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सुरक्षा एजेंसी सक्रिय, हो रही नेटवर्क की जांच
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आजमगढ़। सरायमीर थाना क्षेत्र के नंदाव बाजार में बुधवार की रात 3.43 लाख रुपये की नकली नोट के साथ दो आरोपियों की गिरफ्तारी होने के बाद से सुरक्षा एजेंसियों के कान खड़े हो गए हैं। पुलिस के साथ-साथ सुरक्षा एजेंसियों के लोग भी इस बात की जांच पड़ताल करने में जुट गए हैं कि इस कारोबार के पीछे किसका हाथ है। जांच के दौरान पूर्व में भी नकली नोट के साथ पकड़े गए लोगों के नेटवर्क को खंगाला जा रहा। एजेंसियों को शक है कि कहीं इसके पीछे पुन: पाकिस्तान की सुरक्षा एजेंसी आईएसआई का हाथ तो नहीं है। जानकारों की मानें तो नकली नोट के कारोबार 20 हजार रुपये के बदले एक लाख रुपये नकली नोट देते हैं।
नोटबंदी के बाद जिले में नकली नोट के साथ गिरफ्तार होने वालों पर गौर करें तो छह अक्तूबर को रौनापार थाने की पुलिस ने बाजार के देशी शराब के ठेके से दो आरोपियों को गिरफ्तार कर उनके पास से 14800 रुपये की नकली नोट बरामद की थी। गिरफ्तार आरोपियों में रौनापार थाना क्षेत्र के निबिहवा गांव निवासी सुभाष यादव और आराजी अजगरा मगर्वी गांव निवासी राधेश्याम यादव का नाम शामिल है। जांच के दौरान पता चला कि इन दोनों के तार मऊ में एसटीएफ द्वारा पकड़े गए आरोपियों से जुड़े हैं। हालांकि इस मामले की जांच की बजाय मामला दब गया। इस घटना के कुछ ही दिनों बाद सरायमीर थाने की पुलिस ने 25 सौ रुपये नकली नोट के साथ एक आरोपी नंदाव बाजार निवासी शुभम यादव को गिरफ्तार कर चुकी है। नंदाव बाजार से बुधवार की रात हुई यह दूसरी बड़ी कार्रवाई है।
जबकि इसके पूर्व वर्ष 2015 में फूलपुर कोतवाली पुलिस ने करीब 1.45 लाख रुपये की नकली नोट के साथ गंभीरपुर थाना क्षेत्र के मंगरावा गांव निवासी सफीक अहमद को गिरफ्तार की थी। सफीक के पास से बरामद हुई नोटों की जांच करवाने पर उजागर हुआ था कि इन सभी नोटों की प्रिटिंग पाकिस्तान में हुई है। इसकी पुष्टि महाराष्ट्र के नासिक नोट छापा खाने से भेजी गई रिपोर्ट से हुई। जांच रिपोर्ट आने के बाद भी कोई सक्रियता नहीं बरती जा सकी। सफीक की गिरफ्तारी से पहले 21 हजार रुपये की नकली नोट के साथ अहरौला थाने की पुलिस ने साल 2012 में दो आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है। जबकि सरायमीर थाने की पुलिस द्वारा वर्ष 2014 में 26 हजार रुपये की नकली नोट के साथ तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है। इसीक्रम में सिधारी थाने की दस हजार रुपये के साथ और शहर कोतवाली पुलिस द्वारा साल 2010 में पांच हजार रुपये की नोट के साथ चार आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है।
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सरायमीर के नंदाव बाजार से भारी मात्रा में नकली नोट के साथ दो आरोपियों की गिरफ्तारी होने के बाद पुलिस के साथम-साथ सुरक्षा एजेंसियां भी सक्रिय हो गई हैं। नकली नोट से जुड़े नए और पुराने रिकार्ड खंगाला जा रहा है। ताकि इस बात की जानकारी हो सके कि इस गिरोह के पीछे कौन मास्टर माइंड है। नरेंद्र प्रताप सिंह, एसपी ग्रामीण
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नोटबंदी के बाद जिले में नकली नोट के साथ गिरफ्तार होने वालों पर गौर करें तो छह अक्तूबर को रौनापार थाने की पुलिस ने बाजार के देशी शराब के ठेके से दो आरोपियों को गिरफ्तार कर उनके पास से 14800 रुपये की नकली नोट बरामद की थी। गिरफ्तार आरोपियों में रौनापार थाना क्षेत्र के निबिहवा गांव निवासी सुभाष यादव और आराजी अजगरा मगर्वी गांव निवासी राधेश्याम यादव का नाम शामिल है। जांच के दौरान पता चला कि इन दोनों के तार मऊ में एसटीएफ द्वारा पकड़े गए आरोपियों से जुड़े हैं। हालांकि इस मामले की जांच की बजाय मामला दब गया। इस घटना के कुछ ही दिनों बाद सरायमीर थाने की पुलिस ने 25 सौ रुपये नकली नोट के साथ एक आरोपी नंदाव बाजार निवासी शुभम यादव को गिरफ्तार कर चुकी है। नंदाव बाजार से बुधवार की रात हुई यह दूसरी बड़ी कार्रवाई है।
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जबकि इसके पूर्व वर्ष 2015 में फूलपुर कोतवाली पुलिस ने करीब 1.45 लाख रुपये की नकली नोट के साथ गंभीरपुर थाना क्षेत्र के मंगरावा गांव निवासी सफीक अहमद को गिरफ्तार की थी। सफीक के पास से बरामद हुई नोटों की जांच करवाने पर उजागर हुआ था कि इन सभी नोटों की प्रिटिंग पाकिस्तान में हुई है। इसकी पुष्टि महाराष्ट्र के नासिक नोट छापा खाने से भेजी गई रिपोर्ट से हुई। जांच रिपोर्ट आने के बाद भी कोई सक्रियता नहीं बरती जा सकी। सफीक की गिरफ्तारी से पहले 21 हजार रुपये की नकली नोट के साथ अहरौला थाने की पुलिस ने साल 2012 में दो आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है। जबकि सरायमीर थाने की पुलिस द्वारा वर्ष 2014 में 26 हजार रुपये की नकली नोट के साथ तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है। इसीक्रम में सिधारी थाने की दस हजार रुपये के साथ और शहर कोतवाली पुलिस द्वारा साल 2010 में पांच हजार रुपये की नोट के साथ चार आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है।
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सरायमीर के नंदाव बाजार से भारी मात्रा में नकली नोट के साथ दो आरोपियों की गिरफ्तारी होने के बाद पुलिस के साथम-साथ सुरक्षा एजेंसियां भी सक्रिय हो गई हैं। नकली नोट से जुड़े नए और पुराने रिकार्ड खंगाला जा रहा है। ताकि इस बात की जानकारी हो सके कि इस गिरोह के पीछे कौन मास्टर माइंड है। नरेंद्र प्रताप सिंह, एसपी ग्रामीण