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मतदाताओं की खामोशी बढ़ा रही प्रत्याशियों की बेचैनी
Updated Thu, 16 Nov 2017 12:06 AM IST
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आजमगढ़। नगरपालिका चुनाव में मैदान में उतरे प्रत्याशी मतदाताओं को अपने पक्ष में करने की फिराक में जुटे हुए हैं लेकिन मतदाताओं की खामोशी प्रत्याशी की बेचैनी को बढ़ा रही है। ऐसे में प्रत्याशियों की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। क्योंकि मतदाता अपने दर पर आने वाले सभी प्रत्याशियों के साथ एक जैसा व्यवहार कर रहे हैं।
नगर निकाय चुनाव के लिए अपने जनपद की दो नगरपालिकाओं और 11 नगर पंचायतों में 22 दिसंबर को मतदान होना है। मतदान में एक हफ्ते का समय शेष है। जैसे-जैसे समय नजदीक आता जा रहा है। प्रत्याशियों के प्रचार की रफ्तार तेज होती जा रही है। प्रत्याशी समर्थकों के साथ सुबह चार बजे से ही मैदान में उतर रहे हैं। देर रात लगभग 12 बजे तक घर-घर दस्तक देने के बाद कार्यालय पहुंच रहे हैं। जहां वह समर्थकों के साथ बैठकर दूसरे दिन की रणनीति बनाते हैं। कुछ घंटों की नींद लेने के बाद वह समर्थकों के साथ ही दोबारा मैदान में उतर जाते हैं। लेकिन मतदाताओं की खामोशी प्रत्याशियों के माथे पर चिंता की लकीरें खींच रही है। मतदाता हर प्रत्याशी से उसे ही वोट देने का वादा कर रवाना कर रहे हैं। कोई भी मतदाता अभी तक खुल नहीं रहा है कि वह किसके पक्ष में मतदान करेगा। मतदाताओं की चुप्पी को तोड़ने का प्रयास प्रत्याशियों द्वारा किया जा रहा है लेकिन मतदाता खामोश हैं। उनकी यही खामोशी प्रत्याशियों की सिरदर्द बनी हुई है।
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नगर निकाय चुनाव के लिए अपने जनपद की दो नगरपालिकाओं और 11 नगर पंचायतों में 22 दिसंबर को मतदान होना है। मतदान में एक हफ्ते का समय शेष है। जैसे-जैसे समय नजदीक आता जा रहा है। प्रत्याशियों के प्रचार की रफ्तार तेज होती जा रही है। प्रत्याशी समर्थकों के साथ सुबह चार बजे से ही मैदान में उतर रहे हैं। देर रात लगभग 12 बजे तक घर-घर दस्तक देने के बाद कार्यालय पहुंच रहे हैं। जहां वह समर्थकों के साथ बैठकर दूसरे दिन की रणनीति बनाते हैं। कुछ घंटों की नींद लेने के बाद वह समर्थकों के साथ ही दोबारा मैदान में उतर जाते हैं। लेकिन मतदाताओं की खामोशी प्रत्याशियों के माथे पर चिंता की लकीरें खींच रही है। मतदाता हर प्रत्याशी से उसे ही वोट देने का वादा कर रवाना कर रहे हैं। कोई भी मतदाता अभी तक खुल नहीं रहा है कि वह किसके पक्ष में मतदान करेगा। मतदाताओं की चुप्पी को तोड़ने का प्रयास प्रत्याशियों द्वारा किया जा रहा है लेकिन मतदाता खामोश हैं। उनकी यही खामोशी प्रत्याशियों की सिरदर्द बनी हुई है।
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