों की ओर से मांग की गई तो बहाने बनाए जाने लगे। जिलाधिकारी के संज्ञान में मामला आने के बाद तुरंत रुपये वापस करने को कहा गया, अन्यथा रिपोर्ट दर्ज कराने की चेतावनी दी गई है।
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जून 2013 में तत्कालीन जिला पंचायत सदस्य चंद्रजीत यादव ने जिलाधिकारी से शिकायत की थी कि जिला सहकारी बैंक की शाखा बूढ़नपुर में छात्रवृत्ति, शुल्क प्रतिपूर्ति और पेंशन के रूप में पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग की ओर से एक करोड़ 24 लाख 69 हजार, समाज कल्याण विभाग की ओर से 76 लाख 78 हजार और अल्पसंख्यक कल्याण विभाग की ओर से 76 लाख 73 हजार रुपये भेजे गए हैं।
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इन रुपयों की बैंक और विभागीय अधिकारियों की ओर से मिलीभगत कर खुर्दबुर्द करने की तैयारी है। शिकायत के बाद विभाग ने मामले की जांच अपर सांख्यिकी अधिकारी सुनील सिंह कौ सौंपी। जांच शुरू होने के बाद 31 दिसंबर 2013 को जिला सहकारी बैंक की बूढ़नपुर शाखा ने लगभग 91 लाख रुपये ये कहते बैंक की मुख्य शाखा को स्थानांतरित कर दिया कि शाखा पर इस रुपये से संबंधितों की ना सूची है और न खाता संख्या।

अत: इसे संबंधित विभागों के नेशनल खाते में स्थानांतरित कर दिया जाए, लेकिन आज तक बैंक की ओर से इन रुपयों को विभागों को खाते में नहीं भेजा गया। जिला समाज कल्याण अधिकारी ने बताया कि मामले में कई बार जिला सहकारी बैंक के प्रबंधक से रुपया वापस करने की बात कही गई, लेकिन वो रुपये कर्मचारियों के वेतन पर खर्च होने और फंड न होने का बहाना बहाने लगे।
 
रुपया वापस न मिलने पर मसले से जिलाधिकारी को अवगत कराया गया। जिलाधिकारी ने तुरंत रुपया ब्याज समेत वापस करने को कहा। इस पर शाखा प्रबंधक ने बताया कि फंड न होने की वजह से रुपया वापस नहीं हो सका था। जिलाधिकारी की ओर से रुपया वापस न लौटाने पर रिपोर्ट दर्ज कराने की शाखा प्रबंधक को चेतावनी दी गई है।

वर्ष 2012 में बैंक का लाइसेंस जब्त हो गया था। फंड नहीं होने से रुपया वापस नहीं किया जा सका। 20 सितंबर 2016 को लाइसेंस वापस कर दिया गया है। बैंक के पास 106 करोड़ रुपये भी हैं। जिलाधिकारी ही इसके अध्यक्ष हैं। अगली बैठक में रुपया वापस करने का प्रस्ताव रखा जाएगा। पास होने पर इसे विभागों को लौटा दिया जाएगा। जगदीश चंद्रा, प्रबंधक जिला सहकारी बैंक मुख्य शाखा।

ईओडब्ल्यू कर सकती है 150 करोड़ के घोटाले की जांच  

आजमगढ़ । कल्याणकारी योजनाओं के जरिए बीते दस वर्षों में जिले में 150 करोड़ से अधिक का घोटाला हुआ है। इसमें छात्रवृत्ति, कन्या विद्याधन, विधवा पेंशन, विकलांग पेंशन और अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के कई मद शामिल हैं। वर्ष 2007 से 2013 तक विभिन्न मदों में मिलीभगत कर वित्तीय अनियमितता करने की शिकायत मिलने पर तात्कालीन डीएम रणवीर प्रसाद ने पूरे मामले की जांच करने के निर्देश दिए थे।

सीडीओ के नेतृत्व में चार सदस्यीय जांच टीम का गठन किया। जांच शुरू हुई तो करीब 50 से अधिक कालेजों की ओर से अपने-अपने विद्यालय में छात्रों की संख्या फर्जी/काल्पनिक दिखाकर दशमोत्तर छात्रवृत्ति एवं शुल्क प्रतिपूर्ति हजम करने का मामला सामने आया। वर्ष 2012-13 में जनता इंटर कालेज पतिला गौसपुर में महज 72 छात्रों के पंजीकरण हुए थे।

इसके सापेक्ष विद्यालय में 1177 छात्रों को दशमोत्तर छात्रवृत्ति एवं शुल्क प्रतिपूर्ति फर्जी खातों के माध्यम से ले ली गई थी। धन का भुगतान जिले के यूनियन बैंक आफ इंडिया और जिला सहकारी बैंक के 37 से अधिक शाखाओं से किया गया था। जांच के बाद सबूत मिलने पर 2.80 करोड़ रुपये के घोटाले के मामले में जिले के कप्तानगंज थाने में दो, सिधारी और शहर कोतवाली में एक-एक रिपोर्ट दर्ज कराई गई।

इसमें तत्कालीन समाज कल्याण अधिकारी सहित कुल 34 लोगों को नामजद किया गया। जांच अधिकारी ने इसके अलावा 43 करोड़ के और घोटाले की बात भी कही थी। इसके मद्देनजर डीएम ने मामले बड़ा होने पर एसपी के साथ शासन को पत्र भेज एजेंसी से जांच कराने की मांग थी। पुलिस की कार्रवाई भी महज रिपोर्ट दर्ज करने तक ही सिमटकर रह गई।

ऊपर से भी कोई जांच नहीं आई। बड़े पैमाने पर हुए फर्जीवाड़ा के दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई न होने पर 22 मार्च 2016 को तात्कालीन डीएम सुहास एलवाई ने कार्रवाई के लिए प्रमुख सचिव समाज कल्याण विभाग को पत्र भेजा। इसका भी कोई खास असर नहीं दिखा। मामला ज्यों का त्यों पड़ा हुआ है।


पिछले दिनों ने मुंडलायुक्त के रथविंद्र नायक ने पूरे मामले की फाइल तलब की थी। दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई के लिए डीएम और एसपी को निर्देश दिया है। इसके बाद जिलाधिकारी और एसपी की ओर से फिर मामले की जांच आर्थिक अपराध अनुसंधान शाखा से कराने के ािलए शासन को लिखा गया है।
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