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ऑॅनर किलिंग मामले में ससुर को उम्रकैद
अमर उजाला ब्यूरो/आजमगढ
Updated Wed, 31 Aug 2016 11:50 PM IST
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जिला एवं सत्र न्यायाधीश राजेंद्र कुमार ने ऑनर किंलिग के मामले में एक आरोपी को दोषी पाते हुए बुधवार को उम्रकैद की सजा सुनाई। साथ ही 25 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया। घटना रौनापार थाना क्षेत्र परसिया गांव की है।
मुकदमे के अनुसार, परसिया गांव में 10 जून 2009 को गोली लगने से घायल रुसुमा सिंह की उपचार के दौरान जिला अस्पताल में मौत हो गई। इस मामले में परसिया गांव निवासी अजय सिंह पटेल ने अपने पिता जयकरन के विरुद्ध हत्या का मुकदमा दर्ज कराया था। इसमें उसने पुलिस को बताया था कि घटना के लगभग चार वर्ष पूर्व वह अपनी मर्जी से बुआ की लड़की से शादी की और उसे लेकर लुधियाना चला गया।
वहां जाकर प्राइवेट कंपनी में नौकरी करने लगा। बाद में उसे दो बच्चे भी पैदा हुए। काफी दिनों बाद जब वह लुधियाना से घर वापस लौटा तो उसके पिता रुसुमा को देखकर आपा खो बैठे और घर के अंदर से तमंचा लेकर आए और जान मारने की नीयत से रुसुमा पर गोली चला दी। गोली लगने से घायल रुसुमा को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। जहां उसकी मौत हो गई। इस मामले में रौनापार थाना पुलिस ने आरोप पत्र न्यायालय में प्रेषित किया।
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मुकदमे के परीक्षण के दौरान अभियोजन पक्ष की तरफ से इस मुकदमे की पैरवी कर रहे जिला शासकीय अधिवक्ता दशरथ यादव और सहायक शासकीय अधिवक्ता राजेंद्र कुमार श्रीवास्तव ने कुल दस गवाहों को पेश किया। बचाव पक्ष की तरफ से मृतका के माता-पिता समेत कुल चार गवाह पेश हुए।
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मुकदमे के अनुसार, परसिया गांव में 10 जून 2009 को गोली लगने से घायल रुसुमा सिंह की उपचार के दौरान जिला अस्पताल में मौत हो गई। इस मामले में परसिया गांव निवासी अजय सिंह पटेल ने अपने पिता जयकरन के विरुद्ध हत्या का मुकदमा दर्ज कराया था। इसमें उसने पुलिस को बताया था कि घटना के लगभग चार वर्ष पूर्व वह अपनी मर्जी से बुआ की लड़की से शादी की और उसे लेकर लुधियाना चला गया।
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वहां जाकर प्राइवेट कंपनी में नौकरी करने लगा। बाद में उसे दो बच्चे भी पैदा हुए। काफी दिनों बाद जब वह लुधियाना से घर वापस लौटा तो उसके पिता रुसुमा को देखकर आपा खो बैठे और घर के अंदर से तमंचा लेकर आए और जान मारने की नीयत से रुसुमा पर गोली चला दी। गोली लगने से घायल रुसुमा को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। जहां उसकी मौत हो गई। इस मामले में रौनापार थाना पुलिस ने आरोप पत्र न्यायालय में प्रेषित किया।
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मुकदमे के परीक्षण के दौरान अभियोजन पक्ष की तरफ से इस मुकदमे की पैरवी कर रहे जिला शासकीय अधिवक्ता दशरथ यादव और सहायक शासकीय अधिवक्ता राजेंद्र कुमार श्रीवास्तव ने कुल दस गवाहों को पेश किया। बचाव पक्ष की तरफ से मृतका के माता-पिता समेत कुल चार गवाह पेश हुए।